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सीहोर में बेमौसम बारिश से तबाही: कटी फसलें सड़ीं, 80% तक नुकसान; किसानों ने MSP पर खरीद और सर्वे की मांग

MP Weather: मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में पिछले 24 घंटे में मौसम ने अचानक करवट ली और रात्रि 12 बजे के बाद तेज आंधी-तूफान के साथ बेमौसम बरसात ने गेहूं की खड़ी और कटी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है।

दर्जनों गांवों में खड़ी फसलें आड़ी पड़ गईं, कटी हुई फसलें खेतों में पानी में भीग गईं और गेहूं के दाने सफेद पड़कर खराब हो गए। किसानों का कहना है कि अगर सरकार ने तत्काल सर्वे कर फसल बीमा और समर्थन मूल्य पर खरीद का आदेश नहीं जारी किया तो उनका पूरा साल बर्बाद हो जाएगा।

MP Weather Night storm and unseasonal rain in Sehore caused heavy damage to the wheat crop

आंधी-तूफान और बरसात से क्या नुकसान हुआ?

रात्रि 12 बजे के बाद शुरू हुई तेज हवाओं और बारिश ने जिले के कई क्षेत्रों में तबाही मचा दी। मुख्य प्रभावित इलाके:

खड़ी फसलें आड़ी पड़ गईं: सीहोर, आष्टा, नसरुल्लागंज, बुदनी, इछावर और नासरुल्लागंज विकासखंड के दर्जनों गांवों में गेहूं की खड़ी फसलें तेज हवाओं से जड़ से उखड़ गईं या आड़ी पड़ गईं। किसानों का कहना है कि फसल अब कटने लायक नहीं बची।

कटी फसलें भीगकर खराब: जहां फसल कटकर खेतों में रखी थी, वहां पानी भरने से गेहूं के दाने सफेद पड़ गए। सफेद दाने समर्थन मूल्य पर खरीद में अक्सर रिजेक्ट हो जाते हैं या बहुत कम भाव मिलता है।

क्षेत्रीय प्रभाव: खमरिया, भरवेली, रायपुर, नरेला, क्लास कला, जामिनी, पचामा, बडवेली, रोला मानपुर, नया खेड़ा जैसे गांवों में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। कुछ गांवों में 80-90% फसल प्रभावित बताई जा रही है।

किसान व समाजसेवी एमएस मेवाड़ा ने बताया कि बेमौसम बरसात ने फसल को दोहरी मार दी है - एक तरफ खड़ी फसलें तबाह हुईं, दूसरी तरफ कटी फसलें खराब हो गईं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने तत्काल सर्वे नहीं कराया तो हजारों किसान कंगाल हो जाएंगे।

किसानों की मांगें

एमएस मेवाड़ा के नेतृत्व में प्रभावित किसानों और सरपंचों ने निम्नलिखित मांगें की हैं:

तत्काल सर्वे कर प्रभावित फसलों का आकलन किया जाए। आंधी-तूफान और बेमौसम बरसात से खराब हुई खड़ी और कटी फसलों को फसल बीमा योजना के तहत नुकसान मुआवजा दिया जाए।

सफेद पड़ गए गेहूं के दानों को भी समर्थन मूल्य पर खरीदा जाए।

कटे हुए गेहूं को खरीदने के लिए विशेष कैंप लगाए जाएं और खराब दानों को रिजेक्ट न किया जाए। प्रभावित किसानों को तत्काल राहत राशि और बीज-खाद की मुफ्त व्यवस्था की जाए। किसानों का कहना है कि अगर समर्थन मूल्य पर खरीद नहीं हुई तो उनका साल बर्बाद हो जाएगा। सफेद दाने को लेकर व्यापारी बहुत कम भाव देते हैं और MSP पर खरीद में भी रिजेक्शन का खतरा रहता है।

मौसम विभाग का पूर्वानुमान और वर्तमान स्थिति

मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ और ट्रफ लाइन के प्रभाव से प्रदेश में 17 से 20 मार्च तक बारिश, आंधी और ओलावृष्टि का दौर रहा। सीहोर में रात्रि में तेज हवाओं (40-50 किमी/घंटा) के साथ अच्छी बारिश हुई, जिससे फसलें सबसे ज्यादा प्रभावित हुईं। मौसम विभाग ने कहा कि अब 21-22 मार्च से मौसम साफ होने लगेगा, लेकिन पहले हुए नुकसान की भरपाई नहीं हो सकती।

किसानों की पीड़ा और सरकार से अपील

किसानों का कहना है कि पिछले साल भी बेमौसम बरसात से फसलें प्रभावित हुई थीं, लेकिन इस बार नुकसान ज्यादा है। एमएस मेवाड़ा ने कहा कि सरकार को तत्काल राहत पैकेज घोषित करना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से अपील की कि प्रभावित इलाकों का दौरा कर किसानों से संवाद करें और राहत कार्य शुरू करें। यह घटना एक बार फिर बेमौसम बरसात के कारण किसानों की दुर्दशा को उजागर करती है। अगर सरकार ने जल्द कदम नहीं उठाए तो हजारों परिवारों का साल बर्बाद हो सकता है।

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