Bhopal नगर निगम बैठक में हंगामा - ट्रांसफर के चार महीने बाद भी अफसर रिलीव क्यों नहीं? पार्षदों ने की घेराबंदी
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल नगर निगम (बीएमसी) की परिषद बैठक गुरुवार को एक बार फिर हंगामे और विवादों की भेंट चढ़ गई। आईएसबीटी परिसर में आयोजित इस बैठक में पक्ष-विपक्ष के पार्षदों ने अधिकारियों पर निशाना साधा। मुख्य मुद्दा बना अपर आयुक्त देवेंद्र सिंह चौहान और सहायक आयुक्त एकता अग्रवाल का लंबित रिलीव होना, जिनका ट्रांसफर जून में हो चुका है, लेकिन चार महीने बाद भी वे पद पर डटे हुए हैं।
एमआईसी सदस्य जितेंद्र शुक्ला ने तीखा सवाल उठाया, "नगर निगम में ऐसी क्या मलाई है कि ट्रांसफर के बाद भी अफसर रिलीव नहीं हो रहे?" इस पर भाजपा-कांग्रेस दोनों दलों के पार्षद एकजुट हो गए, जिससे बैठक में अफरा-तफरी मच गई।

बैठक में अन्य मुद्दों पर भी गरमागर्म बहस हुई। कोटेशन के नाम पर हो रहे छोटे-मोटे कामों, इंजीनियरों के बीच काम बंटवारे, उद्यानिकी विभाग के 22 लाख के खर्च पर घोटाले के आरोप, शहर की खराब सड़कों, स्ट्रीट लाइट्स की समस्या और बसों के संचालन जैसे कई मुद्दे उठे। परिषद अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने कमिश्नर संस्कृति जैन को कई निर्देश दिए, लेकिन कई सवाल अनुत्तरित रह गए। विपक्ष ने इसे "प्रशासनिक लापरवाही" करार दिया, जबकि प्रशासन ने "महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों" का हवाला दिया।
ट्रांसफर के बाद भी पद पर डटे अफसर: शासन के आदेशों की अवहेलना?
बैठक की शुरुआत ही विवादास्पद हुई। एमआईसी सदस्य जितेंद्र शुक्ला ने उठकर कहा कि अपर आयुक्त देवेंद्र सिंह चौहान और सहायक आयुक्त एकता अग्रवाल का ट्रांसफर 17 जून 2025 को शहरी विकास एवं आवास विभाग द्वारा जारी आदेश के तहत हो चुका है। चौहान को जबलपुर और अग्रवाल को देवास भेजा जाना था, लेकिन चार महीने बाद भी वे भोपाल में ही सक्रिय हैं। शुक्ला ने आरोप लगाया, "शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि ट्रांसफर के बाद रिलीव न होने पर वेतन रोका जाए। फिर भी इन अफसरों को सैलरी दी जा रही है। यह क्या मलाई है कि अफसर ट्रांसफर को तवज्जो नहीं दे रहे?"
कांग्रेस पार्षद अजीजुद्दीन ने शुक्ला का पूरा समर्थन किया। उन्होंने कहा, "यह न केवल शासन के आदेशों की अवहेलना है, बल्कि निगम के कामकाज को भी प्रभावित कर रहा है। नए अफसरों को जिम्मेदारी सौंपे बिना पुराने कैसे चलेगा?" इस पर भाजपा और कांग्रेस के पार्षद अपनी-अपनी सीटों से उठ खड़े हुए। नारेबाजी शुरू हो गई - "अफसर रिलीव करो! पारदर्शिता लाओ!" पूरा सभागार गूंज उठा। परिषद अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने हंगामे को शांत करते हुए कमिश्नर संस्कृति जैन को तत्काल निर्देश दिए, "दोनों अधिकारियों को रिलीव करने की कार्रवाई फौरन शुरू करें।"
कमिश्नर जैन ने सफाई दी, "दोनों अफसरों के पास कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं, जैसे चल रहे प्रोजेक्ट्स और फाइलें। कुछ समय और चाहिए।" लेकिन पार्षदों ने इसे बहाना बताया। एक वरिष्ठ पार्षद ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "ट्रांसफर के 24 दिन बाद भी वे फाइलें घर ले जा रहे हैं। यह तो साफ चुनौती है। पुलिस और पीडब्ल्यूडी में तो ऐसे मामलों में सस्पेंशन हो जाता है।" जुलाई और अगस्त में इन अफसरों के वेतन रोके जा चुके हैं, लेकिन फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। स्टाफ यूनियनों ने भी उच्चाधिकारियों को पत्र लिखे हैं, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा।
कोटेशन पर सवाल: छोटे कामों पर भी टेंडर, विकास कैसे होगा?
