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Monday Motivation: IAS अधिकारियों को छठी पास महिला ने दी ट्रेनिंग, शांति देवी के बारे जानिए कुछ ख़ास

Monday Motivation, Shanti Devi News: बिहार की महिला किसी भी काम में पुरुष से कम नहीं हैं, विभिन्न क्षेत्रों में अपने हुनर का परचम लहराते हुए देश और प्रदेश का नाम रोशन कर रही हैं। इसी कड़ी में आज हम आपको बिहार के सहरसा ज़िले की रहने वाली शांति देवी के बारे में बताने जा रहे हैं। सिर्फ छठी कक्षा तक पढ़ी हुई महिला ने समाज में अपनी अलग पहचान बनाई है।

शांति देवी ख़ुद छठी पास हैं, लेकिन उन्होंने लबासना (मसूरी) में जाकर IAS अधिकारियों को ट्रेनिंग दी है। उनका मानना है कि अगर आप में जुनून और जज़्बा है तो फिर किसी भी चुनौती का सामना कर मंज़िल हासिल कर सकते हैं।

Monday Motivation: Sixth pass woman gave training to IAS officers, know about Shanti Devi

सहरसा ज़िले के मनोरी गांव (सोहा पंचायत, सोनवर्षा प्रखंड) की रहने वाली शांति देवी आज पूरे प्रदेश में महिलाओं के लिए मिसाल बन चुकी है। गांव के लोग उनकी तारीफ़ करते नहीं थकते हैं। लाल बहादुर शास्त्री एकेडमी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन (मसूरी) में बतौर ट्रेनर शांति देवी ने IAS अधिकारियों को क्लस्टर लेवल फेडरेशन(CLF), फार्मिंग प्रोसेस यूनिट में काम, आर्थिक मुनाफ़ा और टीम वर्क के बारे में बताया।

31 मई से 2 जून तक IAS अधिकारियों को मक्का की खेती और उसे बेचने की सिलसिलेवार ट्रेनिंग दी। शांति देवी की मानें तो पूरे देश के विभिन्न प्रदेशों से 220 IAS अधिकारी थे। माइक पर संबोधित करते हुए सभी अधिकारियों को बताया कि उन्होंने किस तरह खेती की दुनिया में क़दम रखा और आत्मनिर्भर बनीं।

शांति देवी के शुरूआती ज़िंदगी की बात करें तो उनका वक्त काफी मुश्किल भरा गुज़रा है। अपने बच्चों को तालीम दिलाने के लिए दूसरों के सहारे थीं, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। शांति देवी पहले पति, दो बेटे और एक बेटी वाले परिवार का गुज़ारा के लिए खेतों में मज़दूरी करती थीं।

खेती में मज़दूरी करते वक्त उन्हें बीज के लिए बाज़ार (शहर) की तरफ़ जाना होता था। इन परेशानियों को देखते हुए शांति देवी जीविका से जुड़ीं। इसके बाद साल 2018 में मक्का खरीदने वाली कंपनी की सचिव बनीं।
शांति देवी जब जीविका से जुड़ीं तो उन्होंने अपने पड़ोसी गांवों की महिलाओं को भी साथ जोड़ा। सभी को साथ लाते हुए 1800 महिलाओं का समूह बनाया।

संगठन में जुड़ी सभी महिलाओं से पांच सौ रुपये सहयोग लेते हुए 2 लाख रुपये के करीब जमा किए। इन्हीं रुपयों से मक्के का बिज़नेस स्टार्ट किया और गांव में ही खेती की ज़रूरतों के सारे सामान उपलब्ध करवाये और ख़ुद भी खेती करती रहीं। इस तरह कामयाबी सीढ़ियों पर चढ़ती गईं।

आज की तारीख में शांति देवी का कारोबार करोड़ों में है, वहीं उनके बच्चे अच्छी तालीम हासिल कर रहे हैं। बड़ा बेटा विक्रम कुमार ने बीटेक की डिग्री हासिल कर सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। वहीं बटी ऋचा कुमारी ने ग्रेजुएशन की बिहार पुलिस की तैयारी में जुटी हुई है। वहीं सबसे छोटा बेटा नवीन कुमार गांव में रहकर स्नातक की पढ़ाई कर रहा है।

शांति देवी ने कहा कि मसूरी जाने के लिए जब उनका नाम आया तो यकीन ही नहीं हुआ। IAS अधिकारियों के हुनर से पूरा देश चल रहा है, उन्हें ट्रेनिंग देना है। इस बात पर यक़ीन ही नहीं हो पा रहा था। फ्लाइट के ज़रिए पटना से दिल्ली और फिर देहरादून होते हुए मसूरी पहुंचीं। अधिकारियों को ट्रेनिंग देने बाद शांति देवी को सम्मानित भी किया गया।

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