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MP News: CM ऑफिस के फर्जी डॉक्यूमेंट बनाने वाली नगर निगम यंत्री शिवानी गर्ग कैसे हुई सस्पेंड, जानिए पूरा मामला

MP News: मध्य प्रदेश के सिंगरौली नगर निगम में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया। राज्य शासन नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अधीन कार्यरत उपयंत्री शिवानी गर्ग ने कथित तौर पर मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) का फर्जी सेवा प्रमोशन आदेश बनाकर सहायक यंत्री के पद पर पदोन्नति का प्रयास किया।

CMO ने इस तरह के किसी आदेश को जारी न करने की पुष्टि की, जिसके बाद नगरी प्रशासन आयुक्त संकेत भोंडवे ने तत्काल एक्शन लेते हुए शिवानी गर्ग के खिलाफ FIR दर्ज कराई और उन्हें निलंबित कर दिया। यह घटना न केवल नगर निगम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ी कर रही है, बल्कि सरकारी दस्तावेजों के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को उजागर कर रही है।

Singrauli engineer Shivani Garg who made fake documents of Chief Minister office has been suspended

शिवानी गर्ग, जो 2016 में राज्य नगरीय यांत्रिकी सेवा में उपयंत्री के रूप में नियुक्त हुई थीं, हाल ही में तबादले के बाद सिंगरौली नगर निगम में पदस्थ हुई थीं। विभागीय जांच में फर्जी दस्तावेज की पुष्टि होने के बाद यह कार्रवाई की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला मध्य प्रदेश में चल रही भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती की कड़ी का हिस्सा है, जहां हाल ही में छिंदवाड़ा नगर निगम में मृतक और रिटायर्ड कर्मचारियों की हाजिरी के फर्जीवाड़े का भी खुलासा हुआ था।

फर्जी दस्तावेज का खेल: CMO के नाम पर प्रमोशन का सपना

घटना की शुरुआत 21 अगस्त 2025 को हुई, जब शिवानी गर्ग ने सिंगरौली नगर निगम में एक आवेदन प्रस्तुत किया। इस आवेदन में उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री कार्यालय से उनके सेवा प्रमोशन (सेवा पदोन्नति) संबंधी आदेश जारी हो चुका है, और इसी आधार पर सहायक यंत्री के पद पर पदोन्नति का आग्रह किया। आवेदन के साथ संलग्न दस्तावेज में CMO का कथित 'सेवा प्रमोशन आई ऑफिस प्रतिवेदन' था, जो विभाग में जमा कर दिया गया।

लेकिन यह दस्तावेज शुरू से ही संदिग्ध लग रहा था। इसमें पदनाम, कूट शब्द (कोड) और हस्ताक्षर असंगत थे, जो स्पष्ट रूप से कूट रचित (फर्जी) साबित हुए। नगर निगम के अधिकारियों ने तुरंत जांच शुरू की और दस्तावेज का सत्यापन राज्य शासन के माध्यम से CMO को भेजा। 1 अक्टूबर 2025 को CMO ने स्पष्ट जवाब दिया कि "इस तरह का कोई आदेश जारी नहीं किया गया है।" यह पुष्टि होते ही मामला गंभीर हो गया।

नगरी प्रशासन आयुक्त संकेत भोंडवे ने तत्काल निर्देश जारी किए। उन्होंने शिवानी गर्ग के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी), 465 (जालसाजी), 468 (जालसाजी का दुरुपयोग) और 471 (जाली दस्तावेज का उपयोग) के तहत FIR दर्ज कराई। साथ ही, तत्काल प्रभाव से शिवानी को निलंबित कर दिया गया। आयुक्त भोंडवे ने कहा, "सरकारी दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ असहनीय है। CMO के नाम का दुरुपयोग विभाग की छवि को धूमिल करता है। सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।"

