बिहारः बक्सर में गंगा किनारे मिली 10-12 लाशें, अंतिम संस्कार करने की जगह जल प्रवाह कर रहे हैं पीड़ित
बक्सर। एक तरफ जहां कोरोना संक्रमण में लोग अपनों को खोते जा रहे हैं। वहीं कुछ लोग ऐसे हालातों में भी अपना फायदा ढूंढ रहे हैं। यहां तक कि लोगों के अंतिम संस्कार में भी पीड़ितों को ठगा जा रहा है। पीड़ित परिवारों से मुक्तिधाम पर हर चीज के अधिक दाम वसूले जा रहे हैं। वहीं जो लोग इस खर्च का वहन नहीं कर पा रहे हैं वो सीधा गंगा जी में अपनों के शवों को प्रवाह कर दे रहे हैं। बता दें कि एक सप्ताह के अंदर बक्सर जिले के चौसा महादेवा घाट पर दर्जनों शवों का जल प्रवाह किया गया है। बीते रविवार को जल-प्रवाह हुए करीब 30 शव गंगा के किनारे आकर लग गए। इसके बाद प्रशासन को घटना की जानकारी मिली।

सभी शवों को गिद्ध और कुत्ते नोच-नोच कर खा रहे हैं, जिसके चलते वहां का नजारा बिल्कुल ही वीभत्स हो गया है। स्थानीय अधिकारियों की तरफ से भी इसके साफ करने को लेकर पहल नहीं की गई। वहीं जब आसपास के लोगों ने मीडिया को मामले की जानकारी दी। तब प्रशासन एक्शन मोड में नजर आया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले अंतिम संस्कार 5 से 6 हजार में हो जाता था। लेकिन अभी के वक्त में 14 से 15 हजार रुपये वसूले जा रहे हैं।
बता दें कि गंगा नदी के किनारे रह रहे कई लोग गंगा के पानी का अपने निजी कामों में इस्तेमाल करते हैं। वो भी अब गंगा किनारे का हालात देखकर डर गए हैं। निश्चित रूप से इस तरह के स्थिति सामने आने के बाद अब दूसरे तरह की महामारी जन्म लेगी। बता दें कि बक्सर में चरित्रवन मुक्तिधाम में दाह संस्कार के लिए कई जिलों से लोग आते हैं, लेकिन यहां अबतक विद्युत शवदाह गृह नहीं बन सका।
वहीं बक्सर के जिलाधिकारी अमन समीर ने कहा कि इस तरह की स्थिति की जानकारी मुझे भी मिली है, चौसा के अंचलाधिकारी को मौके पर भेजा गया है। वह साफ-सफाई के साथ-साथ आगे की कार्रवाई में लगे हुए हैं। वहीं बक्सर के एसडीओ केके उपाध्याय ने कहा कि यह पता लगाना एक जांच का विषय है कि क्या ये लाशें वाराणसी, इलाहाबाद या किसी अन्य जगह से आती हैं। हम यह सुनिश्चित करने के लिए घाट क्षेत्रों के पास अधिकारियों को सतर्क कर रहे हैं कि यह दोबारा न हो।












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