Alinagar Election 2025: क्या जीत पाएंगी बिहार की युवा उम्मीदवार मैथिली ठाकुर, ‘बाहरी बनाम स्थानीय’ की चुनौती

Alinagar Assembly Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव में दरभंगा जिले की अलीनगर विधानसभा सीट इस बार चर्चा के केंद्र में है। वजह हैं-25 वर्षीय मैथिली ठाकुर, जो पहली बार बीजेपी के टिकट पर मैदान में हैं। अलीनगर में 6 नवंबर को वोटिंग है।

मधुर आवाज और सोशल मीडिया पर भारी फैन फॉलोइंग रखने वाली मैथिली अब सियासत के सुर में ताल मिलाने उतरी हैं। लेकिन उनके सामने मुकाबला आसान नहीं है। यह चुनाव अब सिर्फ बीजेपी बनाम आरजेडी नहीं, बल्कि 'स्थानीय बनाम बाहरी' की जंग में बदल गया है।

maithili thakur

बाहरी उम्मीदवार का टैग बना सिरदर्द

मैथिली ठाकुर के सामने सबसे बड़ा सवाल है-क्या अलीनगर उन्हें अपनाएगा? दरअसल, मैथिली का पैतृक घर मधुबनी जिले में है और वे दिल्ली में पली-बढ़ी हैं। अलीनगर में यह बात विपक्ष जोरशोर से उछाल रहा है। आरजेडी उम्मीदवार विनोद मिश्रा, जो पूरी तरह स्थानीय हैं, लगातार यह संदेश दे रहे हैं कि "अलीनगर को अपने लोगों की जरूरत है, बाहरी चेहरों की नहीं।" वहीं बीजेपी का कहना है कि मैथिली "नई सोच और नए बिहार की प्रतीक" हैं, और उनकी पहचान सीमाओं से परे है।

बीजेपी ने झोंकी पूरी ताकत, शाह से लेकर धर्मेंद्र प्रधान तक मैदान में

मैथिली ठाकुर के प्रचार के लिए बीजेपी ने बड़ा दांव खेला है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और कई बड़े नेता अब तक यहां रैलियां कर चुके हैं। खुद धर्मेंद्र प्रधान इस सीट की निगरानी कर रहे हैं। बीजेपी को उम्मीद है कि मैथिली की लोकप्रियता और युवा छवि अलीनगर के मतदाताओं को आकर्षित करेगी।

हालांकि विरोधी गुटों का कहना है कि मैथिली की "गायकी की प्रसिद्धि" और "राजनीतिक समझ" में अंतर है। उनके भाषणों से ज्यादा चर्चा उनकी गायकी की होती है-लोग उनकी रैलियों में सुनने तो आते हैं, लेकिन वोट क्या देंगे, यह बड़ा सवाल है।

आरजेडी ने विनोद मिश्रा को बनाया उम्मीदवार

आरजेडी ने इस बार विनोद मिश्रा को उम्मीदवार बनाया है। 2020 में वह वीआईपी पार्टी से लड़े थे और बीजेपी के मिश्री लाल यादव से मात्र 3,101 वोटों से हार गए थे। अब आरजेडी की टिकट पर वे फिर मैदान में हैं और यादव-मुस्लिम-ब्राह्मण वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि दोनों ही उम्मीदवार ब्राह्मण हैं, लेकिन विनोद मिश्रा उम्र और स्थानीय जुड़ाव दोनों में मैथिली पर भारी पड़ते दिख रहे हैं।

2008 के बाद बनी अलीनगर सीट, तीन चुनावों का दिलचस्प इतिहास (Alinagar Vidhan Sabha Chunav 2025)

  • अलीनगर विधानसभा क्षेत्र 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आया।
  • 2010 और 2015 में आरजेडी के अब्दुल बारी सिद्दीकी ने जीत दर्ज की।
  • 2020 में वीआईपी पार्टी के मिश्री लाल यादव ने राजद उम्मीदवार को मामूली अंतर से हराया।

इस बार फिर वही मिश्रा मैदान में हैं, लेकिन परिदृश्य बदल गया है-अब वीआईपी का असर घट चुका है और बीजेपी ने मैथिली को फ्रेश चेहरा बनाकर उतारा है। अलीनगर विधानसभा क्षेत्र में अलीनगर, ताड़डीह और घनश्यामपुर प्रखंड शामिल हैं, और यह दरभंगा लोकसभा सीट के तहत आता है। कोसी और कमला नदियों के बीच बसे इस इलाके में हर साल बाढ़ एक बड़ा मुद्दा होता है, जिसे इस बार दोनों दलों ने अपने-अपने तरीके से उठाया है।

नतीजा जो भी हो, अलीनगर का यह चुनाव रहेगा यादगार

भले ही मैथिली ठाकुर राजनीति की नई खिलाड़ी हैं, लेकिन उनकी एंट्री ने अलीनगर के सियासी मैदान को सबसे हॉट बना दिया है। युवा बनाम अनुभवी, बाहरी बनाम स्थानीय, और ब्राह्मण बनाम सामाजिक समीकरण-इस सीट पर हर फैक्टर अपनी भूमिका निभा रहा है। अब देखना यह होगा कि क्या मैथिली ठाकुर अपनी गायकी के जादू से सियासत में भी सुर लगा पाएंगी, या फिर अलीनगर एक बार फिर परंपरा का साथ देगा।

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