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Success Story: बुरहानपुर के युवा किसान प्रतीक पाटील बने आत्मनिर्भर, सरकारी योजना से खेती को बनाया रोजगार

Success Story: मध्य प्रदेश में खेती अब सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक और स्वरोजगार का मजबूत माध्यम बनती जा रही है। सरकार की योजनाएं अगर सही हाथों में पहुंचें, तो वे न सिर्फ किसान की आमदनी बढ़ाती हैं, बल्कि गांवों में रोजगार के नए रास्ते भी खोलती हैं।

ऐसी ही एक प्रेरणादायक सफलता की कहानी है बुरहानपुर जिले के ग्राम टिटगांवकलां के युवा किसान प्रतीक पाटील की, जिन्होंने सरकारी योजना का लाभ लेकर खुद को आत्मनिर्भर बनाया और गांव के दूसरे किसानों के लिए भी सहारा बने।

Success Story Young farmer Pratik Patil of Burhanpur becomes self-reliant thank to government scheme

किसान परिवार से आते हैं प्रतीक

प्रतीक पाटील एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता वर्षों से खेती करते आ रहे हैं और प्रतीक भी बचपन से ही खेत-खलिहान से जुड़े रहे। वे केले, चना, मक्का, गन्ना, सोयाबीन, तुअर, गेहूं और प्याज जैसी फसलों की खेती करते हैं। पढ़ाई के साथ-साथ खेती में हाथ बंटाते हुए प्रतीक ने खेती की जमीनी समस्याओं को बेहद करीब से देखा।

खेती की बड़ी समस्या ने दिया नया विचार

प्रतीक बताते हैं कि गांवों में खेती की सबसे बड़ी परेशानी समय पर ट्रैक्टर और आधुनिक कृषि यंत्रों की उपलब्धता है। छोटे और मध्यम किसान अक्सर यंत्रों के अभाव में समय पर बुवाई या कटाई नहीं कर पाते, जिससे उत्पादन और मुनाफा दोनों प्रभावित होते हैं।

इसी समस्या ने प्रतीक को सोचने पर मजबूर किया- "अगर गांव में ही आधुनिक कृषि यंत्र किराये पर उपलब्ध हों, तो किसानों को राहत मिलेगी और रोजगार भी पैदा होगा।"

यहीं से उनके मन में स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता का बीज पड़ा।

सरकारी योजना से खुला रास्ता

प्रतीक को कृषि अभियांत्रिकी विभाग द्वारा संचालित निजी कस्टम हायरिंग स्कीम की जानकारी सहायक कृषि यंत्री कार्यालय, बुरहानपुर से मिली। यह योजना उन युवाओं के लिए है, जो कृषि यंत्र खरीदकर उन्हें किराये पर उपलब्ध कराना चाहते हैं।

प्रतीक ने बिना देरी किए योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन किया। इसके बाद कंप्यूटराइज्ड लॉटरी प्रक्रिया के जरिए उनका चयन हुआ। चयन की खबर मिलते ही उनके सपनों को नई उड़ान मिल गई।

आधुनिक यंत्र, नया रोजगार

योजना के तहत प्रतीक ने आधुनिक कृषि यंत्र खरीदे और गांव में कस्टम हायरिंग सेवा शुरू की। अब किसान जरूरत के हिसाब से ट्रैक्टर और अन्य यंत्र किराये पर ले सकते हैं। इससे न सिर्फ किसानों का समय और पैसा बच रहा है, बल्कि प्रतीक को भी नियमित आमदनी हो रही है।

प्रतीक कहते हैं, "आज मैं खुद भी आत्मनिर्भर हूं और दूसरे किसानों की मदद भी कर पा रहा हूं। खेती अब घाटे का सौदा नहीं, बल्कि रोजगार का साधन बन सकती है।"

गांव के युवाओं के लिए मिसाल

आज प्रतीक पाटील की सफलता गांव के दूसरे युवाओं को भी प्रेरित कर रही है। कई युवा अब खेती को छोड़ने के बजाय आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं के साथ आगे बढ़ने का मन बना रहे हैं।

सरकार की योजनाएं जब जमीन पर उतरती हैं

प्रतीक पाटील की कहानी इस बात का उदाहरण है कि यदि सही जानकारी, मेहनत और सरकारी सहयोग मिल जाए, तो ग्रामीण युवा भी आत्मनिर्भर बन सकते हैं। कृषि यंत्रीकरण न केवल उत्पादन बढ़ा रहा है, बल्कि गांवों में रोजगार और आत्मविश्वास भी पैदा कर रहा है।

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