उज्जैन सिंहस्थ लैंड पूलिंग विवाद: सरकार के नए आदेश से फिर भड़का किसानों का गुस्सा, आंदोलन की चेतावनी
सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के नाम पर उज्जैन में लागू लैंड पूलिंग नीति को लेकर पिछले कई महीनों से चल रहा किसान आंदोलन एक बार फिर उबाल पर है। भारतीय किसान संघ (भाकिसं) ने मंगलवार को सरकार की घोषणा पर जश्न मनाया था, लेकिन बुधवार को जारी गजट नोटिफिकेशन देखकर संगठन ने सरकार पर धोखा देने का गंभीर आरोप लगाया है।
संघ ने साफ कहा है कि अगर सरकार ने अपने मूल वादे के मुताबिक लैंड पूलिंग एक्ट को पूरी तरह निरस्त नहीं किया, तो पुराना आंदोलन फिर शुरू हो जाएगा।

सोमवार की वार्ता में क्या हुआ था?
सोमवार को भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की मौजूदगी में भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधिमंडल से लंबी वार्ता हुई थी। वार्ता के बाद सरकार ने घोषणा की थी कि सिंहस्थ क्षेत्र में लैंड पूलिंग नीति वापस ली जा रही है। इसके बाद मंगलवार सुबह उज्जैन में किसान संघ के कार्यकर्ताओं ने आतिशबाजी करके और मिठाइयां बांटकर जश्न मनाया था।
बुधवार का गजट नोटिफिकेशन और नया विवाद
लेकिन बुधवार को नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा जारी गजट नोटिफिकेशन ने सारे समीकरण बदल दिए। प्रदेश अध्यक्ष कमल सिंह आंजना ने तत्काल प्रेस नोट जारी कर कहा, "हमने लिखित में स्पष्ट किया था कि सिंहस्थ क्षेत्र में लैंड पूलिंग एक्ट पूरी तरह समाप्त किया जाए। TDS-8, 9, 10 और 11 स्कीमों को रद्द कर धारा-50(1) हटाई जाए। सिंहस्थ पहले की तरह अस्थाई व्यवस्था से ही आयोजित हो। किसानों पर दर्ज सारे मुकदमे वापस हों और सिंहस्थ क्षेत्र में कोई स्थायी निर्माण न हो। लेकिन जारी आदेश से साफ है कि सरकार धारा-50 और 12(क) को बनाए रखकर किसानों को उलझाने का काम कर रही है।"
आंजना ने कहा, "यह संशोधन नहीं, धोखा है। अगर सरकार 24 घंटे के अंदर स्पष्ट आदेश नहीं जारी करती कि लैंड पूलिंग एक्ट पूरी तरह निरस्त हो गया है, तो हम फिर सड़कों पर उतरेंगे। जिम्मेदारी सरकार की होगी।"
नए आदेश में क्या बदला, क्या नहीं?
नए संशोधन के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
लैंड पूलिंग की जगह अब भूमि अधिग्रहण अधिनियम-2013 के तहत मुआवजा देकर जमीन ली जाएगी।
पहले प्रस्तावित 2344.11 हेक्टेयर में से अब सिर्फ 70 हेक्टेयर जमीन की जरूरत होगी।
इन 70 हेक्टेयर में करीब 23 हेक्टेयर सरकारी जमीन है, बाकी 47-50 हेक्टेयर निजी जमीन होगी।
अस्थाई व्यवस्था (कच्ची सड़क आदि) के लिए सहमति से सीमित मुआवजा, पक्के इंफ्रास्ट्रक्चर (सड़क, बिजली, नाली) के लिए दोगुना मुआवजा।
स्कीम 8, 9, 10, 11 की शेष जमीन का मालिकाना हक फिर से किसानों को वापस मिलेगा।
यूडीए का उन जमीनों पर अधिकार खत्म।
किसानों का सवाल: लैंड पूलिंग खत्म हुई या सिर्फ नाम बदला?
किसान संघ का कहना है कि सरकार ने लैंड पूलिंग का नाम बदलकर "अधिग्रहण" कर दिया, लेकिन धारा-50 और 12(क) को बनाए रखकर दरवाजा खुला छोड़ दिया है। उनका दावा है कि ये धाराएं फिर कभी भी लैंड पूलिंग को वापस ला सकती हैं। साथ ही स्थायी निर्माण की आशंका भी बरकरार है।
सिंहस्थ क्षेत्र के गांवों में फिर से तनाव
नया आदेश आने के बाद क्षिप्रा तट के गांवों - नावा खेड़ा, ताखर, लालपुर, सूर्यपुर, ताजपुर आदि में फिर से बैठकें शुरू हो गई हैं। किसान कह रहे हैं, "सिंहस्थ तो हर 12 साल में आता है, लेकिन हमारी जमीन हमेशा के लिए चली जाएगी। हम पहले जैसे अस्थाई सिंहस्थ चाहते हैं, कोई पक्का शहर नहीं।"
सरकार का पक्ष (अभी तक मौन)
नगरीय विकास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि लैंड पूलिंग पूरी तरह खत्म कर दी गई है और सिर्फ न्यूनतम जरूरी जमीन ही ली जाएगी। लेकिन किसान संगठन इसे आश्वासन मानने को तैयार नहीं हैं। विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "70 हेक्टेयर में ही सारा इंफ्रास्ट्रक्चर बन जाएगा, किसानों को परेशान करने की कोई मंशा नहीं है।"
आगे क्या?
भारतीय किसान संघ ने शुक्रवार तक का अल्टीमेटम दिया है। अगर तब तक स्पष्ट आदेश नहीं आया कि "लैंड पूलिंग एक्ट सिंहस्थ क्षेत्र से पूरी तरह निरस्त" हो गया है, तो 25 नवंबर से जिला मुख्यालय पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू होगा। साथ ही क्षिप्रा घाटों पर तंबू गाड़कर आंदोलन की तैयारी भी शुरू हो गई है।
सिंहस्थ-2028 से पहले उज्जैन एक बार फिर आंदोलन की आग में जलने को तैयार दिख रहा है। देखना यह है कि सरकार किसानों के गुस्से को शांत कर पाती है या मामला फिर कोर्ट और सड़क तक पहुंचता है।












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