बिहार: 52 परत का खाजा, विदेशों में 5100 प्रति किलो है कीमत, उद्योग विभाग से मिल चुका है GI टैग
काली शाह नाम के एक शख्स ने काफी साल पहले मिठाई की दुकान खोली थी, कुछ नया बनाने के जूनून में उन्होंने मिठाई के तौर पर खाजा बनाया। वह खाजा मिठाई के तौर पर लोगों खूब पसंद आने लगी। खाजा का खुमार लोगों को ऐसा चढ़ा कि शादी विव
नालंदा, 3 अगस्त 2022। बिहार से आपको हर क्षेत्र में प्रतिभा के धनी लोग मिल जाएंगे। वहीं अब बिहार का खाजा विदेशों में भी प्रदेश की अलग पहचान बना रहा है। जी हां आपको यह सुनकर काफ़ी हैरानी होगी कि खाजा से विदेशों में कैसे पहचान मिलेगी। तो आईए विस्तार से जानते हैं 52 परत वाले खाजा के बारे में, जिसे विदेशों में सप्लाई किया जा रहा है। इसेक साथ ही 5100 रुपये प्रति किलो के हिसाब सप्लाई भी किया जा रहा है। नालंदा मुख्यालय बिहार शरीफ से महज 18 किलोमीटर की दुरी पर स्थित सिलाव में खाजा की एक दुकान है। जो की अब विदेशों में भी मशहूर हो गई है।
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काली शाह ने सिलाव में खोली थी दुकान
काली शाह नाम के एक शख्स ने काफी साल पहले मिठाई की दुकान खोली थी, कुछ नया बनाने के जूनून में उन्होंने मिठाई के तौर पर खाजा बनाया। वह खाजा मिठाई के तौर पर लोगों खूब पसंद आने लगी। खाजा का खुमार लोगों को ऐसा चढ़ा कि शादी विवाह में भी सौगात के तौर पर खाजे का इस्तेमाल किया जाने लगा। काली शाह का व्यवसाय बढ़ने लगा, इसे देखते हुए उनका पूरा परिवार ही खाजा के व्यवसाय से जुड़ गया। सभी लोगों ने खाजा बनाने के साथ ही दूसरी जगह खाजा की सप्लाई भी शुरू कर दी। धीरे धीरे खाजा इतना मशहूर हो गया कि विदेशों से भी खाजे की डिमांड आने लगी।

5100 रुपये प्रति किलो होती है सप्लाई
काली शाह का खाजा विदेशों में 5100 रुपये प्रति किलो के हिसाब से सप्लाई किया जाने लगा। स्थानीय लोग बताते हैं कि आज पुरे सिलाव में ज़्यादातर खाजा का दुकान काली शाह के नाम से चलाया जा रहा है। ग़ौरतलब है कि 52 परत का खाजा बिहार का पहला मिठाई है जिसे तीन साल पहले जीआई टैग मिला है। सिलाव में कई प्रकार का खाजा बनाया जा रहा है। जिसमें मीठा, नमकीन के साथ शुद्ध घी और रिफाइन का खाजा भी तैयार किया जा रहा है। पूरे सिलाव में 100 से भी ज़्यादा खाजा की दुकानें हैं।

एप्प के ज़रिए खाजा की बुकिंग
खाजा दुकानदार संजीव कुमार ने बताया की यह दुकान उनके पूर्वज की है। मॉरीशस में जाकर उनके दादा ने खाजा का स्टॉल लगाया था। उस समय उन्हें अंतराष्ट्रीय अवार्ड से सम्मानित किया गया था। इसके बाद उद्योग विभाग की पहल पर 3 साल पहले खाजा को जीआई टैग भी मिला। इसके बाद ऐप्प के ज़रिए खाजा की ऑनलाइन बुकिंग शुरू हुई। ऑनलाइन बुकिंग शुरू होने से विदेशों में भी खाजे की काफी मांग होने लगी। विदेशों में मांग बढ़ने की वजह से कोरियर कंपनी से संपर्क कर ख्वाजा को विदेश भेजने का काम शुरू किया गया है।

विदेशों में बढ़ी खाजा की डिमांड
संजीव कुमार ने बताया कि विदेशों में मांग बढ़ने की वजह 5100 प्रति किलो के हिसाब से खाजा भेजा जा रहा है। खाजा को बनाने में काफी तादाद में कारीगर लगे रहते हैं। इसे बनाने में मैदा चीनी, शुद्ध घी और रिफाइन का इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने बताया कि खाजा की खासियत यह है कि इसके 52 परत होते हैं। इसके बावजूद 1 किलो में 40 पीस खाजा होता है। खाजा बनाने में गुणवत्ता का पूरा ख्याल रखा जाता है। यह वजब है कि खाजा की डिमांड विदेशों में भी काफ़ी बढ़ी है।
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