Bihar Election: कौन हैं बिहार के 2 दलित नेता शिवचंद्र राम, रेखा पासवान? तेजस्वी की कुर्सी पर बैठे और छा गए
Bihar Election 2025: बिहार की सियासत में इस वक्त तेजस्वी यादव की "बिहार अधिकार यात्रा" चर्चा में है। लेकिन इससे भी ज्यादा सुर्खियों में आ गई है उनकी बस की एक कुर्सी। दरअसल जिस सीट पर तेजस्वी यादव बैठते हैं, उसी पर हाल ही में दो दलित नेताओं को बैठाया गया। दिलचस्प बात यह है कि यह कदम उस वक्त सामने आया जब लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्या ने तेजस्वी के सलाहकार संजय यादव पर अप्रत्यक्ष निशाना साधा था।
रोहिणी ने सुबह फेसबुक पोस्ट शेयर कर सवाल उठाया कि तेजस्वी की सीट पर आखिर संजय यादव क्यों बैठे थे। इसी विवाद को ठंडा करने के लिए शाम तक तस्वीरें सामने आ गईं, जिनमें दो दलित नेता -शिवचंद्र राम और रेखा पासवान -तेजस्वी की सीट पर नजर आ रहे थे। रोहिणी ने इस पर खुशी जताते हुए कहा कि यही लालू यादव की सोच है कि वंचित तबके के लोग आगे आएं। ऐसे में आइए जानते हैं कौन हैं शिवचंद्र राम और रेखा पासवान?

🔵 कौन हैं शिवचंद्र राम? संगठन पर पकड़, मंत्री भी रह चुके (Who is Shiv Chandra Ram)
🔹 वैशाली जिले के राजापाकर से आने वाले शिवचंद्र राम का राजनीतिक सफर लंबा रहा है। 2015 में वह महागठबंधन सरकार में कला, संस्कृति और खेल मंत्री बने। युवा राजद के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। हालांकि 2020 का चुनाव वह नहीं लड़ पाए, क्योंकि उनकी सीट कांग्रेस के खाते में चली गई।
🔹 2024 के लोकसभा चुनाव में तेजस्वी यादव ने उन्हें हाजीपुर से मैदान में उतारा था, जहां उनकी सीधी टक्कर चिराग पासवान से हुई। नतीजा शिवचंद्र राम के खिलाफ गया, लेकिन दलित समाज में उनकी पकड़ बरकरार मानी जाती है।
🔹 सियासत में शिवचंद्र राम का संजय यादव से भी करीबी रिश्ता रहा है। उन्होंने इसी साल संजय यादव के जन्मदिन पर उनकी फोटो रखकर केक काटा था, जो उस वक्त चर्चा का विषय बना।
🔵 कौन हैं रेखा पासवान? संघर्ष से उठी, अब मजबूत महिला नेता (who is Rekha paswan)
🔹 दूसरी तस्वीर मसौढ़ी की विधायक रेखा पासवान की है। गरीब परिवार में जन्मीं रेखा पासवान ने आर्थिक तंगी के कारण सातवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी, लेकिन सियासत में उन्होंने अपनी अलग पहचान बना ली।
🔹 2015 में हम पार्टी से चुनाव लड़कर उन्होंने नूतन पासवान को शिकस्त दी। फिर 2020 में राजद के टिकट पर दोबारा जीत हासिल की और लगातार दूसरी बार विधायक बनीं। विधानसभा में वह विपक्ष की तेजतर्रार आवाज मानी जाती हैं।
🔹 नीतीश कुमार से उनका तीखा सामना भी हो चुका है। आरक्षण के मुद्दे पर जब सदन में बहस हो रही थी, तब सीएम नीतीश ने सीधे रेखा पासवान पर टिप्पणी कर दी थी। वहीं, 2024 लोकसभा चुनाव में मतदान के दिन वह भाजपा प्रत्याशी रामकृपाल यादव से भिड़ने के कारण सुर्खियों में रहीं।
🔵 रोहिणी आचार्या ने किया डैमेज कंट्रोल आसान
रोहिणी आचार्या की पोस्ट ने एक बार पार्टी में हलचल जरूर पैदा कर दी थी, लेकिन उसी सीट पर दलित नेताओं को बैठाकर तस्वीरें वायरल करना RJD का स्मार्ट मूव माना जा रहा है। रोहिणी ने भी इस पहल का स्वागत किया और कहा कि यही लालू यादव की असली सोच है- वंचित समाज को आगे लाना।
🔵 बिहार चुनाव से पहले बड़ा मैसेज
तेजस्वी यादव और राजद की इस कवायद को चुनावी रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। दलित समाज बिहार की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाता है। ऐसे में तेजस्वी की कुर्सी पर दलित नेताओं को बिठाना सिर्फ तस्वीर नहीं, बल्कि बड़ा मैसेज है- RJD वंचितों और दलितों के साथ खड़ा है।












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