Success Story of Farmer: धान के खेती से कैसे की लाखों की आमदनी, सफलता की कहानी किसान की जुबानी
Success Story Of Farmer: बिहार के किसान खेती में नया-नया प्रयोग कर लाखों रुपये का मुनाफ़ा कमा रहे है। आपको हम लोगों ने कई कामयाब किसानों की कहानी से रूबरू करवया। इसी कड़ी में आज हम आपको गया जिले के 50 वर्षीय किसान अनिल कुमार के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने किसानी में एक नया आयाम हासिल किया है।
कजरी गांव (कपसिया पंचायत, परैया प्रखंड) निवासी गिरजेश कुमार के पुत्र अनिल कुमार ने स्नातक (B.A) तक पढ़ाई की है। साल 2000 से 2019 तक उन्होंने एक दवा कम्पनी में बतौर मेडिक रिप्रेजेंटेटिव काम किया। कंपनी में जब तक वह रहे टॉप परफॉर्मर की लिस्ट में शामिल रहे। कंपनी की तरफ़ इंसेंटिव के तौर पर लगातार 6 साल विदेश यात्रा का लुत्फ उठाते रहे।

कम्पनी में काम करने के दौरान और उसके पहले भी अनिल ने खेती में दिलचस्पी बरक़रार रखी। कम्पनी में काम करने के दौरान ही दिल्ली लौटने के क्रम में हरियाणा के एक यात्री से ट्रेन में मुलाक़ात हुई और खेती पर चर्चा हुई। साल 2015 में उन्होनें अनिल को पुसा बासमती धान का बीज उपलब्ध कराया।
पुसा बासमति धान का बीज मिलने के बाद साल 2015 से ही अनिल ने धान का उत्पादन शुरू किया। तजुर्बा कम होने की वजह से साल 2015 में अच्छी कामयाबी नहीं मिली। बाली आने से पहले ही धान में झुलास रोग लग गया, जिस वजह से सिर्फ़ 19 क्वींटल प्रति एकड़ ही उत्पादन हो पाया। इससे काफी मायूसी हुई।
हरियाण के व्यापारी से बात हुई तो वह अनिल को धान की बिक्री के लिये हरियाणा लेकर गये। 12 क्विंटल सोमन का कीमत मिला। निराशा के साथ अनिल वापस आए, लेकिन इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। साल 2017 से 2020 तक R.W.D में ठेकेदारी कि लेकिन उसमें संतुष्टि नही मिली। लेकिन धान की खेती संतुष्ट रहे।
साल 2023 में खुद 40 एकड़ में और अन्य किसानों द्वारा लगभग 50 एकड़ के अलावा कोंच प्रखंड के विभिन्न गाँवों में लगभग 70 एकड़, टिकारी के विभिन्न गांवों में लगभग 80 एकड़, शेरघाटी में 20 एकड़ में खेती करवाया। इस धान में प्रति एकड़ लागत धान रोपनी से कटनी तक लगभग 12 हज़ार 900 प्रति एकड़ है।
किसानों से वापस धान खरीदने पर 84 हज़ार में मिल रहा है। इस तरह प्रति एकड़ 71 हज़ार 100 रुपये का मुनाफा हो रहा है। अनिल धान को पूर्ण रूप से हाथ और रीपर से काट भी रहे हैं। इसके साथ ही सरकार द्वारा पराली प्रबंधन में अप्रत्यक्ष रुप से मदद भी कर रहे हैं। अनिल आने वाले सालों में इस धान को 3 हज़ार एकड़ में लगवाने की कोशिश में हैं।
अनिल अपने इस कार्यक्रम से लगभग 50 लोगों को अपने साथ प्रत्यक्ष रुप से रोजगार देने की भी कोशिश करेंगे। धान की खेती सभी किसानों का आर्थिक रुप से जीवन स्तर में सुधार भी होने की उम्मीद है। अनिल ने कहा कि बाकी खेती में प्राकृतिक खेती का योगदान भी बहुत रहता है, लेकिन हम सभी किसानों को इमानदारी से मेहनत करने की जरुरत है, तब ही प्राकृति हमारा साथ देगी।












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