Bhopal News: बूढ़े बाघ की घायल अवस्था में मौत, करमई में वन विभाग पिछले 7 दिनों से कर रहा था टाइगर की तलाश
Bhopal Tiger News: रायसेन जिले के अब्दुल्लागंज में जिस बाघ को वन विभाग ढूंढ रहा था। उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। गुरुवार को सुबह बाघ को करमई गांव की सीमा पर 5:30 बजे ग्रामीणों ने देखा। कुछ ही देर में वन विभाग के कर्मियों ने उसे घेर लिया और ग्रामीणों को उसके पास जाने से रोक दिया। सूचना के 5 घंटे बाद भी वन्य प्राणी विशेषज्ञ नहीं पहुंचे और घायल बाघ ने दम तोड़ दिया।
बताया जा रहा है कि करीब सुबह 11 बजे जांच दल करमई गांव पहुंचा और बाघ का शव वन विहार लाया गया। जहां पोस्टमार्टम के बाद उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। ग्रामीणों की मानें तो अगर समय से घायल बाघ का इलाज हो गया होता तो शायद उसकी जान बच सकती थी।

बता दें ओबैदुल्लागंज देलाबाड़ी से लगे रातापानी के वन क्षेत्र से घायल अवस्था में यह बाघ पिछले 7 दिनों से करमई गांव के आसपास घूम रहा था। इसके लिए 50 से अधिक वन कर्मियों को तैनात किया गया था। बाकी लोकेशन ट्रेस करने के लिए जंगल में ड्रोन कैमरा का सहारा भी लिया गया था। गुरुवार की सुबह 6:00 बजे घायल अवस्था में बाघ पहाड़ी से नीचे उतर आया।
ग्रामीणों ने कुछ दिन पहले गोली चलने की सुनी थी आवाज
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि 4 दिन पहले जंगल में गोली चलने की आवाज सुनाई दी थी। वही गुरुवार को मृत बाघ के पैर में गोली के निशान देखे गए, जबकि वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि 4 दिन पहले दो बाघों में आपसे संघर्ष हुआ था। जिसमें यह बाघ घायल हुआ था।
वन विभाग के अधिकारियों ने जानकारी देते हुए बताया कि 12 फरवरी 2023 को रातापानी के बरखेड़ा रेंज में बाघ और तेंदुए के बीच आपसी संघर्ष हुआ था। इसमें तेंदुए की मौत हो गई थी। इससे पहले चिकलोद रेंज की बरूखार बीट में आपसी संघर्ष की वजह से एक बाघ की मृत्यु हो गई थी।
बछड़ा गायब होने के बाद ग्रामीण हुए थे सतर्क
करमई गांव के ग्रामीणों ने बताया कि 6 दिन पहले गांव में गाय के बछड़े को उठाकर बाघ जंगल में ले गया था। इसके बाद ग्रामीण ने इसकी सूचना वन विभाग को दी थी। वन कर्मियों ने जमीन पर पद चिन्ह का निरीक्षण कर बाघ होने की पुष्टि की थी। तब से लगातार बाघ को पकड़ने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा था। पर टाइगर पकड़ में नहीं आ रहा था।
वन विभाग ने खाने के लिए दिया था 5 से 10 किलो मांस
मुख्य वन्य प्राणी संरक्षक जयेश चौहान ने जानकारी देते हुए बताया कि 7 दिन पहले इस बाघ को घायल अवस्था में देखा गया था। तभी से उस पर नजर रखी जा रही थी। टाइगर को दो बार 5 किलो और 10 किलो मांस भी दिया गया, जो उसने खाया भी लेकिन बच नहीं सका। ये बाघ फाइट में घायल हुआ था। उसके शरीर पर कई घाव थे। उमस वाली गर्मी के चलते घावों में संक्रमण हुआ, जिससे उसकी हालत बिगड़ गई।












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