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“जूते की माला वाला बयान क्यों दिया?”— पूर्व विधायक RD प्रजापति की सफाई, जानिए पूरी कहानी कैसे वीडियो हुआ वायरल

MP News: मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर जुबान का जहर उगलने का मामला सामने आया है। पूर्व विधायक आरडी प्रजापति के कथावाचकों और संतों को लेकर दिए गए विवादित बयान ने प्रदेश की सियासत को गरमा दिया है।

बयान वायरल होने के बाद जब वन इंडिया हिंदी ने उनसे संपर्क कर यह जानने की कोशिश की कि आखिर उन्होंने इतना आपत्तिजनक बयान क्यों दिया, तो आरडी प्रजापति ने सफाई देते हुए कहा कि उनका बयान सभी कथावाचकों और संतों के लिए नहीं था, बल्कि कुछ खास लोगों के संदर्भ में था।

rd prajapati controversial statement women respect clarification bhopal

कथावाचकों और संतों को लेकर दिए गए विवादित बयान पर घिरे पूर्व विधायक आरडी प्रजापति ने अब अपनी बात स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि उनका बयान सभी संतों या कथावाचकों के लिए नहीं था, बल्कि उन लोगों के खिलाफ था जो सार्वजनिक मंचों से महिलाओं का अपमान करते हैं और उन्हें केवल भोग की वस्तु के रूप में प्रस्तुत करते हैं।

आरडी प्रजापति ने कहा- "जिसे रामभद्राचार्य महाराज कहा जाता है, वह यह कहता है कि 'वाइफ' का फुल फॉर्म होता है वंडरफुल इंस्ट्रूमेंट फॉर एंजॉय, यानी महिलाएं केवल एंजॉयमेंट का साधन हैं। ऐसे बयान महिलाओं के सम्मान के खिलाफ हैं और यही मानसिकता समाज को पीछे ले जाती है।"

पूर्व विधायक ने आगे कहा कि उनके द्वारा दिया गया बयान ऐसे ही लोगों के लिए था, न कि पूरे संत समाज के लिए।"ऐसे बाबा जो महिलाओं को अपमानजनक नजर से देखते हैं, जो उन्हें केवल उपभोग की वस्तु समझते हैं, उन्हीं के लिए मैंने कहा था कि उन्हें समाज के सामने जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। ऐसे लोगों को बीच बाजार जूते की माला पहनाकर घुमाया जाना चाहिए, ताकि समाज में गलत संदेश न जाए।"

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बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया

आरडी प्रजापति का कहना है कि उनके बयान को जानबूझकर संदर्भ से हटाकर वायरल किया गया।
उन्होंने कहा- "मैं महिलाओं के सम्मान के पक्ष में खड़ा हूं। मेरा विरोध धर्म के खिलाफ नहीं है, बल्कि धर्म की आड़ में महिलाओं को अपमानित करने वाली सोच के खिलाफ है।"

कथावाचकों पर सीधा हमला

आरडी प्रजापति का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे कहते नजर आ रहे हैं- "कुछ कथावाचकों को जूते की माला पहनाकर नंगा घुमाया जाना चाहिए।"इस बयान के सामने आते ही धार्मिक संगठनों, संत समाज और राजनीतिक दलों में आक्रोश फैल गया। कई लोगों ने इसे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला और घोर आपत्तिजनक करार दिया।

जगद्गुरु रामभद्राचार्य पर भी साधा निशाना

आरडी प्रजापति यहीं नहीं रुके। उन्होंने जगद्गुरु रामभद्राचार्य पर भी सीधा हमला बोला और उन्हें "अंधाचार्य" तक कह डाला। इस टिप्पणी के बाद संत समाज में नाराजगी और ज्यादा बढ़ गई। सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

धीरेंद्र शास्त्री और अनिरुद्ध आचार्य पर भी तीखे तंज

पूर्व विधायक ने बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री और कथावाचक अनिरुद्ध आचार्य को भी अपने निशाने पर लिया। बयान में उन्होंने बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुए कहा-

"एंजॉय करने वाली मां से पैदा हुए हो?"

इस टिप्पणी को लेकर न सिर्फ धार्मिक बल्कि सामाजिक स्तर पर भी विरोध शुरू हो गया है। कई लोगों ने इसे सभ्य समाज की मर्यादा के खिलाफ बताया है।

बयान पर दी सफाई, लेकिन सवाल बरकरार

बयान वायरल होने के बाद जब वन इंडिया हिंदी ने आरडी प्रजापति से सवाल किया, तो उन्होंने कहा कि- "मेरा बयान सभी कथावाचकों और संतों के लिए नहीं था। कुछ लोग धर्म की आड़ में समाज को गुमराह कर रहे हैं, उन्हीं के खिलाफ मैंने यह बात कही थी।"

हालांकि, उनकी यह सफाई भी लोगों को संतोषजनक नहीं लगी। विरोध करने वालों का कहना है कि सार्वजनिक मंच से इस तरह की भाषा किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं हो सकती।

OBC-SC-ST महासम्मेलन में दिया गया बयान

गौरतलब है कि यह बयान आज भोपाल के दशहरा मैदान में आयोजित OBC, SC और ST समाज के महासम्मेलन के दौरान दिया गया। यह महासम्मेलन IAS अधिकारी संतोष वर्मा के समर्थन और विभिन्न सामाजिक मांगों को लेकर बुलाया गया था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे और मंच से दिए गए इस बयान ने पूरे आयोजन की दिशा ही बदल दी।

राजनीति गरम, कार्रवाई की मांग

पूर्व विधायक के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। कई संगठनों ने उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई और सार्वजनिक माफी की मांग की है। वहीं कुछ समर्थक इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी से जोड़कर देख रहे हैं। फिलहाल आरडी प्रजापति के बयान ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सार्वजनिक मंचों से बोलने वाले नेताओं को अपनी भाषा और मर्यादा की कोई सीमा नहीं होनी चाहिए।

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