MP News: खंडवा की आदिवासी महिला के साथ गैंगरेप पर भोपाल में बवाल, महिला कांग्रेस ने फूंका CM का पुतला
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में 45 वर्षीय आदिवासी महिला के साथ गैंगरेप और निर्मम हत्या की दिल दहलाने वाली घटना के विरोध में मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस ने भोपाल में उग्र प्रदर्शन किया। महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष विभा पटेल के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री मोहन यादव का पुतला दहन किया और BJP सरकार पर कानून व्यवस्था की विफलता का आरोप लगाया।
इस घटना ने मध्य प्रदेश में महिला सुरक्षा और आदिवासी अत्याचार को लेकर सियासी तूफान खड़ा कर दिया है, जिसमें कांग्रेस ने इसे 'जंगल राज' करार दिया है।

स्थान और समय: प्रदर्शन 26 मई 2025 को भोपाल में रोशनपुरा चौराहे पर हुआ, जहां महिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पुतला दहन किया।
नेतृत्व: विभा पटेल, मध्यप्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष, ने प्रदर्शन की अगुवाई की। उनके साथ जिला अध्यक्ष संतोष कंसाना, प्रदेश महामंत्री शीतल मालवीय, तस्लीम लश्करी, लता देवरे, चंदा सरवटे, महक राणा, कुसुमलता विजयवर्गीय, ग्रामीण जिला अध्यक्ष राजकुमारी केवट, और रत्ना तंत्र पांडे समेत कई कार्यकर्ता मौजूद रहीं।
नारे और बयान: प्रदर्शनकारियों ने "BJP सरकार हाय-हाय", "महिलाओं पर अत्याचार बंद करो", और "मोहन यादव इस्तीफा दो" जैसे नारे लगाए। विभा पटेल ने कहा, "आदिवासी बहनों की सुरक्षा की बात करने वाली BJP सरकार में ऐसी घटनाएं शर्मनाक हैं। जब महिलाएं सुरक्षित नहीं, तो यह सरकार किस काम की?"
खंडवा की घटना: क्या हुआ?
घटना: 24 मई 2025 को खालवा थाना क्षेत्र के एक गांव में 45 वर्षीय आदिवासी महिला, जो दो बच्चों की मां थी, के साथ गैंगरेप हुआ। शराब के नशे में धुत दो आरोपियों-हरि पालवी (35) और सुनील धुर्वे (26)-ने महिला को पड़ोसी के घर में ले जाकर दुष्कर्म किया। इसके बाद, उन्होंने लोहे की रॉड या इसी तरह की वस्तु से महिला के निजी अंगों पर हमला किया, जिससे उनकी बच्चेदानी बाहर निकल गई। अत्यधिक रक्तस्राव के कारण महिला की मौत हो गई।
स्थिति: महिला को अर्धनग्न और लहूलुहान हालत में आरोपी के घर में पाया गया। उसकी 16 वर्षीय बेटी ने पुलिस को सूचना दी। रोशनी पुलिस चौकी की प्रभारी सुषमा परते ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया।
पोस्टमॉर्टम: खंडवा जिला अस्पताल में फोरेंसिक विशेषज्ञों की निगरानी में पोस्टमॉर्टम हुआ।
ASP राजेश रघुवंशी ने बताया कि गंभीर मारपीट और रक्तस्राव से मौत की पुष्टि हुई। पूरी रिपोर्ट का इंतजार है।
गिरफ्तारी: पुलिस ने हरि पालवी और सुनील धुर्वे को गिरफ्तार कर लिया। दोनों BNS की धाराओं (धारा 351(3)-हत्या, धारा 70(1)-गैंगरेप, धारा 351(2)-चोट) के तहत हिरासत में हैं।
MP News: महिला कांग्रेस ने इस अमानवीय घटना के खिलाफ निम्नलिखित मांगें रखीं:
- उच्चस्तरीय जांच: CBI या हाई कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच।
- फास्ट ट्रैक कोर्ट: दोषियों को 6 महीने के भीतर सजा सुनिश्चित करने के लिए विशेष अदालत।
- आदिवासी महिलाओं की सुरक्षा: विशेष कानून और निगरानी तंत्र की स्थापना, जिसमें आदिवासी क्षेत्रों में महिला पुलिस चौकियां और हेल्पलाइन शामिल हों।
