Satna News: हादसे को न्योता दे रहा स्कूल का जर्जर भवन, टूटी-फूटी छत के नीचे पढ़ाई करने को मजबूर बच्चे'

सतना 30 जुलाई। जिले में शिक्षा व्यवस्था और स्कूल की इमारतें पूरी तरह से बदहाली का शिकार हो चुकी हैं, अमरपाटन क्षेत्र में स्थिति शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय परसवाही में बने कमरों की छत पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है। छत कब गिर जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता है। लेकिन, छत के नीचे बैठकर सैकड़ों की संख्या में बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। मासूम बच्चों की जिंदगी पर मौत का संकट मंडरा रहा है। लेकिन, शिक्षा विभाग के अफसरों पर इस ओर कोई ध्यान नहीं है। इस सरकारी स्कूल में शिक्षा के नाम पर मासूमों को मौत के मुंह में धकेलने का काम चल रहा है, लेकिन शिक्षा विभाग नींद की आगोश में है।

20 सालों से स्कूल हो रहा संचालित

20 सालों से स्कूल हो रहा संचालित

आज से लगभग 20 वर्ष पहले जहां इस विद्यालय में दूरदराज के कई गांवों के छात्र अध्ययन करने के लिए आते थे और बेहतर शिक्षा प्राप्त करते थे लेकिन आज यह विद्यालय अपनी दुर्दशा पर रो रहा है।

एलएनटी कंपनी ने गिराई थी बिल्डिंग

एलएनटी कंपनी ने गिराई थी बिल्डिंग

पिछले साल भारत सरकार द्वारा एलएनटी कंपनी प्रोडक्ट में बनी नेशनल हाईवे 30 सड़क के किनारे इस स्कूल की बाहरी दीवारों को बिल्डिंग सहित गिरा दिया गया। किसी कदर 4 कमरों की बिल्डिंग खड़ी कराई गई। लेकिन कमरे इतने नाजुक है कि बिजली की चमक से दीवारें हिल उठती हैं। छत की छपाई पूरी तरह से गिरकर खंडहर में तब्दील हो गई है।

4 कमरों की स्कूल में दो कमरे पूरी तरह से क्षतिग्रस्त

4 कमरों की स्कूल में दो कमरे पूरी तरह से क्षतिग्रस्त

रोंगटे खड़े कर देने वाली इन तस्वीरों से साफ पता चलता है कि आखिरकार बच्चे पढ़ें तो पढ़े कहां। 4 कमरों में संचालित इस स्कूल की 2 कमरे पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। तो वहीं मात्र दो कमरों में कक्षा 1 से 8 तक के बच्चे अध्यापन कार्य करते हैं, एक कमरे में जहां कक्षा एक से पांचवीं तक के बच्चे पढ़ाई करते हैं तो वहीं दूसरे कमरे में कक्षा 6 से 8 तक की पढ़ाई संचालित होती है।

गंदगी का अंबार

गंदगी का अंबार

बरसात के दिनों में मैदान पूरी तरह से कीचड़ युक्त हो जाने के कारण मिलने वाला मध्यान भोजन बच्चों को कीचड़ में ही बैठकर करना पड़ता हैं। तस्वीरें चीख-चीख कर पुकार रही है इस विद्यालय के दुर्दशा पर लेकिन राजा की गद्दी पर बैठे हुए शिक्षा के प्रशासनिक अधिकारी मानो इस विद्यालय के बच्चों के साथ कोई खेल खेल रहे हो। एक तरफ सरकार जहा सीएम राइज विद्यालय खोलकर बच्चों के अच्छे शिक्षा की बात करती है तो वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण अंचल के इन विद्यालयों में अध्ययन करने वाले छात्र आखिरकार किस मंजिल तक पहुंच पाएंगे यह तो प्रदेश के मुखिया ही बता सकते हैं।

स्थानीय नेताओं का उपेक्षा का शिकार

स्थानीय नेताओं का उपेक्षा का शिकार

अमरपाटन के नेताओं की बात की जाए तो यहां पर विधानसभा उपाध्यक्ष डॉ राजेंद्र सिंह से लेकर मध्य प्रदेश शासन के वर्तमान राज्य मंत्री रामखेलावन पटेल तक को इस विद्यालय की दुर्दशा पर दया नहीं आई। जबकि कई बार इस विद्यालय के प्रधानाध्यापक को द्वारा पत्र भी लिखा जा चुका हैं।

वीआरसी सी.एल सिंह अमरपाटन

वीआरसी सी.एल सिंह अमरपाटन

अधिकारी ने वनइंडिया हिंदी से बात करते हुए बताया की बिल्डिंग बनने के लिए पैसा पास हो चुका है, लेकिन अधर में अटका हुआ है, तो वही विद्यालय की शिक्षिका ने बताया की हम लोग किसी कदर इस विद्यालय में कीचड़ से होकर आते जाते हैं। मगर मात्र 2 कमरों में कक्षाएं लगने के कारण बच्चों के पठन-पाठन की प्रक्रिया पूर्ण नहीं हो पाती।

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