Bihar Caste Census रिपोर्ट जारी होने के बाद गरमाई सियासत, जानिए किसने क्या कहा?
Bihar Caste Census के आंकड़े जारी होने के बाद प्रदेश में सियासत गरमा चुकी है। रिपोर्ट को लेकर सियासी बयानबाज़ी भी शुरू हो चुकी है। इसी क्रम में बिहार भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि बीजेपी जाति आधारित गणना कराने के पक्ष में शुरू से ही थी, गणना करानो लेकर भाजपा ने समर्थन भी दिया था।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने कहा कि विभिन्न समुदायों की गणना के साथ-साथ, कब किसका उत्थान हुआ और किसका नहीं हुआ यह भी सर्वेक्षण कराया जाना चाहिए था। प्रदेश सरकार के द्वारा जारी किए गए आंकड़े अधूरे हैं।

चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने भी जातीय गणना की रिपोर्ट के बाद सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि जातिगत जनगणना करवाने वाले लोगों का समाज की बेहतरी से कोई वास्ता नहीं है। जातिगत जनगणना की आड़ में अंतिम दांव खेला गया है।
समाज के लोगों को जातियों के नाम पर बांटकर चुनावी नैया पार लगाना चाहते हैं। 18 सालों से नीतीश कुमार सत्ता में हैं, जातिगत जनगणना आज क्यों करवा रहे हैं? इतने सालों से याद नहीं रहा, प्रदेश सरकार का विषय जातिगत जनगणना नहीं है, यह केंद्र सरकार का विषय है। नीतीश सरकार जातिगत गणना नहीं सर्वे करवा रही है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय लोक जनता दल (RLJD) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने भी जातीय गणना की रिपोर्ट जारी होने पर प्रदेश सरकार की मंशा को सवालों के घेरे में लिया है। उन्होंने जाति आधारित गणना रिपोर्ट के आंकड़े को फ़र्ज़ी बताते हुए कहा कि इसमे कई ख़ामियां हैं।
आंकड़ों से ऐसा लग रहा है, जैसे कि सरकार ने जल्दबाज़ी में रिपोर्ट जारी कर दिया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार को जाति गणना आर्थिक आंकड़ा भी पेश करना चाहिए था। सिर्फ जातीय आंकड़ा देना सियासी फायदा लेने की मंशा से किया गया है।
नीतीश सरकार की यह मंशा है कि किसी तरह इसका सियासी माइलेज मिल जाए। राजनीति फ़ायदे के लिए आंकड़े जारी किये गए है। यह भी संभावना है कि जल्दबाज़ी में रिपोर्ट तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि जिस तरह मतदाता सूची तैयार की जाती है, उसी प्रक्रिया को जातीय गणना में भी अपनाया जाना चाहिए।












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