Bihar election results 2025: 'खाते में 10 हजार इसलिए बिहार में 10वीं बार', क्या हैं नीतीश की सफलता के कारण?

Bihar election results 2025: बिहार विधानसभा चुनाव परिणाम भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व वाला एनडीए बिहार विधानसभा चुनावों में शानदार जीत की ओर अग्रसर है। अब तक के रुझानों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) 211 सीटों का आँकड़ा पार कर चुका है, जबकि महागठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ता दिख रहा है।

बिहार विधानभा चुनाव में राज्‍य के वोटरों ने दोनों चरणों में बंपर वोटिंग करके एक बार फिर बिहार की कमान नीतीश कुमार को सौंप दी है। नीतीश कुमार के प्रतिनिधित्‍व में एनडीए गठबंधन को मिली इस प्रचंड जीत में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना ने बड़ी भूमिका निभाई है।

Bihar election results 2025

गेम चेंजर साबित हुई ये योजना

यह योजना बिहार की चुनावी रणनीति में एक महत्वपूर्ण "गेम-चेंजर" साबित हुई। इस योजना ने एनडीए (जदयू + भाजपा) के लिए महिला मतदाताओं में उत्साह पैदा किया। ये कहना गलत नहीं होगा कि महिलाओं के खाते में 10 हजार रुपये के कारण बिहार में 10वीं बार नीतीश कुमार की सरकार बनने जा रही है।

एनडीए ने चुनाव से पहले बिहार में चला था ये ब्रह्मास्‍त

मध्‍यप्रदेश, महाराष्‍ट्र के बाद भाजपा के प्रतिनिधित्‍व वाले एनडीए गठबंधन ने बिहार की महिला वोटरों को साधने के लिए चुनाव से चंद महीने पहले दांव चला। महिलाओं की अर्थिक सहायता करने के लिए उनके लिए योजना शुरू की। जिसके तहत महिलाओं के खाते में 10 हजार रुपये ट्रांसफर किए। बिहार में इस योजना ने कमाल कर दिया और नीतीश कुमार के प्रतिनिधित्‍व वाली सरकार को जिता दिया।

महिलाओं ने की बंपर वोटिंग

महिलाओं के लिए चुनाव से पहले शुरू की गई योजना के कारण दोनों चरणों के मतदान में महिला वोटरों ने छप्‍पफाड़ कर वोटिंग की। दोनों चरणों में 68 प्रतिशत से अधिक वोटिंग हुई और पुरुपों के मुकाबले 9 फीसदी महिलाओं ने अधिक वोटिंग की।

10,000 रुपये की योजना ने लगभग 1.5 करोड़ महिलाओं को यह संदेश दिया कि सरकार उनकी आर्थिक स्थिति और स्वावलंबन को महत्व देती है, जिससे मतदान उत्साह और समर्थन दोनों में वृद्धि हुई। इस योजना से लाभान्वित महिलाएँ, जो कुल महिला मतदाताओं का लगभग 22% थीं।

"मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना" के तहत दिए 10 हजार रुपये

औपचारिक रूप से इस योजना को "मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना" नाम दिया गया है। इसकी पहली किस्त 26 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक वर्चुअल कार्यक्रम के माध्यम से जारी की थी। यह धनराशि महिलाओं को लौटानी नहीं होगी, क्योंकि यह कर्ज न होकर एक सीधी आर्थिक सहायता है।

1.5 करोड़ महिलाओं के बैंक खातों में 10-10 हजार रुपये

इस योजना के तह 1.5 करोड़ महिलाओं के बैंक खातों में 10-10 हजार रुपये सीधे हस्तांतरित किए गए। इस पहल को न केवल एक आर्थिक सहायता के रूप में देखा गया, बल्कि एक प्रभावी राजनीतिक रणनीति के तौर पर भी, जिसने नीतीश कुमार के दसवीं बार मुख्यमंत्री बनने की राह आसान की।

क्‍या है ये योजना?

योजना का उद्देश्य सिर्फ नकद राशि देना नहीं है, बल्कि महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करना भी है। यदि महिलाएं इस राशि का उपयोग कर अपना व्यवसाय स्थापित करती हैं, तो उन्हें आगे 2 लाख रुपये तक की अतिरिक्त सहायता देने का वादा भी किया गया है। यह राशि डीबीटी (प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण) के माध्यम से हर शुक्रवार लाभार्थियों के खातों में भेजी जा रही है।

नीतीश कुमार सरकार पर महिलाओं का क्‍यों बढ़ा ट्रस्‍ट

नीतीश कुमार का महिलाओं के प्रति राजनीतिक विश्वास बनाने का इतिहास लंबा रहा है, जिसमें पंचायतों में महिला आरक्षण और शराबबंदी जैसी पहल शामिल हैं। जिससे महिलाओं के साथ "ट्रस्ट" को मजबूत किया, जिससे महिला मतदाताओं में सरकार के प्रति विश्वास बढ़ा और उनकी सामाजिक-आर्थिक भूमिका में वृद्धि हुई।

नीतीश कुमार की जीत के अन्‍य कारण?

नीतीश कुमार की जीत में बहुत बड़ा योगदान बीते कुछ सालों में बिहार की सड़कों, स्‍कूलों समेत अन्‍य क्षेत्रों में किए गए विकास संबंधी काम है। नेशनल हाइवे से लेकर गांव तक की सड़कों का निर्माण हुआ और लोगों का राज्‍य में अवागमन आरामदायक हुआ। पहले जिस सफर में पूरा दिन यात्रियों को खपाना पड़ता था, वो सड़कें बनने के बाद चार से पांच घंटे में सफर पूरा हो रहा है। इसके अलावा छात्राओं की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए नीतीश सरकार ने अहम कदम उठाए। इसके अलावा नीतीश सरकार में माफिया जंगलराज पर भी काफी हद तक लगाम लगी।

विपक्ष ने उठाए थे ये सवाल

हालांकि विपक्षी दलों ने इस योजना पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया था कि यह मतदाताओं को खरीदने का चुनावी हथकंडा है। हालांकि, चुनाव आयोग ने जांच के बाद इसे एक नीतिगत निर्णय माना और आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन नहीं बताया। आयोग के अनुसार, यह कोई अचानक की गई चुनावी घोषणा नहीं थी।

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