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भोपाल में मस्जिदों पर कार्रवाई का सवाल, विश्वास सारंग के बयान मचा सियासी तूफान, क्या हैं दिलकश मस्जिद का विवाद

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल, जो अपनी खूबसूरत झीलों और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए जानी जाती है, एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। इस बार मामला बड़ा तालाब के किनारे बने दो मस्जिदों-दिलकश मस्जिद और मोहम्मदी (भदभदा) मस्जिद-को लेकर है। जिला प्रशासन ने इन मस्जिदों को अवैध अतिक्रमण करार देते हुए हटाने का नोटिस जारी किया है, जिसके बाद सियासी और सामाजिक तनाव चरम पर पहुँच गया है।

मध्य प्रदेश सरकार के सहकारिता, खेल और युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए इसे 'लैंड जिहाद' करार दिया और कहा कि किसी भी कीमत पर तालाबों को नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। उनके इस बयान ने न केवल धार्मिक संगठनों को भड़का दिया है, बल्कि विपक्षी दलों ने भी इसे सियासी रंग देने की कोशिश शुरू कर दी है। आइए, इस रोमांचक और विवादास्पद कहानी को विस्तार से जानते हैं।

Vishwas Sarang statement Bhopal Dilkash and Mohammadi Mosque controversy in mp

बड़ा तालाब: भोपाल की शान, विवाद का केंद्र

भोपाल की पहचान उसका बड़ा तालाब है, जिसे शहर की लाइफलाइन माना जाता है। यह तालाब न केवल पर्यावरणीय संतुलन के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि शहर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर का भी हिस्सा है। हालाँकि, हाल के वर्षों में तालाब के आसपास अवैध निर्माण और अतिक्रमण ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और पर्यावरण मंत्रालय की अधिसूचना के तहत, तालाब के फुल टैंक लेवल (FTL) क्षेत्र में कोई भी निर्माण अवैध माना जाता है। शहरी क्षेत्र में तालाब के किनारे 50 मीटर और ग्रामीण क्षेत्र में 250 मीटर के दायरे में आने वाले सभी निर्माणों को हटाने का आदेश है।

इसी आदेश के तहत, भोपाल जिला प्रशासन ने 4 जुलाई 2025 को दिलकश मस्जिद (शाहजहांनी पार्क के पास) और मोहम्मदी मस्जिद (भदभदा क्षेत्र) को नोटिस जारी किया। प्रशासन का दावा है कि ये दोनों मस्जिदें तालाब के FTL क्षेत्र में आती हैं और अवैध रूप से निर्मित हैं। टीटी नगर की एसडीएम अर्चना शर्मा ने बताया, "NGT के निर्देशों के अनुसार, हमने सर्वेक्षण किया और पाया कि इन मस्जिदों के अलावा मंदिर, समाधि, और 35 अन्य निर्माण भी FTL क्षेत्र में हैं। सभी को हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।"

विश्वास सारंग का बयान: 'लैंड जिहाद' का आरोप

मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए कहा, "भोपाल की खूबसूरती इसके तालाबों में है। हम किसी भी कीमत पर इन तालाबों को अतिक्रमण से नुकसान नहीं होने देंगे। सरकारी जमीन पर मस्जिदों का निर्माण और विस्तार 'लैंड जिहाद' के लिए किया जा रहा है। यह बर्दाश्त नहीं होगा।" उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कोई हठधर्मिता दिखाई गई, तो प्रशासन सख्त कार्रवाई करेगा। सारंग ने यह भी कहा कि NGT के निर्णय का पालन अनिवार्य है और जांच के बाद उचित कदम उठाए जाएँगे।

वक्फ बोर्ड का पलटवार: हाईकोर्ट में याचिका

मस्जिदों को हटाने के नोटिस के खिलाफ मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड ने तुरंत मोर्चा खोल दिया। बोर्ड ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की, जिसमें दावा किया गया कि दोनों मस्जिदें वक्फ की संपत्ति हैं और उनके पास वर्षों पुराने कानूनी दस्तावेज हैं। वक्फ बोर्ड के वकील रफी जुबेरी ने कहा, "दिलकश मस्जिद और मोहम्मदी मस्जिद 1937 से वक्फ की संपत्ति में दर्ज हैं। यह कोई नया निर्माण नहीं है। प्रशासन का नोटिस गैरकानूनी है।"

ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी के संयोजक शमशुल हसन ने NGT की कार्रवाई को 'अनुचित' करार देते हुए चेतावनी दी, "अगर इन मस्जिदों को तोड़ा गया, तो आर-पार की लड़ाई होगी।" इस बयान ने माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया।