शिवानी गर्ग का बैकग्राउंड: 2016 में नियुक्ति, तबादले के बाद सिंगरौली

शिवानी गर्ग 2016 में मध्य प्रदेश राज्य नगरीय यांत्रिकी सेवा (Urban Engineering Service) में उपयंत्री के पद पर नियुक्त हुई थीं। वे विभिन्न जिलों में सेवा दे चुकी हैं, लेकिन हाल ही में एक विभागीय तबादले के बाद सिंगरौली नगर निगम में तैनात की गई थीं। सिंगरौली, जो कोयला खदानों और ऊर्जा केंद्रों के लिए जाना जाता है, में नगर निगम विकास कार्यों के कारण व्यस्त रहता है। शिवानी को जिम्मेदारी दी गई थी कि वे इंजीनियरिंग विभाग में प्रमोशन प्रक्रिया का पालन करें, लेकिन उन्होंने उल्टा फर्जी दस्तावेज बनाकर सिस्टम को चकमा देने की कोशिश की।

विभागीय सूत्रों के अनुसार, प्रमोशन के लिए नियमित मूल्यांकन और वरिष्ठता सूची का पालन अनिवार्य है। शिवानी ने CMO के नाम का इस्तेमाल कर शॉर्टकट लेने की कोशिश की, जो विफल रही। यह घटना सिंगरौली नगर निगम के पिछले घोटालों की याद दिलाती है, जैसे मई 2025 में 16 लाख की नाली निर्माण का फर्जी बिल और कचरा प्रबंधन में फर्जी गाड़ियों का मामला।

जांच का दायरा: अन्य अधिकारियों पर भी शक

जांच में यह सामने आया कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने में शिवानी अकेली नहीं थीं। नगर निगम के कुछ क्लर्क और सहायक कर्मचारियों पर भी संदेह है, जिन्होंने आवेदन को आगे बढ़ाया। आयुक्त भोंडवे ने विभागीय जांच समिति गठित की है, जो पूरे प्रमोशन प्रक्रिया की पड़ताल करेगी। राज्य शासन ने भी CMO स्तर पर सत्यापन प्रक्रिया को और सख्त करने के निर्देश दिए हैं।

मध्य प्रदेश में हाल ही में भ्रष्टाचार के कई मामले सामने आए हैं। छिंदवाड़ा नगर निगम में मृतक और रिटायर्ड कर्मचारियों की हाजिरी के फर्जीवाड़े (नवंबर 2025) और रायसेन में उपयंत्री की सेवा समाप्ति (प्रधानमंत्री आवास योजना घोटाला) जैसी घटनाएं इसका उदाहरण हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है, "भ्रष्टाचारियों को जेल भेजें, ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करें।"

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: विपक्ष ने सरकार पर निशाना

  • कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह: "नगर निगमों में भ्रष्टाचार का बोलबाला। BJP सरकार की नाकामी। सिंगरौली जैसे क्षेत्रों में विकास के नाम पर लूट।"
  • नगरी प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह: "फर्जीवाड़े पर जीरो टॉलरेंस। शिवानी गर्ग जैसे दोषियों को सजा मिलेगी।"
  • सिंगरौली कलेक्टर चंद्रशेखर शुक्ला: "जांच पूरी होने पर आगे कार्रवाई। जनता का पैसा सुरक्षित रखें।"
  • शिवानी गर्ग के समर्थक: कोई आधिकारिक बयान नहीं, लेकिन विभागीय सूत्रों ने कहा कि वे अपील करेंगी।

सिंगरौली नगर निगम के पार्षदों ने भी चिंता जताई। एक पार्षद ने कहा, "फर्जी प्रमोशन से सच्चे कर्मचारियों का मनोबल गिरता है। तत्काल जांच जरूरी।"

FIR और विभागीय जांच

FIR सिंगरौली कोतवाली में दर्ज हो चुकी है, और पुलिस ने शिवानी गर्ग के आवास पर छापा मारा है। विभागीय जांच 15 दिनों में पूरी होगी। यदि दोष सिद्ध हुआ, तो नौकरी से बर्खास्तगी और कानूनी सजा हो सकती है। राज्य सरकार ने सभी नगर निगमों में प्रमोशन दस्तावेजों का ऑडिट कराने के आदेश दिए हैं।

यह मामला मध्य प्रदेश में प्रशासनिक सुधारों की मांग को तेज कर रहा है। सिंगरौली, जो ऊर्जा राजधानी के रूप में जाना जाता है, अब भ्रष्टाचार के कारण सुर्खियों में है। क्या यह घटना अन्य फर्जीवाड़ों का पर्दाफाश करेगी? आने वाले दिनों में और खुलासे हो सकते हैं।

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