Bihar Assembly Election 2025: कन्हैया की 'पलायन रोको पदयात्रा' से RJD की दूरी, ये है असली वजह
Bihar Assembly Election 2025: बिहार में इस साल के अंत तक विधानसभा चुनाव होना प्रस्तावित है और इसे लेकर सभी पार्टियां मैदान पर हुंकार भर रही हैं। इस विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) को लेकर राज्य में कांग्रेस भी पूरी तरह से एक्टिव मोड में आ गई है।
हाल ही में कांग्रेस ने अखिलेश सिंह को प्रदेश अध्यक्ष से हटाते हुए राजेश कुमार को इसकी कमान दे दी है। वहीं विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस कन्हैया कुमार (Kanhaiya Kumar) पर भी दांव खेल रही है।

ऐसे में कन्हैया कुमार को लेकर सवाल ये है कि क्या कन्हैया कुमार कांग्रेस की डुबती नैया को किनारे लगा पाएंगे? दिल्ली, महाराष्ट्र और हरियाणा के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस (Congress) को करारी हार का सामना करना पड़ा था। अब बिहार विधानसभा चुनाव 2025 पार्टी के लिए काफी अहम है।
Bihar Assembly Election 2025: बिहार में कांग्रेस का 'कन्हैया' दांव
बिहार में कन्हैया कुमार की कितनी गहरी पैठ है इसे 2019 के लोकसभा चुनाव में सब ने देखा था। ऐसे में अगर फिर भी कांग्रेस कन्हैया पर भरोसा कर रही है तो जरुर इसके पीछे कोई बड़ी तैयारी होगी।
दरअसल, राज्य में कांग्रेस अब पुराने सिक्के को छोड़ कर नए चेहरे आजमा रही है जिसमें कन्हैया का नाम सबसे ऊपर है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस राज्य में खुल कर एक स्वतंत्र रुप से सक्रिय होना चाहती है और इसके लिए वो किसी फ्रेश और युवा चेहरे को भूनाना चाहती हैं। ऐसे में पार्टी के पास कन्हैया के अलावा फिलहाल और कोई दूसरा खिलाड़ी नहीं दिख रहा है।
इस समय कन्हैया कुमार बिहार में 'नौकरी दो पलायन रोको' पदयात्रा कर रहे हैं जो 24 दिनों तक चलने वाली है और इसमें राहुल गांधी के भा आने की खबर है। हालांकि, तेजस्वी यादव समेत राजद और महा गठबंधन के तमाम बड़े चेहरे इस पद यात्रा से दूरी बनाए हुए हैं। कन्हैया कुमार से बार-बार सवाल पूछे जाने के बाद भी वो इस पर चुप्पी साधे हुए हैं।
दरअसल बिहार में चुनाव के समय कन्हैया कुमार (Kanhaiya Kumar) की अतिरिक्त सक्रियता RJD के लिए हानिकारक साबित हो सकती है और ये तेजस्वी यादव के लिए भी एक असहज स्थिति है और ये साफ तौर पर देखा भी जा रहा है। हालांकि, अभी प्रत्यक्ष तौर पर किसी ने कुछ जाहिर नहीं किया है लेकिन पार्टी के अंदर ही अंदर इसके संकेत मिल रहे हैं।
Bihar Assembly Election 2025: कन्हैया की इस यात्रा से किसे फायदा किसे नुकसान?
बिहार में 'नौकरी और पलायन' एक गंभीर मुद्दा है और हर राजनीतिक पार्टी चुनाव के दौरान इसे खूब भुनाती है। 16 मार्च से प. चंपारण से कांग्रेस ने नौकरी दो पलायन रोको यात्रा शुरू की है जिसमें मुख्य चेहरा कन्हैया कुमार हैं। हालांकि, पार्टी ने आधिकारिक तौर पर इसकी घोषणा नहीं की है।
इसमें कोई दो राय नहीं है कि कन्हैया कुमार को केंद्र में रख कर कांग्रेस बिहार में अपनी खोई हुई पकड़ को वापस पाना चाहती है। हाल के दिनों में देखे तो बिहार कांग्रेस खेमे में प्रदेश अध्यक्ष से लेकर प्रदेश सचिव समेट कई बड़े परिवर्तन देखने को मिला है। जाहिर है कांग्रेस कन्हैया कुमार को फ्रंटफुट पर रख कर बिहार का गेम जीतने की कोशिश में लगी है।
बिहार में कन्हैया कुमार की ये सक्रियता आरजेडी के लिए और खास तौर पर तेजस्वी यादव के लिए बेहद नुकसानदायक है। RJD खेमें में कन्हैया को लेकर एक तरह से कॉनफ्लिक्ट की स्थिति है। भले ही तेजस्वी राज्य की राजनीति का प्रमुख चेहरा हैं लेकिन कन्हैया कुमार के प्रति उनकी असहजता को दिखती है। इस पदयात्रा के बाद कन्हैया की लोकप्रियता में और इजाफा होगा और वो एक मंझे नेता की तरह निखर कर सामने आएंगे।












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