Bihar Politics: CM नीतीश से हाथ मिलाने के बाद भी बिहार में NDA की राह नहीं आसान, समझिए कैसे?

Bihar Political News: बिहार में सीएम नीतीश कुमार और एनडीए ने हाथ मिला कर सरकार तो बना ली है। लेकिन बिहार में एनडीए की राह आसान नज़र नहीं आ रही है। सीएम नीतीश कुमार के साथ हाथ मिलाने से बिहार में भाजपा मज़बूत ज़रूर हुई, लेकिन एनडीए की मुश्किलें बढ़ सकती है।

बिहार में 2019 जैसे एनडीए के हालात नहीं है, मौजूदा समीकरण में भारतीय जनता पार्टी ने चिराग पासवान, पशुपति पारस, उपेंद्र कुशवाहा और जीतन राम मांझी को बैलेंस नहीं कर पाई तो नीतीश कुमार के साथ हाथ मिलाने का दांव घातक साबित हो सकता है।

after joining hands with CM Nitish kumar, political path of NDA is not easy in Bihar, understand how?

2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 17 सीटों पर चुनाव लड़ा था। वहीं नीतीश कुमार की पार्टी जदयू ने भी एनडीए गठबंधन के तहत 17 सीटों पर उम्मीदवार उतारा था। लोजपा के खाते में 6 सीटें गईं थीं। मौजूदा समय में एनडीए के सहयोगी दलों की तादाद बढ़ चुकी है।

नए समीकरण में पूर्व सीएम जीतन राम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा, उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक जनता दल, इसके साथ लोकतांत्रिक जनशक्ति पार्टी (चिराग और पारस) की दावेदारी। सभी सहयोगी दलों को लोकसभा चुनाव में एनडीए के खाते से सीट चाहिए।

भारतीय जनता पार्टी इस कोशिश में है कि पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार ज्यादा सीटों पर चुनावी दांव खेलें। अब या तो भाजपा ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ेगी या फिर सहयोगी दलों के साथ सीटों पर समझौता करेगी। सभी को सम्मानजनक सीटें नहीं मिली तो एनडीए में फूट पड़ सकती है।

बिहार के बदले समीकरण के बाद एनडीए के लिए यह मुमकिन नहीं है कि बिना गठबंधन साथियों के लिए पिछली बार की तरह प्रदर्शन कर पाए। सीएम नीतीश कुमार की पार्टी किसी भी हाल में अपनी सीटिंग सीटों से समझौता नहीं करेगी। अब इस स्थिति में भाजपा को जदयू को छोड़कर अपनी सीटों में से सहयोगी दलों को सीटें देनी होंगी।

चिराग पासवान और पशुपति कुमार पारस भी अपने-अपने मुताबिक सीटों पर दावेदारी कर रहे हैं। वहीं जीतन मांझी औऱ उपेंद्र कुशवाहा भी टिकट की रेस में हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में एनडीए गठबंधन में सीएम नीतीश की पार्टी को साथ लाने के लिए भाजपा पांच सीटों से सांसदों का टिकट काट दिया था।

भाजपा इस बार कोशिश करेगी कि पिछली बार के मुकाबले इस बार 16 सीटों पर जदयू को मना लिया जाए। वहीं उपेंद्र कुशवाहा 2 सीटें देने की कोशिश होगी। जीतन मांझी के लिए भी भाजपा को दो सिटिंग सीटों की कुर्बानी देनी होगी। समीकरण को देखते हुए बिहार में एनडीए की राह आसान नहीं लग रही है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+