मुआवजा और पुनर्वास: पीड़िता के परिवार (दो बच्चे) के लिए 10 लाख रुपये का मुआवजा और नौकरी।
पुलिस सुधार: प्रशासन की लापरवाही (जैसे समय पर एंबुलेंस न मिलना) की जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई। विभा पटेल ने कहा, "यह सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि BJP सरकार के 'जंगल राज' का सबूत है। हम सड़क से लेकर सदन तक इसकी लड़ाई लड़ेंगे।"
MP News: विक्रांत भूरिया (कांग्रेस नेता): "मध्य प्रदेश 'रेप कैपिटल' बन गया है। CM मोहन यादव गृह मंत्री के तौर पर नाकाम हैं।" उन्होंने 18% बलात्कार और 26% आदिवासी महिलाओं पर अत्याचार में वृद्धि का दावा किया।
जीतू पटवारी (प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष): "यह जंगल राज है। आदिम युग की बर्बरता को भी मात देती यह घटना।"
अरुण यादव (पूर्व केंद्रीय मंत्री): "महिला की बच्चेदानी निकाल दी गई। यह BJP नेता विजय शाह का क्षेत्र है। अब देखें वे क्या करते हैं।"
- शोभा ओझा (कांग्रेस नेत्री): "पुलिस और प्रशासन की लापरवाही ने पीड़िता की जान ली। न इलाज मिला, न एंबुलेंस।"
- BJP का जवाब: आशीष अग्रवाल (BJP प्रदेश मीडिया प्रभारी): "कांग्रेस के झूठे बयान। कमलनाथ सरकार की तुलना में अपराध कम हुए। दोनों आरोपी गिरफ्तार हैं।"
- विजय शाह (BJP नेता, खंडवा): अभी तक कोई बयान नहीं, लेकिन कांग्रेस ने उन पर निशाना साधा है।
- BJP की छवि पर असर: महिला सुरक्षा और आदिवासी कल्याण के दावों पर सवाल। कांग्रेस इसे चुनावी मुद्दा बना सकती है।
- पुलिस की लापरवाही: एंबुलेंस और इलाज में देरी की शिकायतें। रोशनी चौकी की भूमिका पर सवाल।
- मांगों का विश्लेषण
- उच्चस्तरीय जांच: CBI जांच की मांग जायज है, क्योंकि स्थानीय पुलिस पर लापरवाही के आरोप हैं। हाई कोर्ट की निगरानी से निष्पक्षता सुनिश्चित हो सकती है।
- फास्ट ट्रैक कोर्ट: निर्भया केस की तर्ज पर 6 महीने में सजा संभव है, लेकिन MP में ऐसी अदालतों की कमी एक चुनौती है।
- आदिवासी सुरक्षा कानून: आदिवासी क्षेत्रों में महिला पुलिस चौकियां और हेल्पलाइन प्रभावी हो सकती हैं, लेकिन लागू करने में समय लगेगा।
- मुआवजा: 10 लाख और नौकरी की मांग MP सरकार की नीति के अनुरूप है, जैसा कि पिछले मामलों में देखा गया।
खंडवा की आदिवासी महिला के साथ गैंगरेप और निर्मम हत्या ने मध्यप्रदेश में महिला सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। महिला कांग्रेस का भोपाल में उग्र प्रदर्शन और मुख्यमंत्री मोहन यादव का पुतला दहन इस मामले की गंभीरता को दर्शाता है। विभा पटेल और अन्य नेताओं ने उच्चस्तरीय जांच, फास्ट ट्रैक कोर्ट, और आदिवासी महिलाओं के लिए विशेष कानून की मांग की है। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन प्रशासन की लापरवाही और सियासी बयानबाजी ने मामले को जटिल बना दिया है। X पर इसे "निर्भया जैसा कांड" कहा जा रहा है, जो MP सरकार के लिए चुनौती है। यह घटना महिला सुरक्षा, आदिवासी अधिकार, और पुलिस सुधार पर तत्काल कार्रवाई की मांग करती है। ललिता की तरह न्याय की उम्मीद अब इस मामले में भी जगी है, लेकिन असली सवाल यह है-क्या खंडवा की बेटी को इंसाफ मिलेगा?












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