NDA के 'जंगलराज' हमलों से निपटने के लिए महागठबंधन की रणनीति, मेनिफेस्टो में शिक्षा-रोजगार पर फोकस
Bihar Election 2025 (Opposition Manifesto): बिहार की राजनीति में "सुशासन" और "जंगलराज" दो ऐसे शब्द हैं जो चुनावी बहस के केंद्र में हमेशा रहते हैं। जहां नीतीश कुमार के समर्थक उनकी सरकार को सुशासन का प्रतीक बताते हैं, वहीं बीजेपी और एनडीए विपक्षी गठबंधन यानी महागठबंधन पर पुराने "जंगलराज" का ठप्पा लगाने से पीछे नहीं हटते। मगर इस बार महागठबंधन ने तय कर लिया है कि वह इस छवि को बदलकर दिखाएगा।
'जंगलराज' के नैरेटिव का तोड़ तैयार
राजद (RJD) और उसके सहयोगियों कांग्रेस, वामदलों और विकासशील इंसान पार्टी (VIP) ने इस चुनाव में 'जंगलराज' के आरोपों का जवाब देने के लिए एक ठोस प्लान बनाया है। सूत्रों के मुताबिक, इस बार गठबंधन अपने मेनिफेस्टो में "कानून व्यवस्था में सुधार", "पुलिस भर्ती में संतुलन" और "जनता की सुरक्षा" जैसे वादों पर जोर देगा।

यह साझा घोषणा पत्र छठ पूजा के बाद, 28 अक्टूबर को जारी किया जाएगा। वहीं भाकपा (माले) जैसे घटक दल अपने अलग मेनिफेस्टो भी जारी करेंगे ताकि वे अपने पारंपरिक वोट बैंक को संबोधित कर सकें।
मोदी और शाह के 'जंगलराज' वाले हमलों पर पलटवार
एनडीए की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह लगातार जंगलराज के मुद्दे को हवा दे रहे हैं। पीएम मोदी ने हाल ही में कहा था कि "बिहार की जनता अगले 100 साल तक जंगलराज की करतूतों को नहीं भूलेगी।" वहीं अमित शाह ने कहा कि नीतीश कुमार ने पिछले 20 वर्षों में बिहार को जंगलराज से आजाद कराया, जबकि 1990 से 2005 के बीच आरजेडी शासन ने राज्य को 50 साल पीछे धकेल दिया।
इन आरोपों पर तेजस्वी यादव ने पलटवार करते हुए कहा, "जब दिल्ली में रोड रेज की सबसे ज्यादा घटनाएं होती हैं तो क्या वहां भी 'जंगलराज' है? बिहार में अगर एक घटना हो जाए तो उसी को मुद्दा बना दिया जाता है।"
मेनिफेस्टो में क्या होगा खास
महागठबंधन के घोषणा पत्र में कानून व्यवस्था के साथ-साथ तीन बड़े मुद्दों शिक्षा, रोजगार और पलायन पर खास फोकस रहेगा। गठबंधन के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि पुलिस सुधार और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के अलावा, शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च बढ़ाने की योजना है।
भाकपा (माले) की ओर से 26 अक्टूबर को जारी होने वाले मेनिफेस्टो में "सार्वजनिक स्वास्थ्य पर अधिक निवेश, समान शिक्षा व्यवस्था, सुरक्षित रोजगार और जीवन स्तर सुधार" जैसी बातें शामिल होंगी।
कांग्रेस का अलग प्लान
कांग्रेस ने भी अपनी रणनीति तैयार की है। पार्टी 61 सीटों पर लड़ रही है और हर सीट के लिए 'मिनी मेनिफेस्टो' जारी करने की योजना बना रही है, जिसमें स्थानीय मुद्दों को प्राथमिकता दी जाएगी।
डेटा से भी टकराएगा विपक्ष
'जंगलराज' शब्द 1990 से 2005 के बीच की उस अवधि से जुड़ा है जब बिहार में अपराध दर सबसे अधिक थी। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक उस दौरान 18,000 से ज्यादा हत्याएं, 32,000 से अधिक अपहरण, और लगभग 60 जातिगत हिंसा के मामले दर्ज हुए थे। विपक्ष जानता है कि ये आंकड़े बीजेपी के लिए चुनावी हथियार हैं, इसलिए इस बार मेनिफेस्टो में पुलिस व्यवस्था में सुधार और अपराध पर सख्ती की बातें प्रमुखता से रखी जा रही हैं ताकि जनता को भरोसा दिलाया जा सके कि "पुराना बिहार" अब नहीं लौटेगा।
नया नैरेटिव, नई लड़ाई
महागठबंधन का उद्देश्य साफ है 'जंगलराज' की छवि से बाहर निकलकर बिहार को "रोजगार, शिक्षा और कानून व्यवस्था वाला नया राज्य" दिखाना। गठबंधन चाहता है कि जनता सिर्फ अतीत नहीं, बल्कि भविष्य के वादों पर वोट करे। अब देखना यह होगा कि 28 अक्टूबर को आने वाला यह घोषणा पत्र एनडीए के नैरेटिव को कितना चुनौती दे पाता है और क्या "सुशासन बनाम जंगलराज" की बहस में इस बार कोई नया मोड़ आता है या नहीं।












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