ओडिशा रेल दुर्घटना: मरी मां को फिर से मृत बता सरकारी नौकरी लेना चाहता था शख्स, ऐसे खुल गई पोल
Coromandel Express Accident: बिहार की राजधानी पटना के रहने वाले 42 वर्षीय व्यक्ति संजय कुमार ने अपनी मां की मौत का झूठा दावा किया था। वह कोरोमंडल ट्रेन दुर्घटना के नाम पर फर्जीवाड़ा कर सरकारी नौकरी हासिल करना चाहता था।

ओडिशा में भीषण ट्रेन हादसे के बाद अब फर्जीवाड़ा का भी खेल शुरू हो गया। रेलवे द्वारा मुआवजे के ऐलान के बाद अब कोई जिंदा शख्स को मृत बता रहा है तो कोई कई साल पहले मरे रिश्तेदार के नाम पर सरकार से ठगी करना चाह रहा है। हालांकि, रेलवे अधिकारी भी काफी सतर्क हैं और ऐसा दावा करने वाले लोगों की पोल तुरंत खोल दे रहे हैं। अब ऐसा ही मामला बिहार से आया है। चलिए जानते हैं क्या है मामला?
2018 में मृत मां के नाम पर सरकारी नौकरी लेना चाहता था शख्स
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक रेलवे अधिकारियों ने बिहार के एक ऐसे शख्स की पोल खोल दी जो कि 2018 में दिवंगत हुई मां को फिर से मृत बताकर सरकारी नौकरी लेना चाहता था। शख्स का कहना था कि कोरोमंडल ट्रेन हादसे में उसकी मां की जान चली गई। उसे सरकारी नौकरी चाहिए और मुआवजा चाहिए। शख्स रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मिलने और अपने लिए नौकरी लेने के उद्देश्य से दिल्ली तक पहुंच गया। शख्स का नाम संजय कुमार बताया जा रहा है और वह खुद को पटना का रहने वाला बताया।
बार-बार बयान बदल रहा था
अधिकारियों ने बताया कि मां की मौत का झूठा दावा करने वाला शख्स , न केवल अपने दावे के साथ रेल मंत्री के आवास पर गया था, बल्कि दो अलग-अलग दिनों में रेल भवन भी गया था। जब आरोपी संजय कुमार रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के आवास पर पहुंचे, तो उन्हें मंत्री से मिलने के लिए रेल भवन जाने का निर्देश दिया गया। इसके बाद शख्स ने मंत्री के कार्यालय से संपर्क किया और दूसरा बयान देने लगा। फिर क्या था बयान बदलते ही अधिकारियों ने आरोपी को दबोच लिया।
अधिकारियों ने ऐसे खोली पोल
अधिकारियों ने कहा कि जब आरोपी ने कहा कि कोरोमंडल एक्सप्रेस हादसे में उसकी मां का निधन हो गया तो हमलोगों ने उससे पूछताछ की। उससे यात्रा का सबूत मांगा गया तो उसके पास सबूत के तौर पर कुछ नहीं थे। हमने टिकट का प्रूफ देने के लिए कहा तो वह भी नहीं दे सका। आरोपी शख्स संजय कुमार का कहना था कि उसने एक ट्रैवल एजेंट के माध्यम से टिकट बुक किया था लेकिन उसे उसका नाम याद नहीं है। वह यह भी साबित नहीं कर सका कि उसकी मां वेटिंग लिस्ट में थी।
तस्वीर के जरिए भी नहीं मिली उसकी मां की कोई जानकारी
अधिकारी ने कहा कि आरोपी ने एक काम सही किया कि उसने अपनी मां की तस्वीर मुहैया कराई थी। हमने उन सभी स्टेशनों पर उसकी मां को खोजना शुरू किया, जहां दुर्घटना से पहले ट्रेन रुकी थी। हमारा मकसद फेशियल रिकॉग्निशन तकनीक से उसका पता लगाना था। हालांकि, जब हम किसी भी स्टेशन पर उसका पता नहीं लगा सके, तो हमें और संदेह हुआ।
पूछताछ में फंसने के बाद आरोपी ने खुद खोली अपनी पोल
तब मामले को देख रहे एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि आरोपी संजय कुमार ने कबूल किया कि वह अपनी मां की मौत के बारे में झूठ बोल रहा था। उनकी मां की 2018 में मृत्यु हो गई थी, लेकिन बालासोर दुर्घटना के बाद जब रेल मंत्रालय ने यात्रियों के परिवार को अनुग्रह राशि देने की घोषणा की, तो कुमार ने मंत्री से संपर्क करने का फैसला किया और उन्हें मुआवजे के बजाय नौकरी देने के लिए कहा।
आरोपी ने लंबे समय से बेरोजगार होने का दावा किया
वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कुमार ने दावा किया है कि वह लंबे समय से बेरोजगार था और इसे लेकर उदास था। उन्होंने कहा कि हम यह समझने के लिए जांच कर रहे हैं कि क्या मंत्री के आवास और कार्यालय का ब्योरा हासिल करने का एकमात्र उद्देश्य रोजगार था।












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