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अब, दशकों पुराना हाल न हो जाए, कम बारिश और भूख से मर गए थे लाखों

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{अनिल कुमार} इस बार देश में ज्यादातर राज्यों में औसत से कम बारिश दर्ज की जा रही है। इसकी भविष्यवाणी मौसम वैज्ञानिकों ने पहले ही कर दी थी। इसके लिए चिंतन व बहस सब जगह चल रही हैं लेकिन भविष्य के खतरे को भांपते हुए इंतजामात कुछ नहीं। ऐसा न हो कि भारत उस दशकों पुरानी स्थिति में पहुंच जाए जब भुखमरी ने लाखों लोगों की जान लेली थी। दरअसल, उस समय कोई खास तैयारी नहीं थी। 1867 का काल। भारत पर ब्रिटिश राज चल रहा था। ब्रिटेन व्यापार से किसी तरह धन कमाने पर ध्यान लगाए हुए था। इसका आभास ही नहीं था कि आगे क्या होने वाला है।

औसत से कम बारिश से जमीन सूख रही थी। उत्पादन घट रहा था। पश्चिम भारत और दक्षिण भारत में विशेष कर पानी की बूंदों के लिए किसान आसमान की ओर निहार रहे थे। लेकिन कुदरत का कहर ऐसा बरपा कि औसत से कम बारिश ने सूखे की स्थिति पैदा कर दी। उत्पादन में भारी गिरावट आई। खाद्य वस्तु की आपूर्ति में भी भारी कम हो गई। सन 1870 तक स्थिति ऐसी बन गई कि लोगों के पास खाने के लिए भी कुछ नहीं बचा। चारो तरफ भुखमरी फैल गई। लोगों ने दम तोड़ना शुरू कर दिया। जंगल सूखने लगे जिससे शाखाहारी जानवरों की भूख से मौत हो गई और मांसाहारी पशु तड़प-पड़प के मर गए।

उस समय भारत की जनसंख्या करीब 42 करोड़ थी। एक जानकारी के मुताबिक इस महा भुखमरी के कहर की वजह से भुखमरी का शिकार हुए लोगों में से 9 लाख लोगों की मौत हो गई। हजारों पशु-पक्षियों ने मौत के मुंह में समा गए। कहीं ऐसा न हो कि देश फिर उसी कहर की और बढ़ जाए और सरकार को कानो-कान खबर न हो। चेताने के लिए आपकों हम कुछ तस्वीरों के जरिए उस कुदरत के कहर से रूबरू कराएंगे। स्लाइड में देखिए दास्तानः

पशु के लिए चारा तक नहीं था

पशु के लिए चारा तक नहीं था

यह 1870 के दौरान भुखमरी के कहर की तस्वीर है। जिसमें हालात यह हैं कि न ही पशु के लिए चारा बचा न ही लोगों के लिए खाने के लिए।

इतनी बुरी हालत हो चली थी

इतनी बुरी हालत हो चली थी

कम बारिश के कारण भुखमरी का कहर इस तरह टूटा था कि जानवर भी सड़-सड़ कर मर रहे थे तो बच्चे भी कुपोषित होकर मर रहे थे।

भुखमरी से पीड़ित एक महिला

भुखमरी से पीड़ित एक महिला

भुखमरी के कारण बरपे कहर ने समाज की महिलाओं की भी स्थिति और भी ज्याद दयानीय कर दी थी। फोटो में आप देख सकते हैं एक महिला कितनी लाचारी से गुजर रही है।

मरने की कगार पर पहुंचे लोग

मरने की कगार पर पहुंचे लोग

हालत इतनी बिगड़ चुकी थी कि लोग मरने की कगार पर पहुंच चुके थे। जहां थे वहां से उठने तक की हिम्मत नहीं थी। यह कम बारिश के बाद पनपे संकेतों को नजर अंदाज करने का नतीजा ही था।

हालत किसान की

हालत किसान की

इतना सूखा पड़ा था कि किसान हताश भरे चेहरा लिए आसमान की ओर निहारता रहता था। एक बूंद के लिए घंटों इंतजार किया लेकिन कहर कम नहीं हुआ।

पलायन की स्थिति

पलायन की स्थिति

भुखमरी और जमीन के बंजर होते देख किसानों ने खेती छोड़कर फावड़े उठा लिए और मजदूरी करने लगे थे। कई किसान दक्षिण भारत के बेंगलोर या कहें उस समय के मैसूर राज्य की ओर पलायन कर गए थे। कहा जाता है कि उस समय वर्तमान बेंगलोर क्षेत्र में बारिश हालात फिर भी ठीक थे। रेल लाइन बिछाई जा रही थी। लोगों ने यहां पलायन शुरू कर दिया।

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English summary
The rain below average is inviting the danger of Famine as in 1870 in India. This should not like a threat for Indian Government?.
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