Bihar News: राज्यकर्मियों का प्रमोशन के बाद भी हो सकता है डिमोशन, जानिए कहां फंस रहा पेंच?
Bihar News, State Employee Promotion Update: बिहार में आगामी चुनाव के मद्देनज़र सियासी पारा चढ़ा हुआ है। वहीं प्रदेश सरकार भी चुनावी सौगात देने से पीछे नहीं हट रही है। इसी क्रम में राज्यकर्मियों के प्रमोशन को लेकर चर्चा तेज़ हो चुकी है। करीब 7 साल से अधर में पड़े प्रमोशन पर सरकार मंथन कर रही है। राज्य सरकार के कर्मचारियों का प्रमोशन के साथ सैलरी भी बढ़ाई जाएगी।
बिहार सरकार राज्यकर्मियों को प्रमोशन मिलने की खुशी के साथ ही एक चिंता भी सता रही है कि अगर सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला ख़िलाफ़ में आया तो क्या होग। दरअसल 17 फीसदी पदों पर प्रमोशन होल्ड कर बाकी बचे पदों पर पदों पर प्रमोशन दिया जाएगा। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में पेंच फंसा हुआ है।

सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई पेंडिंग है, ऐसे में प्रमोशन मिलने के बाद अगर फ़ैसला ख़िलाफ़ में आता है तो क्या सरकार डिमोशन करेगी, प्रमोशन के बाद मिली सुविधा का क्या होगा? बढ़ी हुई सैलरी को वापस लिया जाएगा? तमाम तरह के सवाल ज़ेहन में उठ रहे हैं। प्रदेश सरकार ने इसको ध्यान में रखते हुए राज्यकर्मियों को प्रमोशन देने का फ़ैसला लिया है।
आपको बता दें कि बिहार सरकार के सभी विभागों में प्रमोशन नहीं होने की सबसे बड़ी वजह सुप्रमी कोर्ट में मामले की सुनवाई मुकम्मल नहीं होना है। कई सालों से चली आ रही सुनवाई 2024 में पूरी होने की उम्मीद है। वहीं प्रमोशन पर मंथन करते हुए प्रदेश सरकार ने फ़ैसला लिया है कि SC-ST समुदाय के 17 फीसद पदों पर प्रमोशन होल्ड रहेगा।
मान लीजिए 100 सीटों पर प्रमोशन होना है तो उसमें 17 सीटों पर होल्ड कर बाकि अन्य सीटों पर प्रमोशन दिया जाएगा। इन 17 सीटों में 16 सीटों पर अनुसूचित जाति और 1 सीट पर अनुसूचित जनजाती के लिए होल्ड कर रखा गया है। आपको बता दें कि 2016 में प्रदेश सरकार, SC-ST वर्ग के सरकारी कर्मियों के लिए प्रमोशन में आरक्षण देने संबंधित नियमावली लेकर आयी थी।
प्रमोशन में आरक्षण नियमावली के तहत SC-ST सुमदाय के सरकारी कर्मियों को प्रमोशन मिलना था। लेकिन मामला कोर्ट में चला गया। इसके बाद से ही प्रमोशन पर पेंच फंसा हुआ है। बिहार सरकार ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद उसके मुताबिक प्रमोशन किया जाएगा।
बिहार सरकार को इस मामले में पटना हाइकोर्ट से राहत नहीं मिली, जिसके बाद प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। सुप्रीम कोर्ट ने कुछ महीने पहले ही साफ कर दिया था कि इस मुद्दे पर तुरंत सुनवाई नहीं हो पाएगी। अगले साल (2024) में इस पर सुनवाई होगी।
आपको बता दें कि प्रमोशन नहीं होने की वजह से कई पोस्ट खाली पड़े हुए हैं। खाली पड़ पदों पर रिटायर्ड कर्मी या फिर कार्यकारी प्रभार के सहारे काम चलाया जा रहा है। 76525 पदों पर प्रमोशन पेंडिंग में है। प्रमोशन देने के बाद अगर फ़ैसला खिलाफ़ में आता तो, सुविधाओं और सैलरी इन सबको कैसे मैनेज करेगी सरकार।
सुप्रीम कोर्ट से मामले में प्रदेश सरकार के ख़िलाफ़ फ़ैसला आता है तो प्रमोशन मिले कर्मियों को वापस से अपने पिछले पद पर काम करना होगा। वहीं जो सैलरी में इज़ाफ़ा किया गया उसे घटा दिया जाएगा। इस दौरान प्रदेश सरकार ने जो बढाकर सैलरी दी थी वह वापस नहीं वसूले जाएंगे।












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