Bihar News: सरकारी शिक्षकों के लिए बड़ी खबर, बदल गई ट्रांसफर पॉलिसी
बिहार सरकार ने सोमवार को राज्य में सरकारी स्कूल के शिक्षकों की ट्रांसफर- पोस्टिंग के लिए नई नीति की घोषित की है। इसके तहत गंभीर बीमारियों से जूझ रहे और दिव्यांगता वाले टीचर्स को प्राथमिकता दी गई है। बिहार के शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने नीति की घोषित करते हुए कहा कि तबादले के लिए सभी आवेदन सिर्फ ऑनलाइन ही लिए जाएंगे।
मंत्री के मुताबिक, 'नई ट्रांसफर नीति राज्य के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की ट्रांसफर-पोस्टिंग में एकरूपता लाएगी। इससे न सिर्फ शिक्षकों को राहत मिलेगी, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता भी सुधरेगी।' मंत्री ने बताया, 'गंभीर रूप से बीमार, दिव्यांग, विधवा, तलाकशुदा, अकेले रहने वाले या पति-पत्नी की जोड़ी वाले शिक्षकों को ट्रांसफर के समय प्राथमिकता दी जाएगी।'

इसके साथ ही सरकार ने साफ किया है कि किसी भी स्कूल में महिला शिक्षकों की संख्या 70 से ज्यादा नहीं होगी। उन्होंने जानकारी दी की शिक्षकों को उनकी पोस्टिंग के हर पांच साल बाद उनका ट्रांसफर होना चाहिए। इसके साथ ही शिक्षा विभाग उन्हें पोस्टिंग वाले स्थानों को प्राथमिकता देने के लिए 10 विकल्प देगा, जिससे नजदीकी अनुमंडल या जिले में नियुक्ति सुनिश्चित की जाएगी।
नई नीति से राज्य भर में योग्यता परीक्षा पास करने वाले 1.80 लाख से ज्यादा शिक्षकों की ट्रांसफर और पोस्टिंग का रास्ता साफ कर दिया है। हालांकि, ये नीति स्थानीय नगर निकायों की ओर से नियुक्त उन शिक्षकों पर लागू नहीं होगी, जिन्होंने योग्यता परीक्षा पास नहीं की है।
मंत्री ने कहा, 'यह केवल बीपीएससी (बिहार लोक सेवा आयोग) के जरिए से चुने गए शिक्षकों, सरकारी शिक्षकों और अनिवार्य परीक्षा पास करने वालों पर ही लागू होगा।' उन्होंने बताया कि जिलास्तर पर ट्रांसफर को लेकर शिकायतों को दूर करने के लिए एक पैनल बनाया गया है।
बिहार में कुछ समय पहले राज्य सरकार के कुछ विवादास्पद फैसलों की वजह से सरकारी टीचरों में बहुत ज्यादा नाराजगी देखी जा रही थी। लेकिन, जिस तरह से अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले नीतीश सरकार ने नई ट्रांसफर नीति जारी करके शिक्षकों को राहत देने की कोशिश की है, उससे लगता है कि वह उनपर मरहम लगाने की कोशिशों में जुटी है।












Click it and Unblock the Notifications