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Mokama By Election: मोकामा विधानसभा सीट का इतिहास, जानिए कैसा रहा है यहां का समीकरण

मोकामा विधानसभा सीट पर हमेशा से ही बाहुबली नेताओं का कब्ज़ा रहा है। 1951 में मोकामा विधानसभा सीट घोषित हुई थी । बिहार की 178 विधानसभा सीट मोकामा से एक व्यक्ति के कई बार चुनाव जीतने का रिकॉर्ड रहा है। यहां मतदाताओं की...

पटना, 3 अक्टूबर 2022। बिहार के में दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव का ऐलान हो चुका है। 3 नवंबर को मोकामा और गोपालगंज विधानसभा सीट पर मतदान होंगे। गौरतलब है 7 अक्टूबर को अधिसूचना होगी। वहीं नामांकन की तारीख 14 अक्टूबर है। इसके अलावा 17 अक्टूबर तक नामांकन वापस ले सकते हैं। इन विधानसभा सीटों पर हुए मतदान के 6 नवंबर को नतीजे आएंगे। बिहार में उपचुनाव के मद्देनज़र दोनों सीटे हॉट मानी जा रही है। इसी कड़ी में हम आपको मोकामा विधानसभा सीट के सियासी समीकरण और इतिहास बताने जा रहे हैं।

मोकामा विधानसभा सीट पर रहा बाहुबलियों का क़ब्ज़ा

मोकामा विधानसभा सीट पर रहा बाहुबलियों का क़ब्ज़ा

मोकामा विधानसभा सीट पर हमेशा से ही बाहुबली नेताओं का कब्ज़ा रहा है। 1951 में मोकामा विधानसभा सीट घोषित हुई थी । बिहार की 178 विधानसभा सीट मोकामा से एक व्यक्ति के कई बार चुनाव जीतने का रिकॉर्ड रहा है। यहां मतदाताओं की संख्या ढाई लाख से ज्यादा है। जिसमें करीब 1.40 लाख पुरुष वोटर हैं, वहीं 1.12 लाख के करीब महिला मतदाता है। मोकामा विधानसभा सीट का ज्यादातर हिस्सा ग्रामीण क्षेत्र में और वहां भूमिहार समुदाय विनिंग फैक्टर माने जाते हैं। इस विधानसभी सीट पर सभी सियासी दल भूमिहार वोट बैंक पर क़ब्ज़ा जमाने के लिए इसी जाती के प्रत्याशी को टिकट देती आई है।

मोकामा सीट पर भूमिहारों का वर्चस्व

मोकामा सीट पर भूमिहारों का वर्चस्व

मोकामा विधानसभा का इतिहास रहा है कि यहां किसी भी दल का प्रत्याशी जीता लेकिन वह भूमिहार समुदाय से ही रहा है। 1990 से 2000 तक दिलीप सिंह (अनंत सिंह के भाई) मोकामा से विधायक रहे। लालू प्रसाद यादव की कैबिनेट में मोकामा विधायक दिलीप सिंह मंत्री भी रहे थे। वहीं 2000 के विधानसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार बाहुबली सूरजभान सिंह जेल में रहते हुए चुनावी दंगल में क़दम रखा और नीतीश कुमार के समर्थन से चुनावी बाज़ी जीत ली।

2015 में अनंत सिंह ने भरा था निर्दलीय पर्चा

2015 में अनंत सिंह ने भरा था निर्दलीय पर्चा

2005 के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार की पार्टी से अनंत सिंह प्रत्याशी बने और जीत दर्ज की। वही साल 2010 के विधानसभा चुनाव में भी अनंत सिंह ने जदयू की टिकट पर चुनावी ताल ठोकते हुए जीत दर्ज की। 2015 के विधानसभा चुनाव में अनंत सिंह का नीतीश कुमार से अनबन हो गया। इसके बाद अनंत सिंह ने निर्दलीय ताल ठोक दी और जीत भी दर्ज की। 2015 में अनंत सिंह ने जीत दर्ज करते हुए नीतीश कुमार की पार्टी जदयू के नीरज कुमार को शिकश्त दी थी।

अनंत सिंह की विधायकी जाने से हो रहा उपचुनाव

अनंत सिंह की विधायकी जाने से हो रहा उपचुनाव

अनंत सिंह ने 2020 के विधानसभा चुनाव में लालू यादव की पार्टी राजद की टिकट पर चुनावी बाज़ी खेली थी। जीत दर्ज करते हुए लगातार 5 बार मोकामा सीट से विधायक बने। मोकामा विधानसभा सीट का ज्यादातर हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों में है। भूमिहार सुमदाय का यहां वर्चस्व है। अनंत कुमार सिंह भी भूमिहार जाति से हैं इसलिए उन्हें चुनावी फायदा मिलता रहा है। अनंत सिंह की विधायकी समाप्त होने की वजह से यहां उपचुनाव हो रहा है। मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह पर घर में एके-47 और हैंड ग्रेनेड रखने के मामले में कार्रवाई हुई। एमपी/एमएलए कोर्ट ने दोषी करार देते हुए 10 साल की सज़ा सुनाई है। दोषी क़रार होने के साथ अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता भी ख़त्म हो गई।

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