Nishant Kumar ही होंगे नीतीश कुमार के उत्तराधिकारी, सरस्वती पूजा में हो गया कन्फर्म!
Nishant Kumar Political Debut: पिछले काफी समय से बिहार की राजनीति में बदलाव की चर्चा चल रही है। इसमें सबसे ऊपर नीतीश कुमार के बेटे निशांत के राजनीति में आने की अटकलें भी हैं। सूत्रों के हवाले से यहां तक दावा किया जाता रहा है कि निशांत के पॉलिटिकल डेब्यू के लिए खुद पीएम मोदी और अमित शाह भी उत्सुकता दिखा चुके हैं। सरस्वती पूजा के मौके पर पटना में एक बार फिर इन चर्चाओं को बल मिला है।
जनता दल यूनाइटेड (जदयू) आईटी सेल की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम के बाद से निशांत कुमार सोशल मीडिया पर छाए हुए हैं। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ उनके बेटे निशांत कुमार की मौजूदगी को राजनीतिक संकेतों के तौर पर देखा जा रहा है।

Nishant Kumar की जल्द होगी राजनीति में एंट्री
कार्यक्रम में सबसे पहले निशांत कुमार पहुंचे और उन्होंने मां सरस्वती की विधिवत पूजा-अर्चना की। बताया जा रहा है कि पूजा के कुछ देर बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार केंद्रीय मंत्री और जदयू सांसद ललन सिंह और विजय चौधरी के साथ पहुंचे। नीतीश ने वहां बेटे को देखकर मुस्कुराते हुए कहा, 'तुम भी आए हो जी!'। इसके बाद दोनों ने हाथ मिलाया और फिर नीतीश ने पिता का आशीर्वाद लिया बिहार में आम तौर पर सरस्वती पूजा के दिन से ही पहली बार बच्चों को कॉपी-किताब छुआई जाती है। इसे विद्यारंभ के लिए शुभ दिन माना जाता है। यही वजह है कि निशांत के राजनीति में आने की चर्चा तेज हो गई है।
JDU के सीनियर लीडर्स भी थे कार्यक्रम में मौजूद
पूजा के दौरान निशांत कुमार ने ललन सिंह और विजय चौधरी के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। इसके बाद सभी नेताओं ने एक साथ मां सरस्वती की पूजा की। पूरे कार्यक्रम में धार्मिक और सौहार्दपूर्ण माहौल बना रहा। हालांकि, इस आयोजन की सबसे बड़ी चर्चा का विषय निशांत कुमार की सक्रिय मौजूदगी रही। बात दें कि कुछ समय पहले नीतीश कुमार की दिल्ली में पीएम मोदी और अमित शाह से मुलाकात हुई थी। इस दौरान भी निशांत के राजनीति में आने पर चर्चा हुई।
Nitish Kumar की विरासत को लेकर मिल रहे संकेत
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कार्यक्रम महज एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं था। बिहार के सांस्कृतिक-सामाजिक जीवन को देखें, तो यह एक स्पष्ट संकेत है। निशांत कुमार जल्द ही राजनीति में कदम रख सकते हैं, इसके पहले भी कई संकेत मिले हैं। जदयू आईटी सेल के कार्यक्रम में उनकी भागीदारी को लेकर सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह उनका सॉफ्ट पॉलिटिकल डेब्यू है। हालांकि, पार्टी या परिवार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
बिहार की राजनीति में उत्तराधिकार हमेशा रहा मुद्दा
बिहार की राजनीति में उत्तराधिकार और नई पीढ़ी की एंट्री को लेकर हमेशा चर्चाएं होती रही हैं। ऐसे में सरस्वती पूजा जैसे सार्वजनिक कार्यक्रम में निशांत कुमार की मौजूदगी को आने वाले समय में उनकी राजनीतिक भूमिका की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वह औपचारिक रूप से जदयू की राजनीति में उतरते हैं या फिलहाल ये केवल अटकलें ही साबित होंगी।
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