वोट चोरी पर यात्रा निकाल राहुल-तेजस्वी बिहार में चुनाव जीत लेंगे? सर्वे के आंकड़े देख महागठबंधन पीट लेगा माथा

Bihar Election 2025 survey: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले इंडिया ब्लॉक यानी विपक्षी गठबंधन बिहार में 'वोटर अधिकार यात्रा' निकाल रहे हैं। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य है - 'वोट चोरी' और मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) प्रक्रिया के विरोध में जनता को जागरूक करना है। इस यात्रा की अगुवाई लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और बिहार में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव कर रहे हैं।

राहुल गांधी और विपक्ष के तमाम नेताओं का दावा है कि चुनाव आयोग भाजपा के इशारे पर काम कर रहा है। विपक्ष का ये भी आरोप है कि महाराष्ट्र में वोट चोरी कर NDA सत्ता में आई है और बिहार में भी वोट चोरी करके ही NDA चुनाव जीतने की कोशिश करेगी। ऐसे में सवाल ये उठता है कि राहुल गांधी और विपक्ष के इस 'वोट चोरी नैरेटिव' पर जनता कितना विश्वास करती है, क्या बिहार की जनता वोट चोरी के नाम पर महागठबंधन को वोट देगी, इन्ही सवालों को लेकर JVC का एक चुनावी सर्वे आया है, इसके परिणाम महागठबंधन के लिए चिंताजनक हो सकते हैं।

Bihar Election 2025 survey

क्या वोट चोरी का दावा सच है और जनता इसमें कितना विश्वास करती है?

JVC के चुनावी सर्वे में जब जनता से पूछा गया कि क्या वोट चोरी' का दावा सच है और वो उसमें कितना विश्वास करते हैं? तो सिर्फ 32 फीसदी जनता ने कहा कि हां वो वोट चोरी का दावा सच्चा है। वहीं 59 प्रतिशत जनता का कहना है कि वो वोट चोरी जैसे चीजों में विश्वास नहीं करते हैं। वहीं 9 फीसदी लोगों ने कहा है कि वो इस पर कोई कमेंट नहीं कर सकते हैं।

JVC के सर्वे में कुल 63,419 लोगों की राय शामिल की गई थी, जिनमें 34,560 पुरुष और 28,859 महिलाएं शामिल थीं। यह सर्वे 7 जुलाई से 18 अगस्त 2025 के बीच कराया गया था।

बिहार चुनाव 2025: क्या है इस बार चुनावी मुद्दा?

बिहार में सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा लोगों ने कानून-व्यवस्था को बताया है। 26.9% लोगों का मानना है कि लोग वोट देते वक्त कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखकर वोट देते हैं। वहीं 23.5% लोगों को मानना है कि जाति जनगणना भी बड़ा मुद्दा है। इसके बाद 21.2% लोगों ने बेरोजगारी, 14.4% लोगों ने ऑपरेशन सिंदूर और 14% लोगों ने वोट चोरी को चुनावी मुद्दा माना है।

बिहार में सबसे बड़े मुद्दे?

  • कानून-व्यवस्था: 26.9%
  • जाति जनगणना: 23.5%
  • बेरोज़गारी: 21.2%
  • ऑप सिंदूर: 14.4%
  • वोट चोरी: 14%

महागठबंधन के लिए संकेत

सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि महागठबंधन का वोट चोरी नैरेटिव बिहार की जनता के बीच व्यापक समर्थन नहीं पा रहा है। वोटरों का बड़ा हिस्सा इस दावे को नकारता है, जिसका मतलब है कि महागठबंधन को केवल वोट चोरी के मुद्दे पर चुनाव नहीं जीतना आसान होगा।

जनता के 9% अनिर्णीत मतदाता भी इस बार महागठबंधन के लिए निर्णायक नहीं बन सकते। विशेषज्ञों का कहना है कि महागठबंधन को वोटर जागरूकता यात्रा और नैरेटिव के अलावा अन्य विकास और स्थानीय मुद्दों पर ध्यान देना होगा, वरना केवल वोट चोरी की राजनीति से वे चुनाव में उतनी सफलता नहीं पा सकते।

जैसा कि JVC सर्वे दिखाता है, बिहार में वोट चोरी के मुद्दे पर महागठबंधन की साख मजबूत नहीं है। जनता का बड़ा हिस्सा इस दावे से सहमत नहीं है, इसलिए विपक्ष के लिए यह चुनौतीपूर्ण चुनाव साबित हो सकता है।

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