हिंदू संगठनों का उग्र रुख

दूसरी ओर, हिंदू संगठनों ने भी इस मामले में आक्रामक रुख अपनाया है। संस्कृति बचाओ मंच के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने कहा, "वक्फ बोर्ड अब बड़ा तालाब को भी अपनी संपत्ति बताएगा। यह मस्जिदें अवैध हैं और इन्हें तुरंत हटाया जाना चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो हम उग्र आंदोलन करेंगे।" हिंदू संगठनों ने प्रशासन को अल्टीमेटम दिया है कि अगर मस्जिदों को बचाने की कोशिश की गई, तो वे सड़कों पर उतरेंगे।

प्रशासन का रुख: कार्रवाई या संतुलन?

भोपाल जिला प्रशासन ने इस मामले में सावधानी बरतने का दावा किया है। टीटी नगर की एसडीएम अर्चना शर्मा ने कहा, "हम वक्फ बोर्ड और मस्जिद कमेटी का पक्ष सुनने के बाद ही कोई फैसला लेंगे। फिलहाल मामला हाईकोर्ट में है, और हम कोर्ट के निर्देशों का पालन करेंगे।" प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर स्वेच्छा से अतिक्रमण नहीं हटाए गए, तो बलपूर्वक कार्रवाई की जाएगी।

हालाँकि, प्रशासन की इस टालमटोल नीति पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय निवासी राकेश वर्मा ने कहा, "अगर NGT का आदेश स्पष्ट है, तो कार्रवाई में देरी क्यों? यह मामला धार्मिक रंग ले रहा है, जो भोपाल के माहौल को खराब कर सकता है।"

सियासी घमासान: विपक्ष ने साधा निशाना

कांग्रेस ने इस मामले को सरकार की विफलता से जोड़ा है। मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता मुकेश नायक ने कहा, "BJP सरकार हर मामले को धार्मिक रंग देकर सियासत कर रही है। अगर अतिक्रमण हटाना है, तो सभी अवैध निर्माणों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? सिर्फ मस्जिदों को निशाना बनाना सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिश है।"

सामाजिक तनाव और सोशल मीडिया की हलचल

इस विवाद ने भोपाल में सामाजिक तनाव को बढ़ा दिया है। सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों के समर्थक अपनी-अपनी बात रख रहे हैं। "बड़ा तालाब भोपाल की शान है। कोई भी अतिक्रमण-चाहे मस्जिद हो, मंदिर हो, या कोई और निर्माण-हटना चाहिए। लेकिन BJP का 'लैंड जिहाद' वाला बयान सियासत को गंदा कर रहा है।

क्या है 'लैंड जिहाद' का विवाद?

'लैंड जिहाद' शब्द हाल के वर्षों में मध्य प्रदेश में कई बार चर्चा में रहा है। हिंदू संगठन और BJP नेता इस शब्द का इस्तेमाल तब करते हैं, जब सरकारी या विवादित जमीन पर धार्मिक स्थलों का निर्माण होता है। इस मामले में भी, विश्वास सारंग ने मस्जिदों के निर्माण को 'लैंड जिहाद' से जोड़ा, जिसने मुस्लिम समुदाय और विपक्षी दलों को भड़का दिया।

पिछले कुछ महीनों में, भोपाल में कई अन्य मामलों में भी 'लैंड जिहाद' का आरोप लग चुका है। अप्रैल 2025 में, 1250 क्वार्टर इलाके में सरकारी मकानों में मजारों के निर्माण को लेकर हिंदू संगठनों ने हंगामा किया था। तब भी विश्वास सारंग ने सख्त कार्रवाई की बात कही थी।

आगे की राह: कोर्ट का फैसला या सड़क पर टकराव?

फिलहाल, यह मामला हाईकोर्ट में लंबित है। वक्फ बोर्ड का दावा है कि उनके पास मस्जिदों की वैधता के दस्तावेज हैं, जबकि प्रशासन और हिंदू संगठन इन्हें अवैध मान रहे हैं। कोर्ट के फैसले से पहले ही दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। प्रशासन के सामने चुनौती है कि वह इस संवेदनशील मामले में संतुलन बनाए और भोपाल की शांति को कायम रखे।

स्थानीय निवासी शबाना खान ने कहा, "बड़ा तालाब हमारी धरोहर है, लेकिन इसे बचाने के लिए धार्मिक विवाद पैदा करना ठीक नहीं। सभी अतिक्रमण हटाए जाएँ, चाहे वे किसी भी धर्म के हों।"

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