त्री कैलाश विजयवर्गीय की उमंग सिंघार पर टिप्पणी से बहुजन समाज भड़का, 'मनुवादी सोच' का लगाया आरोप – दामोदर यादव
MP Politics kailash vijayvargiya: मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सांप्रदायिक और जातीय संवेदनाओं का मुद्दा उफान पर है। राज्य सरकार के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार पर की गई कथित टिप्पणी "औकात में रहो" ने बहुजन समाज से जुड़े संगठनों को आक्रोशित कर दिया है।
बहुजन समाज से जुड़े प्रमुख संगठन दामोदर यादव मंडल ने इस टिप्पणी को न केवल व्यक्तिगत अपमान बताया है, बल्कि इसे बहुजनों और मूलनिवासियों (आदिवासियों) के सम्मान पर सीधा प्रहार करार दिया है। संगठन की ओर से जारी बयान में इसे "मनुवादी सोच" का खुलासा बताया गया है और कहा गया है कि देश बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के संविधान से चलता है, न कि जातिवादी मानसिकता से।

दामोदर यादव मंडल की ओर से जारी बयान में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कैलाश विजयवर्गीय की टिप्पणी उमंग सिंघार के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरे बहुजन समाज और मूलनिवासियों का अपमान है। बयान में लिखा है, "यह टिप्पणी बहुजनों और मूलनिवासियों का अपमान है तथा इससे 'मनुवादी सोच' उजागर होती है। सामंतशाही तथा जातिवादी मानसिकता के विरुद्ध संघर्ष जारी रहेगा। बहुजन समाज अपने अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से लड़ाई लड़ता रहेगा।" संगठन ने यह भी जोड़ा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति की गरिमा का सम्मान किया जाना चाहिए, और ऐसी टिप्पणियां समाज में विभाजन पैदा करती हैं।
घटना का पृष्ठभूमि और विवाद की शुरुआत
यह विवाद 19 फरवरी 2026 को मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान शुरू हुआ। सदन में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भगीरथपुरा में 35 परिवारों के विस्थापन और बेघर होने के मुद्दे को उठाया था। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि इन परिवारों को न्याय कब मिलेगा। इस पर कैलाश विजयवर्गीय ने गुस्से में उमंग सिंघार को "औकात में रहो" कह दिया। सदन में हंगामा मच गया और कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
उमंग सिंघार ने सदन के बाहर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह टिप्पणी उनकी औकात पर नहीं, बल्कि प्रदेश की 7.5 करोड़ जनता का अपमान है। उन्होंने कैलाश विजयवर्गीय पर अहंकार और असंवेदनशीलता का आरोप लगाया और कहा कि जनता चुनाव में ऐसी सरकार को जवाब देगी। कैलाश विजयवर्गीय ने बाद में सफाई देते हुए कहा कि उनका सब्र का बांध टूट गया था और वे अपनी टिप्पणी से संतुष्ट नहीं हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को भी सदन में माफी मांगनी पड़ी, जबकि विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा की एक बात याद कर सदन को शांत करने की कोशिश की।
बहुजन समाज की प्रतिक्रिया और राजनीतिक बयानबाजी
दामोदर यादव मंडल के बयान ने विवाद को नया मोड़ दे दिया है। संगठन ने कहा कि यह टिप्पणी मनुवादी सोच को उजागर करती है, जो बहुजनों और आदिवासियों को नीचा दिखाने की कोशिश करती है। मंडल ने डॉ. अंबेडकर के संविधान का हवाला देते हुए कहा कि देश में समानता और सम्मान का अधिकार सभी को है, और ऐसी मानसिकता के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा। संगठन ने बहुजन समाज से अपील की है कि वे लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकारों की रक्षा करें और ऐसी टिप्पणियों का जवाब दें।
विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को हाथों-हाथ लिया है। कांग्रेस ने कहा कि यह आदिवासी समाज का अपमान है और सरकार की मनुवादी सोच को दर्शाता है। बसपा और अन्य बहुजन संगठनों ने भी कड़ी निंदा की और माफी की मांग की। कुछ आदिवासी युवाओं ने कैलाश विजयवर्गीय के बंगले के बाहर प्रदर्शन किया और उनका पोस्टर जलाया। सत्ता पक्ष ने इसे विपक्ष की राजनीति बताया और कहा कि टिप्पणी बहस के दौरान दी गई थी, जिसका गलत अर्थ निकाला जा रहा है।
सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों का रुख
आदिवासी और बहुजन समाज से जुड़े कई संगठनों ने इस टिप्पणी को सामाजिक न्याय के खिलाफ माना है। एक सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा, "यह केवल एक व्यक्ति पर टिप्पणी नहीं, बल्कि पूरे समाज के सम्मान पर चोट है। आदिवासी समाज का सम्मान किसी राजनीतिक सौदेबाजी का विषय नहीं हो सकता।" जनप्रतिनिधियों ने भी कहा कि लोकतंत्र में सभी की गरिमा का सम्मान किया जाना चाहिए।
दामोदर यादव मंडल ने अपने बयान में जोर दिया कि बहुजन समाज हमेशा संवैधानिक मूल्यों के साथ खड़ा रहा है और जातिवादी मानसिकता के विरुद्ध संघर्ष करता रहेगा। संगठन ने सरकार से मांग की है कि ऐसी टिप्पणियों पर सख्त कार्रवाई हो और समाज के सम्मान की रक्षा की जाए।
राजनीतिक प्रभाव और आगे की संभावनाएं
यह विवाद बजट सत्र के बीच में आया है, जिससे सदन की कार्यवाही प्रभावित हो सकती है। विपक्ष ने इसे मुद्दा बनाकर सरकार पर हमला तेज कर दिया है। सत्ता पक्ष की ओर से माफी मांगने के बाद मामला शांत होने की उम्मीद है, लेकिन बहुजन समाज के संगठन इसे छोड़ने के मूड में नहीं हैं। वे प्रदेशव्यापी प्रदर्शन की योजना बना रहे हैं।
यह घटना मध्य प्रदेश की राजनीति में जातीय समीकरणों को प्रभावित कर सकती है, खासकर आदिवासी बहुल इलाकों में। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि क्या यह विवाद बड़ा रूप लेता है या माफी के साथ समाप्त हो जाता है। फिलहाल, दामोदर यादव मंडल की प्रतिक्रिया ने इसे बहुजन समाज की अस्मिता से जोड़ दिया है, जो राजनीतिक दलों के लिए चुनौती बन सकती है।
-
Suvendu Adhikari Net Worth: नंदीग्राम से पर्चा भरते ही चर्चा में शुभेंदु अधिकारी, कितनी है उनकी कुल संपत्ति? -
Gaurav Gogoi: ना जमीन-ना कोई काम धंधा, फिर कैसे बढ़ी गौरव गोगोई की संपत्ति? क्या है करोड़ों की नेट वर्थ का राज -
BJP लिस्ट से बाहर ‘सिंघम’ Annamalai! क्यों नहीं मिला टिकट? ‘साउथ फेस’ गायब होने के पीछे ये है अंदर की कहानी -
Kerala Election 2026: LDF का ‘मास्टर प्लान’ जारी, घोषणापत्र में गरीबी खत्म करने से रोजगार तक किए 10 बड़े ऐलान -
Bengal Election: दीदी की फिर होगी वापसी या BJP की बनेगी सरकार? ये 'हॉट सीटें' तय करेंगी किसके सिर सजेगा ताज -
'Goa में AAP को मौका दें, 1 महीने में बिजली FREE कर देंगे', Arvind Kejriwal का तगड़ा वादा -
IAS Tina Dabi Transfer: दो लव मैरिज-एक से तलाक, विवादों में घिरीं UPSC टॉपर टीना डाबी का कहां-क्यों ट्रांसफर? -
LPG Price Today: युद्ध के बीच जनता पर फूटा महंगाई बम, सिलेंडर के दाम बढ़े, आपके शहर में कहां पहुंचा रेट? -
Ashok Kumar Mittal Caste: मिठाई वाले का बेटा कैसे बना AAP का नया डिप्टी लीडर? क्या है जाति? पत्नी-बच्चे कौन? -
IPL 2026 के बीच क्रिकेट जगत में पसरा मातम, सचिन के पहले शतक के 'असली हीरो' का निधन! शराब ने डुबोया करियर -
Iran America War: ईरान ने Amazon पर किया हमला, बहरीन का उड़ाया डेटा सेंटर, क्यों है बेहद खतरनाक? -
'16 की उम्र में क्लब के बाहर 20 रु. में खुद की CD बेची', Dhurandhar के इस बड़े स्टार का सच, यूं बदली किस्मत












Click it and Unblock the Notifications