Bihar SIR: सुप्रीम कोर्ट का चुनाव आयोग को अल्टीमेटम, 65 लाख नाम वेबसाइट पर डालें, सुनवाई की 5 बड़ी बातें
Bihar SIR row Supreme Court hearing highlights: सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) यानी वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन मामले में बड़ा आदेश जारी किया है। अदालत ने चुनाव आयोग (ECI) को निर्देश दिया है कि वह 65 लाख मतदाताओं के नाम, जिन्हें ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटाया गया है, कारण सहित सार्वजनिक करे और यह सूची सर्चेबल फॉर्मेट में वेबसाइट पर डालें।
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच में इस मामले पर लगातार तीसरे दिन सुनवाई हुई। अदालत ने स्पष्ट किया कि जिन लोगों ने आवेदन फॉर्म जमा किया है, वे अभी मतदाता सूची में शामिल माने जाएंगे। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, "यह प्रक्रिया नागरिकों के मताधिकार से वंचित करने जैसे गंभीर परिणाम ला सकती है, इसलिए पारदर्शिता और निष्पक्षता बेहद जरूरी है।"

SC का निर्देश: बिहार SIR मामले में 65 लाख नाम ऑनलाइन पब्लिश करें
सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने सवाल किया, "जब नाम बोर्ड पर चिपकाए जा सकते हैं, तो वेबसाइट पर क्यों नहीं डाले जा सकते?"
इस पर ECI के वकील राकेश द्विवेदी ने गोपनीयता संबंधी एक पुराने फैसले का हवाला दिया, लेकिन जस्टिस कांत ने साफ कहा कि जानकारी को सर्च योग्य रूप में देना उचित है। उन्होंने यह भी बताया कि बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) के मोबाइल नंबर वेबसाइट पर डाले जाएंगे, जिसे उन्होंने अच्छा कदम माना।
वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने सुझाव दिया कि सूची मशीन-रीडेबल होनी चाहिए ताकि पहले जैसे घोटाले न हों। वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल एस ने कहा कि सूची का फॉर्मेट बदला गया है, जिस पर जस्टिस कांत ने दोहराया- "यह सर्चेबल होना चाहिए।"
Bihar SIR विवाद: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की 5 बड़ी बातें
🔹 1. सुप्रीम कोर्ट ने भारत के चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि वह बिहार की मसौदा मतदाता सूची से बाहर किए गए या हटाए गए लगभग 65 लाख लोगों की सूची, उनके हटाए जाने के कारण सहित, जिला निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करे।
🔹 2. सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया सूची जिला निर्वाचन अधिकारियों के नोटिस बोर्ड और पंचायत/ब्लॉक कार्यालयों में भी कारण सहित चिपकाई जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सभी पंचायत भवनों और प्रखंड विकास एवं पंचायत कार्यालयों में बूथवार 65 लाख लोगों की सूची भी प्रदर्शित की जाए ताकि लोगों की सूची तक मैन्युअल पहुंच हो। सुप्रीम कोर्ट ने कहा जिला स्तर पर सूची प्रकाशित करने की समयसीमा मंगलवार (19 अगस्त) शाम 5 बजे तय की गई है।
🔹 3. सूची तक EPIC नंबर के जरिए ऑनलाइन पहुंच होगी।
🔹 4. मृत, प्रवासी और डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम भी सार्वजनिक करने पर विचार।
🔹 5. सूची की व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए अखबार, टीवी, रेडियो और सोशल मीडिया का इस्तेमाल होगा। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को स्थानीय समाचार पत्रों, दूरदर्शन, रेडियो या किसी भी आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से इसका व्यापक प्रचार करने का भी निर्देश दिया है।
🔹 6. सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को सभी बूथ स्तर और जिला स्तर के अधिकारियों से अनुपालन रिपोर्ट प्राप्त करने और अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई 22 अगस्त के लिए स्थगित कर दी है।
मतदाताओं के लिए राहत, आधार कार्ड को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
जिनका नाम सूची से हटा दिया गया है, वे आधार कार्ड को पहचान और पते के सबूत के रूप में देकर ECI अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं। सार्वजनिक नोटिस में यह स्पष्ट रूप से लिखा जाएगा कि आपत्ति दर्ज कराने के लिए आधार की प्रति अनिवार्य है। अदालत ने यह भी कहा कि मामले की अगली सुनवाई में प्रगति रिपोर्ट पेश की जाएगी, ताकि पारदर्शिता पर नजर रखी जा सके।












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