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MP News: शिवपुरी के पिछोर में दामोदर सिंह यादव की ‘संविधान बचाओ सभा’ की अनुमति क्यों हुई रद्द, जानिए पूरा सच!

मध्य प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है। दलित पिछड़ा समाज संगठन (DPSS) के राष्ट्रीय अध्यक्ष दामोदर सिंह यादव ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि 24 नवंबर को शिवपुरी जिले के पिछोर विधानसभा क्षेत्र में आयोजित होने वाली 'संविधान बचाओ सभा रैली' की अनुमति अचानक रद्द कर दी गई।

चार दिन पहले प्रशासन से मिली मंजूरी के बावजूद, सभा के एक दिन पहले एसडीएम और एसडीओपी ने इसे निरस्त कर दिया। यादव का आरोप है कि यह फैसला बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की कथा के डर से लिया गया, जो उसी दिन पिछोर में शुरू हो रही है।

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यादव ने धीरेंद्र शास्त्री पर अंधविश्वास, पाखंड और आडंबर फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी रैली का मकसद लोगों को जागरूक करना था, लेकिन प्रशासन ने संविधान के पक्ष में उठने वाली आवाज को दबाने की कोशिश की है। अब उन्होंने 15 दिसंबर को पिछोर में हजारों समर्थकों के साथ आंदोलन का ऐलान किया है।

अनुमति क्यों रद्द? प्रशासन का बहाना या दबाव का खेल?

दामोदर सिंह यादव ने बताया कि 20 नवंबर को उन्होंने स्थानीय प्रशासन से रैली की अनुमति ली थी। पिछोर के एक मैदान में 'संविधान बचाओ सभा' आयोजित करने का प्लान था, जिसमें संविधान की रक्षा, दलित-पिछड़ों के अधिकार और अंधविश्वास के खिलाफ जागरूकता पर फोकस होना था। लेकिन 23 नवंबर को एसडीएम और एसडीओपी ने फोन पर सूचना दी कि "पर्याप्त पुलिस बल न होने के कारण अनुमति निरस्त की जाती है।" यादव ने सवाल उठाया, "चार दिन पहले तो पुलिस व्यवस्था पर्याप्त थी, आज क्यों नहीं? क्या मध्य प्रदेश में इतनी पुलिस नहीं कि एक शांतिपूर्ण सभा को संभाला जा सके? अगर सच में कमी है तो सरकार क्यों पुलिस भर्ती नहीं कर रही?"

यह विवाद तब और गहरा गया जब यादव ने स्पष्ट किया कि उनकी रैली का एक मुख्य उद्देश्य धीरेंद्र शास्त्री की कथा के खिलाफ प्रचार था। उन्होंने कहा, "धीरेंद्र शास्त्री अपनी कथाओं के जरिए आडंबर और पाखंड फैलाते हैं। वे दलित-पिछड़ों को वैज्ञानिक सोच से दूर कर मनुवादी विचारधारा में धकेलने का काम करते हैं। हम लोगों को जागरूक करना चाहते थे कि संविधान के मूल्यों से भटकना खतरनाक है। लेकिन उनके ऐलान के बाद ही अनुमति रद्द कर दी गई। क्या यह संयोग है या दबाव का नतीजा?"

धीरेंद्र शास्त्री की कथा: लाखों श्रद्धालुओं का जमावड़ा, सुरक्षा का सवाल

24 नवंबर से पिछोर में धीरेंद्र शास्त्री की सात दिवसीय हनुमान कथा का आयोजन होना है। बागेश्वर धाम ट्रस्ट ने लाखों श्रद्धालुओं के आने का दावा किया है। पोस्टर-पैंफलेट और सोशल मीडिया पर प्रचार जोरों पर है। ट्रस्ट ने कहा कि यह कथा संपूर्णता और एकता का संदेश देगी। लेकिन यादव का ऐलान कि वे कथा स्थल के पास ही पाखंड के खिलाफ जागरूकता फैलाएंगे, ने स्थानीय प्रशासन को चिंतित कर दिया।

पिछोर के एक स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "धीरेंद्र जी की कथा में लाखों लोग आएंगे, सुरक्षा का इंतजाम मुश्किल है। लेकिन DPSS की रैली भी शांतिपूर्ण थी। क्या दो कार्यक्रमों को एक साथ संभालना असंभव है?" जिला प्रशासन ने कहा कि निर्णय कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए लिया गया। लेकिन विपक्ष ने इसे "सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का डर" बताया।

दामोदर सिंह यादव का धमाकेदार बयान: "संविधान विरोधियों, सुन लो!"

