बिहार की राजनीति के 'चाणक्य' नीतीश कुमार, JDU को मजबूत कर हर बार रहे प्रमुख चेहरा
Nitish Kumar Profile: नीतीश कुमार को बिहार की राजनीति का 'चाणक्य' कहा जाता है। मौजूदा वक्त में नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में 8वीं बार पद संभाल रहे हैं। इसमें कोई शक नहीं है कि वो राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी हैं, क्योंकि कई बार गठबंधन तोड़कर नया गठबंधन करने वाले नीतीश हमेशा से बिहार का प्रमुख चेहरा रहे हैं।
बेहद साधारण परिवार से आने वाले नीतीश कुमार राजनीति में तेजी से एक पॉपुलर चेहरा बनकर उभरे थे। और अब उन्होंने लोकसभा चुनाव से पहले अपनी पार्टी जनता दल यूनाइटेड की एक बार फिर कमान संभाल ली है।

नौकरी में मन नहीं लगा तो राजनीति में लौटे
1 मार्च 1951 को बिहार के बख्तियारपुर में कुर्मी परिवार में जन्मे नीतीश के पिता कविराज राम लखन सिंह एक आयुर्वेदिक डॉक्टर होने के साथ-साथ एक स्वतंत्रता सेनानी भी थे। नीतीश कुमार की मां परमेश्वरी देवी गृहणी थीं।पटना इंजीनियरिंग कॉलेज से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की थी। फिर बिहार राज्य विद्युत बोर्ड में नौकरी की। हालांकि नौकरी में उनका मन नहीं लगा तो उन्होंने राजनीति को चुना।
छात्र राजनीति से सीएम तक
छात्र राजनीति के दौरान नीतीश कुमार जयप्रकाश नारायण, राम मनोहर लोहिया, कर्पूरी ठाकुर और जॉर्ज फर्नाडीज से काफी प्रभावित थे। 1974 में वो जेपी आंदोलन से जुड़े थे। अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत उन्होंने साल 1977 में की थी, उसी साल उन्होंने जनता पार्टी के टिकट पर पहला चुनाव भी लड़ा, हालांकि दो बार हार मुंह देखने के बाद साल 1985 में पहली बार हरनौत से विधायक बनकर विधानसभा पहुंचे।
पहले दिल्ली की राजनीति में सक्रिय
इसके बाद उनका राजनीतिक कद बढ़ता चला गया और उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। साल 1989 में नीतीश कुमार सांसद चुने गए, जिसके बाद 1990 में उन्हें केंद्रीय राज्य मंत्री बनाया गया। इसके बाद 1991 के लोकसभा चुनाव में भी उन्हें जीत मिली। उनके काम को देखते हुए उन्हें जनता दल का महासचिव बना दिया गया।
केंद्रीय मंत्री भी बने
लेकिन इनके राजनीतिक करियर में तब बड़ा उछाल मिला, जब 1998 का लोकसभा चुनाव जीतने के बाद उन्हें केंद्रीय रेल मंत्री बनाया गया। इसके बाद देश में फिर जल्दी ही लोकसभा चुनाव कराने की स्थितिबनी तो 1999 में 13वीं लोकसभा के लिए भी वे चुने गए। और अबकि बार उन्हें केंद्रीय कृषि मंत्री बनाया गया।
साल 2000 में आया नया मोड़
2000 में नीतीश कुमार के राजनीतिक करियर में एक बहुत बड़ा मोड़ साबित हुआ। ये वो साल था जब नीतिश कुमार पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने। लेकिन बतौर सीएम उनका कार्यकाल महज कुछ दिनों का ही रहा। जिसके बाद उन्हें फिर केंद्र की राजनीति में लौटना पड़ा और अबकि बार उन्हें रेलवे का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया। 2001 से लेकर 2004 कर देश के रेल मंत्री रहे।
जनता दल यूनाइटेड में बनाई जगह
इसी बीच नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड का गठन हुआ। 30 अक्टूबर, 2003 को समता पार्टी और लोक शक्ति जनता दल के विलय के साथ, जेडीयू अस्तित्व में आई। इस नए दल के शीर्ष पर जॉर्ज फर्नांडीस, शरद
यादव और नीतीश कुमार जैसी प्रमुख हस्तियां थीं। लेकिन इन तीनों ही नेताओं में आपसी मनमुटाव रहा, जिसके बाद जॉर्ज फर्नांडिस ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए, खुद को पार्टी से दूर कर लिया। जबकि शरद यादव जो पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष के तौर पर सक्रिय रहे, उनके साथ भी नीतीश के संबंधों में खटास आई थी। उनका अब निधन हो चुका है।
बिहार में पार्टी को मजबूत किया
JDU के अस्तित्व में आने के बाद नीतश कुमार ने बिहार में पार्टी को मजबूत करना शुरू किया, जिसका फल भी उन्हें मिला। बिहार की जनता बदलाव चाहती थी, और 2005 के चुनाव में उन्हें नीतीश में उम्मीदें दिखीं, JDU के पक्ष में बंपर वोट पड़े और पार्टी की जीत हुई। इस तरह से नीतीश कुमार दूसरी बार 24 नवंबर 2005 को मुख्यमंत्री पद पर आसीन हुए, और उनकी सरकार ने पांच साल का कार्यकाल पूरा किया। इसके बाद फिर चुनाव हुए तो वे 26 नवंबर 2010 को फिर मुख्यमंत्री बने। वर्तमान में नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री हैं।












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