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MP: 6 साल के दिव्यांग आराध्य को याद है 400 श्लोक, स्वस्ति वाचन समेत वेद की ऋचाएं, 'संस्कृति कौटिल्य' दिया नाम

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सीधी 1 सितंबर। कहते हैं कि प्रतिभा किसी के मोहताज नहीं होते और ना ही टैलेंट वाले बच्चे की कोई उम्र सीमा होती है सीधी जिले में एक 6 वर्ष का दिव्यांग बच्चा आराध्य तिवारी अपनी छोटी सी उम्र में अपनी प्रतिभा के ऐसे प्रदर्शन करता है कि सबको अचंभित कर देता है। इस नन्हे बच्चे को जहां संस्कृत के 400 श्लोक और स्वस्ति वाचन सहित कई वेद याद हैं, इतना ही नहीं छोटे कौटिल्य अपने से बड़े उम्र के बच्चों को स्कूल में पढ़ाने का भी कारनामा करते हैं।

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    जन्म से ही दिव्यांग इस बालक को उसकी प्रतिभा के चलते संस्कृत का कौटिल्य कहा जाता है।
    जन्म से ही दिव्यांग

    जन्म से ही दिव्यांग

    सीधी जिले के संस्कृत के कौटिल्य कहे जाने वाले आराध्य तिवारी का जन्म 15 जुलाई 2015 को फुलवारी ग्राम पंचायत तहसील बहरी जिला सीधी में हुआ था। आराध्य के जन्म लेते ही परिवार में खुशियां आई और सभी ने आराध्य का स्वागत किया। आराध्य जन्म से ही दोनों पैरों से दिव्यांग थे। दोनों पैर आपस में मुड़े हुए थे।

    नाना मुद्रिका प्रसाद के अनुसार

    नाना मुद्रिका प्रसाद के अनुसार

    जानकारी देते हुए उनके नाना मुद्रिका प्रसाद शुक्ला ने बताया की बालक के जन्म लेते ही पता चला था कि वह दोनों पैर से दिव्यांग हैं। मूल रूप से आराध्य कंदुई वाराणसी के रहने वाले हैं, उनके पिता भास्कर तिवारी गुजरात में प्राइवेट नौकरी करते हैं तो माता आराधना देवी गृहणी हैं। आराध्य अपने माता-पिता के अकेले संतान हैं।

    सनातन धर्म की ओर है विशेष झुकाव

    सनातन धर्म की ओर है विशेष झुकाव

    आराध्य को बचपन से ही सनातन धर्म और संस्कृत की ओर विशेष रूचि रही है। जिसे उनके नाना ने पढ़ाया। नाना के मार्गदर्शन में ही पूजा पाठ के दौरान आराध्य को संस्कृत के 400 श्लोक, स्तुति वाचन गणेश वंदना सहित कई संस्कृत के ज्ञान इनके पास कंठस्थ हुए करते हैं शुद्ध उच्चारणजब आराध्य तिवारी से स्वस्ति वाचन पढ़ने के लिए बोला गया तो वह बिना किसी झिझक के स्पष्ट शब्दों में ऐसे उच्चारण करने लगे, जैसे काशी का कोई प्रकांड विद्वान मंत्रोच्चारण कर रहा हो।

    मामा वेद प्रकाश शुक्ला के अनुसार

    मामा वेद प्रकाश शुक्ला के अनुसार

    विलक्षण प्रतिभा के धनी इस बच्चे के मामा वेद प्रकाश शुक्ला जो पेशे से ग्राम पंचायत फुलवारी के रोजगार सहायक हैं, उन्होंने जानकारी दी की आराध्य अपने नाना के साथ पूजा पाठ करते हैं और उन्हीं के मार्गदर्शन में यह सब सीखे हैं।

    नाना ने अपने शासकीय स्कूल में है इन्हें पढ़ाया

    नाना ने अपने शासकीय स्कूल में है इन्हें पढ़ाया

    नाना के यहां फुलवारी गांव में रहते हैं। इनके नाना मुद्रिका प्रसाद शुक्ल पेशे से शिक्षक तथा शासकीय हाई स्कूल फुलवारी के प्राचार्य हैं। इन्हीं के मार्गदर्शन में आराध्य कक्षा 2 में अध्ययनरत है।

    स्कूल शिक्षक के अनुसार

    स्कूल शिक्षक के अनुसार

    स्कूल में पदस्थ शिक्षक हरीश पांडेय के द्वारा बताया गया कि यह बच्चा विलक्षण प्रतिभा का धनी है, यह आने वाले समय में अपने गांव, परिवार, समाज, क्षेत्र सहित संस्कृत के क्षेत्र में व सनातन धर्म के क्षेत्र में यशस्वी होने का पताका लहराएगा. अराध्य के क्लास टीचर हरीश पांडेय वातावरण के अनुकूल शिक्षा देते हुए उनके मन को नई उड़ान देते है। उनके द्वारा बताया गया कि यह बच्चा विलक्षण प्रतिभा का धनी है। यह आने वाले समय में अपने गांव, परिवार, समाज, क्षेत्र सहित संस्कृत के क्षेत्र में और सनातन धर्म के क्षेत्र में यशस्वी होने का पताका लहराएगा। नाम रोशन करेगा।

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    English summary
    Sidhi Sanskrit Kautilya Aradhya memorizes 400 verses, hymns of Vedas including Swasti reading,
    देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
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