Bihar Politics: लालू और नीतीश के बेहद करीबी रहे हैं प्रभुनाथ, जानिए कैसा रहा है सियासी इतिहास

Bihar Politics: राजेंद्र राय और दारोगा राय हत्याकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पटना उच्च न्यायालय के फैसले को पलटते हुए प्रभुनाथ सिंह को सज़ा सुनाया है। प्रभुनाथ के दोषी करार देने के बाद से ही प्रदेश का सियासी पारा चढ़ गया है। बिहार में प्रभुनाथ सिंह की पहचान एक बाहुबली नेता के तौर पर रही है।

प्रभुनाथ सिंह के सियासी सफ़र की बात की जाए तो वह राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और मुख्यमंत्री नीतीश कुमारे करीबी रह चुके हैं। साल 2010 से प्रभुनाथ लालू प्रसाद गुट में शामिल है, उन्होंने सबसे पहले चुनाव मशरक विधानसभा से लड़ा।

prabhunath political history

1980 में मशरख विधायक रहे रामदेव सिंह काका की हत्या हुई थी। इस हत्या में प्रभुनाथ सिंह का नाम आया था, जिसके बाद ही वह सुर्खियों में छा गए। इसके बाद साल 1985 में उन्होंने मशरख से बतौर निर्दलीय उम्मीदवार चुनावी बिगुल फूंका और जीत दर्ज की। जनता दल ने साल 1990 में उन्हें अपने टिकट पर चुनाव लड़ाया।

प्रभुनाथ ने दूसरी बार जनता दल की टिकट पर जीत का परचम लहाराया। इसके बाद उन्होंने लगातार चार बार (1998 से 2014) लोकसभा में महाराजगंज को रिप्रिजेंट किया। इस दौरान वह 3 बार नीतीश की पार्टी और 1 बार लालू की पार्टी से संसद पहुंचे।

आपको बता दें कि साल 1995 में मसरख के एक वोटिंग सेंटर के पास दारोगा राय और जितेंद्र राय की हत्या हुई थी। बताया जाता है कि हत्या इसलिए हुई थी कि दोनों ने प्रभुनाथ सिंह गुट के प्रत्याशी के ख़िलाफ़ वोट किया था, जिस वजह से उनकी हत्या हुई। इस आरोप प्रभुनाथ सिंह लगा था।

राष्ट्रीय जनता दल के पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह को साल 2008 में निचली अदालत सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था। वहीं साल 2012 में मामला पटना हाई कोर्ट पहुंचा, जहां उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के फ़ैसले को सही मानते हुए पूर्व सांसद को बरी कर दिया।

पटना हाई कोर्ट के इस फैसले के ख़िलाफ़ विरोध में राजेंद्र राय के भाई ने सुप्रीम कोर्ट में अर्ज़ी दाख़िल की। जहां प्रभुनाथ को दोषी करार दिया गया है। आपको बता दें कि फिलहाल एक मर्डर केस में प्रभुनाथ सिंह जेल में है। मशरख विधायक अशोक सिंह की साल 1995 में हत्या हुई थी। प्रभुनाथ सिंह को इन्होंने ही चुनावी मात दी थी। अशोक सिंह की दिनदिहाड़े हत्या मामले में ही प्रभुनाथ सिंह सज़ा काट रहे हैं।

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