दामोदर सिंह यादव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में गुस्से से कहा, "प्रशासन ने चार दिन पहले अनुमति दी, तो एक दिन पहले निरस्त क्यों? क्या आडंबर-पाखंड के खिलाफ और संविधान के पक्ष में उठ रही आवाज को दबाना चाहते हैं? हम आंदोलन करेंगे, कोर्ट जाएंगे। सुन लो संविधान विरोधियों, अब मैं आऊंगा! 15 दिसंबर को पिछोर में हजारों साथियों के साथ अपने हक-अधिकारों की लड़ाई लड़ूंगा। यह सिर्फ पिछोर की नहीं, पूरे मध्य प्रदेश की लड़ाई है।"

यादव ने धीरेंद्र शास्त्री पर सीधा निशाना साधा: "वे चमत्कार दिखाकर लोगों को बेवकूफ बनाते हैं। संविधान वैज्ञानिक सोच सिखाता है, लेकिन उनकी कथाएं अंधविश्वास फैलाती हैं। हम डॉ. अंबेडकर के विचारों को जीवंत रखेंगे।" यादव ने कहा कि अगर अनुमति न मिली तो वे सड़क पर उतरेंगे - धरना, रेल रोको, हाईकोर्ट में याचिका।

कानून व्यवस्था पर सवाल: पुलिस की कमी या राजनीतिक दबाव?

मध्य प्रदेश में हाल के महीनों में कानून व्यवस्था को लेकर कई विवाद उछले हैं। भिंड में पुलिस हिरासत में मारपीट, सागर में सांप्रदायिक तनाव, छतरपुर में लव जिहाद के आरोपों पर बजरंग दल की कार्रवाई - ये घटनाएं सरकार पर सवाल खड़े कर रही हैं। अब पिछोर का मामला जोड़ गया।

विपक्षी नेता कमलनाथ ने ट्वीट किया, "मोहन यादव सरकार में संविधान की आवाज दबाई जा रही है। क्या भाजपा को धीरेंद्र शास्त्री की कथा से ज्यादा डर है?" भाजपा ने कहा, "प्रशासन का निर्णय तटस्थ है। शांति बनाए रखने के लिए लिया गया।"

सवाल उठ रहे हैं:

  • अगर पुलिस बल कम है तो भर्ती क्यों नहीं? (मध्य प्रदेश में 2024 में 7,000 से ज्यादा पुलिस पद खाली हैं।)
  • क्या धार्मिक आयोजनों को प्राथमिकता देकर सामाजिक जागरूकता को दबाया जा रहा है?
  • यादव के खिलाफ पहले भी धमकियां मिल चुकी हैं - क्या यह दबाव का नतीजा है?

15 दिसंबर: पिछोर में नया संग्राम?

यादव का 15 दिसंबर का ऐलान अब सियासी हलचल मचा रहा है। DPSS ने मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश से कार्यकर्ताओं को बुलाने का प्लान बनाया है। पिछोर में तनाव बढ़ने की आशंका है। प्रशासन ने कहा कि नए आवेदन पर विचार होगा, लेकिन यादव ने चेतावनी दी, "हम संविधान के रक्षक हैं, दबेंगे नहीं।"

यह विवाद मध्य प्रदेश की राजनीति को नई दिशा दे सकता है। एक तरफ धार्मिक आयोजन, दूसरी तरफ संवैधानिक जागरूकता - बीच में फंसी कानून व्यवस्था। दामोदर सिंह यादव की लड़ाई अब सिर्फ पिछोर तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे राज्य की हो गई है। क्या 15 दिसंबर को शांति बनी रहेगी या सियासी तूफान खड़े हो जाएगा? पूरा राज्य सांस रोके इंतजार कर रहा है।

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