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Jitan Ram Manjhi: किस जाति से हैं जीतन राम मांझी, जानें 'चूहा मारकर खाने वाले' नेता का राजनीतिक सफर

Jitan Ram Manjhi Biography: बिहार की राजनीति में जाति हमेशा से सबसे बड़ा फैक्टर रही है। कौन किस जाति से है, किस समाज का कितना वोट बैंक है-ये बातें चुनावी रणनीति तय करती हैं। ऐसे में जब बात होती है पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की, तो उनका जीवन संघर्ष, उनकी जाति और उनका राजनीतिक सफर सब कुछ मिसाल बन जाता है।

वनइंडिया हिंदी की खास सीरीज "जाति की पाति" में आज बात बिहार के नेता जीतन राम मांझी की, जिसने नाले किनारे की झोपड़ी से निकलकर मुख्यमंत्री की कुर्सी और फिर केंद्रीय मंत्री तक का सफर तय किया। आइए जानें किस जाति से हैं जीतन राम मांझी, उनका पारिवारिक बैकग्राउंड क्या है और उनके राजनीतिक सफर के बारे में।

Jitan Ram Manjhi caste

कौन हैं जीतन राम मांझी, किस जाति से आते हैं? (Jitan Ram Manjhi caste)

जीतन राम मांझी महा दलित मुसहर समुदाय से हैं -बिहार की सबसे वंचित और पिछड़ी जातियों में से एक। यह वही समाज है, जो सदियों से खेतों में मजदूरी करता रहा है, और जिनके हिस्से में कभी अपनी जमीन नहीं आई।

गया जिले के महाकर गांव में एक गरीब परिवार में 6 अक्टूबर 1944 को जीतन राम मांझी का जन्म हुआ। उनके पिता रामजीत मांझी खेतिहर मजदूर थे और मां सुकरी देवी घर संभालती थीं। जीतन राम मांझी का जिस दिन जन्म हुआ, उस दिन जीतिया पर्व था, इसलिए उनका नाम "जीतन" रखा गया था।

मांझी के बयान कई बार सुर्खियों में रहे। उन्होंने एक बार कहा था कि "चूहे खाना बुरा नहीं, क्योंकि उसमें भी प्रोटीन होता है।" 2014 में जब मांझी सीएम थे, तब उन्होंने कहा, 'चूहा मारकर खाना खराब बात नहीं है। मैं भी चूहा खाता था। आज भी मिल जाए तो खाने से परहेज नहीं करूंगा।''

बिहार सरकार की 2022 की जातिगत जनगणना के अनुसार, मुसहर समुदाय की आबादी करीब 40 लाख (3%) है। इनमें से 90% लोगों के पास अपनी जमीन नहीं है। यही वो तबका है जिसे समाज ने लंबे वक्त तक हाशिए पर रखा, और वहीं से उठे जीतन राम मांझी ने मुख्यमंत्री बनकर इतिहास रच दिया।

Jitan Ram Manjhi caste

जीतन राम मांझी की शिक्षा: ऊंची जाति के गुरु की अनुमति से पढ़ाई

गरीबी और जातिगत भेदभाव के बावजूद मांझी ने पढ़ाई नहीं छोड़ी। गांव के एक उच्च जाति के शिक्षक ने अनुमति लेकर उन्हें पढ़ाया। सातवीं तक की शिक्षा गांव में हुई, फिर आगे की पढ़ाई उन्होंने मगध विश्वविद्यालय से की। ग्रेजुएशन के बाद मांझी ने गया टेलीफोन एक्सचेंज में नौकरी की। करीब 13 साल तक क्लर्क के तौर पर काम किया। लेकिन किस्मत ने उनके लिए कुछ और लिखा था।

जीतन राम मांझी का परिवार: सात बच्चों के पिता, बेटा भी राजनीति में

जीतन राम मांझी की पत्नी शांति देवी हैं। दोनों के दो बेटे और पांच बेटियां हैं। उनके बेटे संतोष सुमन मांझी फिलहाल एमएलसी हैं और पिता की पार्टी हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) के नेता हैं।

जीतन राम मांझी का राजनीतिक सफर (Jitan Ram Manjhi Political career)

राजनीति में एंट्री: 1980 से आज तक का सफर

  • जीतन राम मांझी का राजनीतिक करियर 1980 में शुरू हुआ, जब उन्होंने कांग्रेस पार्टी से टिकट पाकर गया जिले की फतेहपुर सीट से चुनाव जीता।
  • इसके बाद वे लगातार बिहार के कई मंत्रिमंडलों में मंत्री बने-चाहे सरकार चंद्रशेखर सिंह, बिंदेश्वरी दुबे, जगन्नाथ मिश्रा या लालू यादव की रही हो।
  • 1990 में हार के बाद मांझी ने कांग्रेस छोड़ दी और जनता दल में शामिल हो गए। जब 1996 में जनता दल टूटा और लालू यादव ने राजद (RJD) बनाई, तो मांझी उनके साथ हो लिए।
Jitan Ram Manjhi caste

राजद से जेडीयू तक, फिर खुद की पार्टी तक का सफर

  • 2005 में लालू यादव की सरकार गिरने के बाद मांझी ने जेडीयू (JDU) का दामन थामा। नीतीश कुमार ने उन्हें मंत्री बनाया, लेकिन बाद में एक फर्जी बीएड डिग्री घोटाले में नाम आने पर इस्तीफा देना पड़ा। हालांकि बाद में उन्हें क्लीन चिट मिल गई और वे फिर से मंत्री बने।
  • 2014 में जब नीतीश कुमार ने लोकसभा चुनाव में हार की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया, तो उन्होंने मांझी को मुख्यमंत्री बना दिया।
  • लेकिन जल्द ही दोनों के रिश्ते बिगड़ गए। 2015 में मांझी को पार्टी से निकाल दिया गया।

मुख्यमंत्री बनकर लिखी नई कहानी

  • 20 मई 2014 को जब जीतन राम मांझी बिहार के 23वें मुख्यमंत्री बने, तो यह सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि सामाजिक क्रांति की मिसाल थी। एक मुसहर परिवार का बेटा राज्य की सबसे बड़ी कुर्सी तक पहुंचा। हालांकि, उनका कार्यकाल सिर्फ 10 महीने चला।
  • नीतीश कुमार की वापसी के बाद मांझी को इस्तीफा देना पड़ा, लेकिन उन्होंने "डमी सीएम" कहे जाने के आरोपों को ठुकराते हुए कहा - "मैं रबर स्टांप नहीं हूं।"
Jitan Ram Manjhi caste

अपनी पार्टी बनाई, NDA के साथ जुड़े

  • मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद मांझी ने 2015 में अपनी पार्टी हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) बनाई और एनडीए (BJP गठबंधन) में शामिल हो गए।
  • 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने गया सीट से जीत हासिल की और मोदी सरकार में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग मंत्री (MSME Minister) बने।
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