बिहार बोर्ड का कारनामा: पेपर दिया राजनीति शास्त्र का नंबर मिला समाजशास्त्र में

बिहार सरकार के लाख प्रयास और शिक्षा विभाग के द्वारा किए गए लाखों दावों के बाद भी बिहार बोर्ड के रिजल्ट में गड़बड़ी रुकने का नाम नहीं ले रहीं है।

पटना। बिहार सरकार के लाख प्रयास और शिक्षा विभाग के द्वारा किए गए लाखों दावों के बाद भी बिहार बोर्ड के रिजल्ट में गड़बड़ी रुकने का नाम नहीं ले रहीं है। एक हफ्ते पहले जब परिणाम आए तो पता चला कि किसी स्टूडेंट का रोल नंबर गलत है तो किसी का सब्जेक्ट। यहां तक की बिना परीक्षा दिए ही उस विषय के मार्कशीट अंकित कर दिए गए हैं तो कुछ छात्र को हर विषय में उपस्थित होने के बाद भी अनुपस्थित कर दिए गए हैं। यह नजारा तब देखने को मिला जब पिछले साल हुए चॉपर घोटाले के बाद सरकार ने इस बार कदाचारमुक्त परीक्षा का वादा भी किया गया था लेकिन परीक्षा के अजब-गजब परिणाम ने फिर शिक्षा विभाग पर कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिरकार ऐसे अजब-गजब शिकायत पर बोर्ड अब क्या करेगा और इसकी जानकारी देने के से बोर्ड क्यों परहेज कर रहा है?

आइए जानते हैं पीड़ित छात्रों की परेशानी

आइए जानते हैं पीड़ित छात्रों की परेशानी

सबसे पहले हम बात करेंगे बिहार के मोतिहारी जिले के रहने वाले प्रदुमन कुमार का जिन्होंने परीक्षा राजनीति शास्त्र का दिया था लेकिन रिजल्ट में समाजशास्त्र का नंबर दिया गया। वहीं राजनीति शास्त्र में अनुपस्थित कर रिजल्ट में फेल बता दिया गया। तो दूसरा छात्र मुजफ्फरपुर जिले के मयंक आनंद है जिनका आरोप है कि साइंस के तीनों विषयों में उन्हें बोर्ड के द्वारा फेल कर दिया गया जबकि परीक्षा के बाद आकलन के दौरान उन्हें 50% अंक मिलने चाहिए थे। वहीं वैशाली के रहने वाले मनीष कुमार का कहना है कि मेरा रोल नंबर एडमिट कार्ड और मार्कशीट पर अलग-अलग दे दिया गया। जहां एडमिट कार्ड पर 7040034 है तो मार्कशीट पर 17011 27 है। नालंदा जिले के रहने वाले आदित्य शेखर का कहना है कि मुझे फिजिक्स में 3 और केमिस्ट्री में 4 अंक मिले हैं। ऐसा संभव नहीं है क्योंकि हमने इंग्लिश मीडियम से पढ़ाई की थी और हमें कम से कम 60% अंक मिलने चाहिए थे। अब अगर बात करें बिहार बोर्ड की तो उनके अनुसार इस बार कोई गड़बड़ी नहीं हुई है।

जानिए क्या है बोर्ड के तर्क?

जानिए क्या है बोर्ड के तर्क?

सबसे पहले आपको बताते चलें कि बोर्ड का ऐसा मानना है कि इस बार बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड ने प्रशासन की मदद से इस कदर कदाचारमुक्त परीक्षा का आयोजन किया था जिससे परीक्षा में धांधली की कोई बात सामने नहीं आई थी। इसलिए ऐसा संभव है कि रिजल्ट पर इसका प्रभाव दिख रहा है। दूसरी तरफ बोर्ड का यह भी मानना है कि इस साल परीक्षा की प्रक्रिया में बदलाव भी किया गया था और पहली बार बबलिंग के द्वारा ओ एम आर सीट को भरना था इसमें परीक्षार्थियों ने संभवत गलती की होगी स्क्रूटनी के बाद रिजल्ट अच्छा भी होगा।

जारी है छात्रों का हंगामा

जारी है छात्रों का हंगामा

वहीं बोर्ड के द्वारा यह भी कहा जा रहा है कि इवैल्यूएशन में देरी के बावजूद इसे प्रक्रिया के तहत किया गया है इसमें योग्य शिक्षक ही शामिल हुए थे इसलिए वहां कोई त्रुटि की आशंका नहीं है। आंसर की में गलती की बात पर बोर्ड ने कहा कि उसे सुधार लिया गया है और उसको ध्यान में रखकर छात्रों को अतिरिक्त नंबर दिए गए है। लेकिन इस सबके बावजूद छात्रों का हंगामा कम होने का नाम नहीं ले रहा है। छात्र रोजाना बोर्ड की गलती लेकर उनके कार्यालय के सामने हंगामा करते हैं और बिहार बोर्ड अपनी गलती को छुपाने के लिए वह तरह-तरह का तर्क दे रहा है।

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