बिहार में मां के दूध में यूरेनियम! 40 केस मिले, लेकिन वैज्ञानिक ने बताई सच्चाई — क्या बच्चे वाकई खतरे में हैं?
Bihar Breastmilk Uranium: बिहार से आई एक वैज्ञानिक रिपोर्ट ने पूरे देश को चौंका दिया है। रिसर्च में दावा किया गया कि राज्य के छह जिलों की स्तनपान कराने वाली 40 महिलाओं के ब्रेस्ट मिल्क के सैंपल में यूरेनियम मिला है। पहली नजर में यह जानकारी बेहद डराने वाली लगती है और स्वाभाविक है कि लोग नवजात शिशुओं की सेहत को लेकर चिंतित हो जाएं। लेकिन इसी बीच नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी यानी NDMA के शीर्ष वैज्ञानिक और न्यूक्लियर एक्सपर्ट डॉ. दिनेश के असवाल ने बड़ी राहत देने वाला बयान दिया है।
उन्होंने साफ कहा कि इस रिपोर्ट में पाया गया यूरेनियम का स्तर WHO की सीमा से कई गुना कम है और इससे घबराने की कोई जरूरत नहीं है। आखिर क्या है पूरा मामला, किस रिपोर्ट ने हड़कंप मचाया और NDMA वैज्ञानिक ने क्यों कहा कि "स्तनपान बिल्कुल सुरक्षित है"? आइए समझते हैं।

🟡 6 जिलों में ब्रेस्ट मिल्क में मिला यूरेनियम, 40 महिलाओं की जांच में चौंकाने वाले तथ्य
नेचर जर्नल में पब्लिश शोध में पटना के महावीर कैंसर संस्थान, AIIMS दिल्ली और अन्य संस्थानों के वैज्ञानिकों ने 2021 से 2024 के बीच बिहार के भोजपुर, समस्तीपुर, बेगूसराय, खगड़िया, कटिहार और नालंदा जिलों में 40 स्तनपान कराने वाली महिलाओं के ब्रेस्ट मिल्क के सैंपल लिए।
रिसर्च में पाया गया कि सभी महिलाओं के दूध में यूरेनियम-238 मौजूद था, जिसकी मात्रा 0 से 5.25 g/L के बीच थी। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई कि 70% नवजातों में "संभावित नॉन-कार्सिनोजेनिक रिस्क" दिखा, हालांकि यह खतरा "सैद्धांतिक" बताया गया।
🟡 वैज्ञानिकों की चेतावनी: ग्राउंडवॉटर में यूरेनियम बढ़ रहा है
स्टडी में कहा गया कि बिहार समेत देश के 18 राज्यों और 151 जिलों में भूजल में यूरेनियम की समस्या बढ़ रही है। शोधकर्ताओं ने यह भी कहा कि नवजात शिशु, मां की तुलना में अधिक संवेदनशील होते हैं क्योंकि उनके शरीर में रियल-टाइम यूरेनियम एलिमिनेशन की क्षमता कम है। रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया कि प्रभावित जिलों में व्यापक स्तर पर बायो-मॉनिटरिंग की जरूरत है।
🟡 NDMA वैज्ञानिक का बड़ा बयान: "यह खतरे वाली बात नहीं, घबराने की बिलकुल जरूरत नहीं"
जब यह रिपोर्ट सुर्खियों में आई तो लोगों में डर बढ़ गया। सोशल मीडिया पर कई दावा करने लगे कि बिहार में बच्चों पर कैंसर का खतरा मंडरा रहा है। इसी बीच न्यूक्लियर वैज्ञानिक और NDMA के सदस्य डॉ। दिनेश के। असवाल ने NDTV से बात करते हुए बड़े तथ्य सामने रखे।
उन्होंने कहा, "यह स्तर बिल्कुल सुरक्षित सीमा में है। WHO की परमिसिबल लिमिट पीने के पानी में 30 ppb है, जबकि बिहार के सैंपल में सिर्फ 5 ppb पाया गया। यह उससे छह गुना कम है।"
डॉ. असवाल ने साफ कहा कि यह किसी भी रूप में 'पब्लिक हेल्थ कंसर्न' का मामला नहीं है। उन्होंने आगे कहा, "घबराने की कोई जरूरत नहीं है। माताएं बिना किसी डर के बच्चों को स्तनपान कराएं।"
🟡 AIIMS दिल्ली के वैज्ञानिक का मत: "असर कम, स्तनपान जारी रखें"
अध्ययन के सह-लेखक डॉ. अशोक शर्मा (AIIMS दिल्ली) ने भी कहा, यूरेनियम की मात्रा परमिसिबल लिमिट के भीतर है। वास्तविक स्वास्थ्य प्रभाव "बहुत कम" है। माताएं स्तनपान बंद न करें। उन्होंने बताया कि हालांकि 70% बच्चों में संभावित रिस्क दिखा, लेकिन यह सिर्फ एक वैज्ञानिक आकलन है, न कि तुरंत खतरे का संकेत।
🟡 दुनिया भर में मिट्टी और पानी में मिलता है यूरेनियम
डॉ. असवाल ने बताया कि यूरेनियम प्राकृतिक रूप से मिट्टी और चट्टानों में मौजूद होता है। यह बहुत छोटी मात्रा में खाने, पानी और हवा के जरिए शरीर में पहुंचता है। लेकिन इसका ज्यादातर हिस्सा मूत्र के जरिए बाहर निकल जाता है और ब्रेस्ट मिल्क में बहुत कम आता है।
अध्ययन का उद्देश्य था, ब्रेस्ट मिल्क में यूरेनियम की मौजूदगी समझना, माताओं और शिशुओं में संभावित रिस्क की गणना, उन इलाकों की पहचान करना जहां भूजल में यूरेनियम ज्यादा है। यह रिसर्च आगे नीति निर्धारण और ग्राउंडवॉटर क्वालिटी सुधारने में मदद करेगी।
🟡 क्या नवजातों पर खतरा है? विशेषज्ञ क्या कहते हैं
सभी विशेषज्ञ एक बात पर एकमत हैं, नवजातों के लिए फिलहाल कोई वास्तविक खतरा नहीं है। स्तनपान रोकना सबसे बड़ी गलती होगी। उन्होंने कहा कि माताओं को घबराने नहीं है, जागरूक रहने की जरूरत है। WHO और UNICEF भी स्तनपान को "सर्वश्रेष्ठ पोषण" मानते हैं और उससे दूर रहने को शिशु स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक बताते हैं।












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