छात्रों को मुफ्त में तालीम और स्टडी मैटेरियल दे रहे इंजीनियर मोनू, अनोखे ‘गुरुकुल’ की जमकर हो रही तारीफ
Bihar Sharif Gurukul: हुसैनपुर गांव (रहुई प्रखंड) में मोनू कुमार अनोखा गुरुकुल संचालित कर रहे हैं। जहां बच्चों को मुफ्त में शिक्षा के साथ ही प्राचीन परंपराओं की भी जानकारी दी जा रही है।

Education In Nalanda: बिहार में शिक्षा व्यवस्था पर आए दिन सवाल उठते रहे हैं। सरकारी स्कूलों में पढ़ाई को लेकर ज्यादातर छात्रों के परिजनों को शिकायत ही रहती है। वहीं कुछ ऐसे लोग भी हैं जो सरकार के भरोसे नहीं खुद के बलबूते पर अपने जिले की तस्वीर बदलने का हुनर रखते हैं।
Recommended Video
इंजीनियर से शिक्षक बने मोनू कुमार की कहानी कुछ ऐसी ही है। हुसैनपुर गांव (रहुई प्रखंड, बिहार शरीफ) नालंदा में वह एक गुरुकुल चला रहे हैं, जहां बच्चों को 'अ' अनार नहीं अर्जुन या अब्दुल कलाम पढ़ाया जाता है। गुरुकुल के जरिए मोनू प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय की परंपराओं ज़िंदा करने की कोशिश कर रहे हैं।
मोनू कुमार के गुरुकुल में छात्रों को ना सिर्फ विज्ञान, गणित और इतिहास पढ़ाया जाता है, बल्कि छात्रों को बुद्ध, रामानुजन, विवेकानंद और आर्यभट्ट जैसी बड़ी हस्तियों के बारे में भी जानकारी दी जा रही है। मोनू कुमार की मानें तो प्राचीन ग्रंथ जैसे भगवत गीता, वेदांत और उपनिषद के बारे में छात्र पढ़ेंगे तो उनका बौद्धिक विकास होगा।
मोनू कुमार ने कहा कि उन्होंने प्राचीन नालंदा यूनिवर्सिटी की पढ़ाई के तरीक़े से प्रेरित होकर इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ दी। गांव वापस आकर 'गुरुकुल' की शुरुआत की, साल 2021 से पेशौर पंचायत (रहुई प्रखंड) के छात्रों को मुफ्त में तालीम दे रहे हैं।
गणित, इतिहास, भारतीय संस्कृति और परंपराओं के साथ वेदांत को जोड़ते हुए मोनू कुमार एक अलग पाठ्यक्रम तैयार किया है। जो छात्र इस पाठ्यक्रम के ज़रिए शिक्षा हासिल करना चाहते हैं, वह गुरुकुल में दाखिला लेकर पढ़ाई कर सकते हैं। अभी गुरुकुल में करीब 20 छात्र तालीम हासिल कर रहे हैं, जिनमें 5 लड़कियां भी शामिल हैं।
गुरुकुल के ज़रिए साल 2021 से अभी तक सैकड़ों छात्र मुफ्त शिक्षा हासिल कर चुके हैं। ग़ौरतलब है कि मुफ्त शिक्षा के साथ छात्रों को स्टडी मैटेरियल भी गुरुकुल की तरफ से ही दिया गया। हुसैनपुर मध्य विद्यालय में पढ़ रहे छात्र रोज़ान करीब 4 घंटे तक गुरुकुल की कक्षाओं में तालीम हासिल करते हैं।
गुरुकुल में पढ़ रहे छात्रों की मानें तो जिस तरह मोनू उन्हें पढ़ाते हैं, वैसी पढ़ाई स्कूल में नहीं होती है, इसलिए वह लोग रोज़ान करीब 4 घंटे तक गुरुकुल में आकर पढ़ते हैं। वहीं छात्रों का आरोप है कि स्कूल में कभी शिक्षक नहीं आते हैं, तो कभी क्लास ही नहीं होती है। इसलिए गुरुकुल में पढ़ कर वह अपने सपनों की उड़ान भरने की तैयारी कर रहे हैं।
मोनू कुमार गांव के बच्चों को पढ़ाने के साथ ही गंगा घाट पर सिविल सेवी की तैयारी भी मुफ्त में कवाते हैं। मोनू कुमार ने कहा कि हाई स्कूल पास कर जाने के बाद भी बच्चों की शैक्षणिक योग्यता में कमी है। इसलिए वह चाहते हैं कि बच्चों को पुरानी शैक्षणिक प्रणाली और एडवांस डिजिटल तकनीक दोनों के साथ तालीम दी जाए।
बच्चों को मुफ्त में तालीम देने वाले मोनू कुमार ने हरियाणा के कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से 2017 में बीटेक की डिग्री हासिल की है। चंडीगढ़ में 2018-19 में उन्होंने स्वामी विवेकानंद इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी) बतौर वरिष्ठ व्याख्याता काम किया। उन्हें पुरानी शिक्षा प्रणाली को वापस से ज़िंदा करने का जूनून था।
मोनू कुमार साल 2020 में वापस अपने गांव (बिहार) आए और फिर 'गुरुकुल' की नींव रखी और बच्चों को मुफ्त में तालीम देने का ज़िम्मा उठाया। अपनी ज़रूरतों को पूरा करने और गुरुकुल संचालित करने के लिए उन्होंने IIT की तैयारी कर रहे छात्रों को ट्यूशन देना शुरू किया। इस तरह वह अपने सपने को साकार करने में जुटे हुए हैं।












Click it and Unblock the Notifications