...तो इस वजह से 2 हफ्ते बाद 'विश्वास मत' चाहते हैं सीएम नीतीश कुमार
नई दिल्ली, 11 अगस्त। नीतीश कुमार के बिहार के सीएम पद की शपथ लेने के बाद विधानसभा का पहला सत्र 24 अगस्त से शुरू होने जा रहा है। नई सरकार बनने के बाद सदन के इस सत्र में महागठबंधन सरकार को बहुमत साबित करना है। वहीं लेकिन नई सरकार दो हफ्ते बाद फ्लोर टेस्ट का सामना करना चाहती है। सूत्रों की मानें तो इसके लिए पीछे सीएम नीतीश की एक खास योजना है।

एनडीए से अगल होने ने बाद नीतीश कुमार ने महागठबंधन से जुड़कर नई सरकार तो बना ली लेकिन स्पीकर अभी जदयू के पूर्व सहयोगी दल भाजपा से ही हैं। वहीं दूसरी ओर मजबूत बहुमत होने के बावजूद महागठबंन किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहता। ऐसे में प्लान ये है कि बिहार विधानसभा में फ्लोर टेस्ट से पहले गठबंधन पहले इसे स्पीकर विजय कुमार सिन्हा को हटाया जाय।
अब तकनीकी पहलू की बात करें तो विधानसभा का सत्र राज्यपाल बुलाते हैं। लेकिन राज्यपाल सरकार की सिफारिश के अनुसार ही कार्य करते हैं। लेकिन महागठबंधन की योजना है कि पहले विधानसभा स्पीकर विजय सिन्हा को अविश्वास मत के जरिए हटाया जाए और सत्र के पहले दिन एक नया अध्यक्ष चुना जाए। बिहार की नई सरकार 25 अगस्त को नीतीश कुमार के विश्वास मत का सामना करने से पहले ये सब करना चाहती है।
वहीं महागठबंधन के 55 विधायकों ने स्पीकर विजय कुमार सिन्हा के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश कर दिया है। लेकिन नियमों की बात करें तो इसे सदन में प्रस्तुत करने के दो सप्ताह बाद ही लिया जा सकता है।












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