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MP News: Bhopal के सरकारी स्कूल में टीचर का पैर दबवाने का वीडियो वायरल, शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

Bhopal Viral Video News: मध्य प्रदेश की राजधानी, में एक सरकारी स्कूल से सामने आई शर्मनाक घटना ने शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गांधी नगर स्थित शासकीय महात्मा गांधी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में एक महिला टीचर का कक्षा 4 के एक छात्र से पैर दबवाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।

यह घटना गुरुवार, 7 अगस्त 2025 को हुई, जिसका वीडियो शनिवार शाम को सामने आया। इस वाकये ने न केवल स्कूल प्रशासन, बल्कि पूरे शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

Video of teacher getting his feet massaged in Gandhinagar government school goes viral MP education

माता-पिता अपने बच्चों को स्कूल इसलिए भेजते हैं ताकि उनका सभ्य व्यक्तित्व बने और पढ़ाई-लिखाई से उनका भविष्य संवरे। लेकिन भोपाल के इस सरकारी स्कूल की घटना ने इस भरोसे को ठेस पहुंचाई है। वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि कक्षा 4 की एक महिला टीचर कुर्सी पर बैठी हैं, उनका एक पैर दूसरी कुर्सी पर रखा है, और उसी कक्षा का एक छात्र उनका पैर दबा रहा है। यह दृश्य उस समय कैद हुआ जब लंच के बाद स्कूल की अन्य कक्षाओं में बच्चे शांतिपूर्वक पढ़ाई कर रहे थे, लेकिन कक्षा 4 में शोरगुल के बीच यह घटना सामने आई।

स्कूल की बदहाल स्थिति

गांधी नगर का शासकीय महात्मा गांधी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय उन स्कूलों में से एक है, जहां बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। वीडियो में दिख रही कक्षा 4 ऐसी एकमात्र कक्षा है, जहां बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ाई करते हैं, क्योंकि वहां बेंच-डेस्क की व्यवस्था नहीं है। स्कूल में बाथरूम जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। इसके अलावा, भोपाल में आधा दर्जन से अधिक सरकारी स्कूल जर्जर हालत में होने के कारण बंद पड़े हैं। दूसरी ओर, टीटी नगर में सांदीपनी स्कूल जैसे संस्थान बच्चों को स्मार्ट क्लासेस के जरिए अंग्रेजी, गणित और अन्य विषय रोचक तरीके से पढ़ा रहे हैं। यह अंतर शहर की शिक्षा व्यवस्था में असमानता को उजागर करता है।

टीचर की सफाई: पैर मुड़ने से थी तकलीफ

वीडियो वायरल होने के बाद महिला टीचर ने अपनी सफाई में कहा कि स्कूल के गेट पर टूटी टाइल्स से बने गड्ढे में उनका पैर मुड़ गया था, जिसके कारण उन्हें दर्द हो रहा था। उन्होंने दावा किया कि बच्चे उन्हें सहारा देकर कुर्सी तक ले गए, और एक छात्र ने प्रेमभाव से उनका पैर दबाकर दर्द कम करने की कोशिश की। हालांकि, उनकी यह सफाई सोशल मीडिया पर चल रही आलोचनाओं को शांत करने में नाकाम रही। अन्य शिक्षकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस तरह की घटनाएं स्कूल में असामान्य नहीं हैं।

सोशल मीडिया पर भारी आक्रोश

वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जनता में आक्रोश फैल गया है। लोग इस घटना को शिक्षक-छात्र संबंध की गरिमा पर धब्बा मान रहे हैं। कई यूजर्स ने टिप्पणी की कि एक शिक्षक का इस तरह का व्यवहार बच्चों के मन पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। सोशल मीडिया पर लोग शिक्षा विभाग से इस मामले की जांच और दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। कुछ लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि जब स्कूल में बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं, तो शिक्षकों से बच्चों के प्रति संवेदनशील व्यवहार की अपेक्षा कैसे की जा सकती है?

शिक्षा विभाग की चुप्पी

इस घटना के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषी शिक्षक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही, स्कूल में बुनियादी सुविधाओं जैसे बेंच-डेस्क, बाथरूम, और सुरक्षित परिसर की व्यवस्था करने की मांग भी जोर पकड़ रही है।

स्कूल की स्थिति पर सवाल

यह घटना भोपाल के सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति को भी उजागर करती है। गांधी नगर का यह स्कूल उन कई स्कूलों में से एक है, जहां बच्चों को जमीन पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है। टूटी टाइल्स और गड्ढों से भरे स्कूल परिसर की स्थिति शिक्षकों और बच्चों दोनों के लिए जोखिम भरी है। इस घटना ने शिक्षा विभाग के सामने यह सवाल खड़ा किया है कि आखिर सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए कब ठोस कदम उठाए जाएंगे।

बच्चों के भविष्य पर असर

शिक्षक बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण और उनके भविष्य को संवारने में अहम भूमिका निभाते हैं। लेकिन इस तरह की घटनाएं बच्चों के मन में शिक्षकों और स्कूल के प्रति अविश्वास पैदा कर सकती हैं। अभिभावकों का कहना है कि ऐसी घटनाएं न केवल बच्चों के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाती हैं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाती हैं।

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