मुख्य एजेंडे के बाद भाजपा पार्षद प्रताप वारे ने कोटेशन प्रक्रिया पर ऐतराज जताया। उन्होंने कहा, "सीवेज चैंबर का ढक्कन बदलने तक के छोटे काम कोटेशन पर कराए जा रहे हैं। इससे विकास कार्य रुक जाते हैं। पार्षदों को सीधे काम करने का अधिकार दो।" भाजपा पार्षद देवेंद्र भार्गव ने इंजीनियरों के बीच काम बंटवारे का मुद्दा उठाया, "काम असमान रूप से बंटा है, कुछ इंजीनियर बोझ तले दबे हैं, तो कुछ आराम फरमा रहे।" अध्यक्ष सूर्यवंशी ने तुरंत इंजीनियरों को काम बंटवारे की व्यवस्था बनाने के आदेश दिए।
घोटाला
प्रश्नकाल में कांग्रेस पार्षद शिरीन खान ने उद्यानिकी विभाग के कामों पर सवाल किया। एमआईसी अशोक वाणी ने बताया कि फरवरी 2025 की ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) के बाद उद्यानिकी से जुड़े सभी काम कोटेशन पर हुए, जिनकी कुल लागत 22 लाख रुपये है। इस पर भाजपा पार्षद सुरेंद्र बाड़िका और पप्पू विलास घाड़गे ने आपत्ति जताई, "यह अनावश्यक खर्च है। पारदर्शिता कहां है?" कांग्रेस की नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी और योगेंद्र सिंह गुड्डू चौहान ने इसे "घोटाला" करार दिया। हंगामे के बीच अध्यक्ष ने कमिश्नर को पूरे मामले की जांच कर अगली बैठक में रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए।
बांदीखेड़ी प्रोजेक्ट पास, लेकिन विरोध के बीच
कांग्रेस के विरोध और हंगामे के बीच बैरसिया के बांदीखेड़ी वाटर सप्लाई प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल गई। यह प्रोजेक्ट रोजाना 20 लाख लीटर पानी सप्लाई करेगा। शबिस्ता जकी ने इसे "अधूरा प्रस्ताव" बताया, जिसमें भूमि आवंटन का विवरण नहीं है। उन्होंने जीआईएस-2025 के खर्चों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए, "जांच जरूरी है।"
सड़कें, लाइटें, बसें
9 अक्टूबर 2025 की खबर: अपर आयुक्तों की पॉवर घटाकर 5 लाख तक सीमित कर दी गई। महापौर अलका श्रीवास्तव ने कहा, "अपर आयुक्तों को वापस 50 लाख तक की स्वीकृति के अधिकार देंगे।" पार्षदों ने मांग की कि यह जल्द लागू हो।
12 अक्टूबर 2025 की खबर: एसीएस ने 22 किलोमीटर सड़कें खुद चेक कीं, जिनमें 25% पर गड्ढे। अफसरों ने कहा, "ये पीडब्ल्यूडी की सड़कें हैं।" महापौर ने जवाब दिया, "पूरी लिस्ट तैयार है। निगम अपनी सड़कों के गड्ढे जल्द भरेंगे।" पार्षदों ने तत्काल कार्रवाई की मांग की।
16 अक्टूबर 2025 की खबर: शहर की 30% स्ट्रीट लाइटें खराब, लोग वाहनों की लाइट का सहारा ले रहे। महापौर ने माना, "दीपावली तक 75% इलाकों में ही लाइटें जलाई जा सकीं। स्मार्ट सिटी और निगम के बीच गड़बड़ी थी।" अब स्मार्ट सिटी सीईओ अंजू अरुण कुमार को अपर आयुक्त बनाकर विद्युत शाखा का प्रभार दिया गया है।
कांग्रेस पार्षद गुड्डू चौहान ने बीसीएलएल बसों के संचालन पर सवाल उठाया, "हालात कैसे सुधरेंगे?" कमिश्नर जैन ने बताया, "अगले 30-40 दिनों में 70 नई बसें चलेंगी। एक कंपनी से बात चल रही है।"
डेपुटेशन कर्मचारियों पर भी सवाल
बैठक में डेपुटेशन पर तैनात 70 से अधिक अधिकारियों-कर्मचारियों पर भी बहस हुई। विपक्ष ने कहा, "ये स्थायी कर्मचारियों के साथ अन्याय है।" कमिश्नर ने आश्वासन दिया कि जल्द समीक्षा होगी। बैठक के बाद पार्षदों ने कहा, "आज पक्ष-विपक्ष एक थे। लेकिन प्रशासन सुस्त है।"
निगम प्रशासन की प्रतिक्रिया और भविष्य की उम्मीदें
कमिश्नर संस्कृति जैन ने बैठक के बाद कहा, "सभी मुद्दों पर कार्रवाई हो रही है। ट्रांसफर मामलों में शासन के निर्देशों का पालन होगा।" महापौर अलका श्रीवास्तव ने ट्वीट किया, "निगम विकास के लिए प्रतिबद्ध है। पार्षदों की मांगें पूरी करेंगे।" लेकिन विपक्ष नेता शबिस्ता जकी ने इसे "ढिलाई" बताया।
यह बैठक न केवल प्रशासनिक कमियों को उजागर करती है, बल्कि पार्षदों की सक्रियता भी दिखाती है। शहरवासी उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द सुधार होंगे, वरना अगली बैठक और गरम हो सकती है।
(रिपोर्ट: विशेष संवाददाता, एलएन मालवीय, भोपाल)
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