Success story: बेटी बनी सहारा, परिवार की आर्थिक हालत देख 19 वर्षीय रेशमा चलाने लगी ई-रिक्शा

रीवा, 7 जुलाई: भारत की बेटी किसी बेटे से कम नहीं है अगर बेटी ठान ले तो सबकुछ कर सकती है। एक ऐसी ही कहावत को रीवा की बेटी 19 वर्षीय रेशमा द्विवेदी ने चरितार्थ किया जहां पिता की कमाई से परिवार चलाना मुश्किल हो रहा था तो बेटी ने परिवार का हाथ बंटाने के लिए नौकरी करने के लिए सोची लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी कहीं नौकरी नहीं मिली। नौकरी न मिलने पर बेटी ने हिम्मत नहीं हारी और ई-रिक्शा की स्टेरिंग थाम ली। अब रोज इतना कमा लेती हैं कि उनका घर-परिवार आराम से चल रहा है।

Reshma Dwivedi

नौकरी नहीं मिली तो चलाने लगी ई-रिक्शा

भारत के करोड़ों युवा बेरोजगार है, ऐसे में अगर आपको कोई लड़की ई-रिक्शा चलाते हुए दिख जाए तो समझिए वह आत्मनिर्भर भारत की मिसाल है। रीवा नगर की रहने वाली 19 वर्षीय रेशमा द्विवेदी को भी नौकरी नहीं मिलने पर खुद पर भरोसा किया और ई-रिक्शा चलाने लगी। रेशमा बतातीं है कि कक्षा 12वीं पास करने के बाद पिता की इतनी कमाई नहीं होती थी कि आगे की पढ़ाई कर सकूं। रीवा शहर में नौकरी की तलाश में काफी परेशान हुई लेकिन कही नौकरी नहीं मिला। तब ई-रिक्शा चलाने की ठानी और किसी तरह इंतजाम करके ई-रिक्शा फाइनेंस करा लिया। अब किश्त देने के बाद प्रतिदिन इतनी कमाई हो जाती है कि परिवार चलाने में पापा जी का आर्थिक सहयोग कर पा रही हूं।

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पिता करते हैं पंडिताई

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रेशमा द्विवेदी ने बताया कि उनके घर में सिर्फ पिता कमाते हैं। वे पंडिताई का काम करते हैं, लेकिन उससे इतनी आमदनी नहीं हो पाती की घर ठीक से चल सके। पिता की कमाई से घर मुश्किल से चलता है। उनकी परेशानी को कम करने के लिए आगे पढ़ाई न करके रेशमा ने काम करना ठीक समझा। रेशमा बेरोजगार युवाओं से कहतीं हैं कि चोरी करने और भीख मांगने कहीं बेहतर है कि खुद मेहनत करें और अपनी रोजी-रोटी के व्यवस्था के लिए ऑटो रिक्शा ही क्यों न चलाना पड़े।

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