Madhubani Lok Sabha Seat: हुकुम देव यादव के गढ़ में फिर खिलेगा BJP का कमल, या बदलेंगे समीकरण
Madhubani Lok Sabha Seat Profile And History: बिहार में आगामी चुनाव को लेकर सियासी चर्चा तेज़ हो चुकी है। वहीं राजनीतिक पार्टियों ने प्रदेश की सभी 40 सीटों पर चुनावी मंथन भी शुरु कर दिया है। प्रदेश के सियासी माहौल के बीच आज हम आपको बिहार की मधुबनी लोकसभा सीट का इतिहास और समीकरण बताने जा रहे हैं।
बिहार का मधुबनी जिला 1972 से पहले तक दरभंगा जिले का था। ग़ौरतलब है कि मधुबनी लोकसभा क्षेत्र का दायरा, मधुबनी और दरभंगा दोनों जिलों में है। मधुबनी लोकसभा क्षेत्र में 6 विधानसभा सीटें आती हैं, इन 6 सीटों में से 4 मधुबनी ज़िले की है, वहीं 2 विधानसभा सीटें दरभंगा जिले की हैं।

1976 से पहले इस क्षेत्र को जयनगर लोकसभा सीट की संज्ञा दी जाती थी। चुनावी इतिहास पर नज़र डालें तो पहले इस सीट पर कांग्रेस का क़ब्ज़ा रहा, बाद में वामपंथियों ने परचम बुलंद किया। मौजूदा वक्त की बात करें तो यहां भारतीय जनता पार्टी का झंडा बुलंद है।
मधुबनी लोकसभा सीट को भाजपा के दिग्गज नेता हुकुमदेव नारायण यादव का गढ़ माना जाता है। क्योंकि इस सीट से सबसे ज़्यादा जीत दर्ज करने का रिकॉर्ड हुकुमदेव नारायण यादव के नाम है। 5 बार वह भाजपा की टिकट पर पार्टी का परचम बुलंद कर सांसद चुने गए हैं।
मधुबनी लोकसभा सीट के मौजूदा सांसद भाजपा नेता डॉ. अशोक कुमार यादव हैं। ग़ौरतलब है कि अरुण यादव, हुकुमदेव नारायण यादव के बेटे हैं। जातीय समीकरणों की बात करें तो इस सीट पर ब्राह्मणों की तादाद ज़्यादा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2 लाख 70 हजार के करीब ब्राह्मण मतदाता हैं।
2 लाख 35 हज़ार के करीब यादव वोटर हैं, वहीं मुस्लिम मतदाताओं की तादाद 2 लाख 15 हज़ार के करीब है। वहीं अति पिछड़ा मतदाताओं की तादाद 6 लाख 10 हज़ार के करीब है। इसके अलावा 2 लाख के करीब दलित मतदाता, 1 लाख 10 हजार के करीब कोइरी मतदाता हैं।
पिछली लोकसभा चुनाव के आंकड़ों पर नज़र डालें तो भाजपा प्रत्याशी डॉ. अशोक कुमार यादव ने बद्री कुमार पूर्वे (VIP, प्रत्याशी) को सियासी मात दी थी। उन्हें 5 लाख, 95 हज़ार 843 मत हासिल हुए थे। आपको बता दें कि इससे पहले डॉ. अशोक कुमार यादव दरभंगा के केवटी विधानसभा से 3 बार विधायक रह चुके हैं।
महागठबंधन की तरफ़ से चुनावी मैदान में उतरे बद्री कुमार 1 लाख, 40 हज़ार 903 मत ही मिले थे। हालांकि, जातीय जनगणना की वजह से सियासी समीकरण बदले हैं। चुनावी गलियारों में यह चर्चा तेज़ है कि इस बार मधुबनी सीट पर टफ फाइट देखने को मिल सकती है।












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