MP News: मध्य प्रदेश में 5वीं-8वीं के पेपर लीक से मचा हड़कंप, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे प्रश्नपत्र, जानिए
MP News: मध्य प्रदेश में 5वीं और 8वीं बोर्ड परीक्षाओं के दौरान प्रश्नपत्र लीक होने का सिलसिला अब गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। शनिवार को 8वीं कक्षा के सामाजिक विज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) का आखिरी पेपर परीक्षा से लगभग पांच घंटे पहले ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टेलीग्राम, व्हाट्सएप और अन्य मैसेजिंग ग्रुप्स पर वायरल हो गया। इसके बाद शहर के कुछ चुनिंदा परीक्षा केंद्रों के माध्यम से छात्रों तक प्रश्नपत्र पहुंचने की शिकायतें सामने आई हैं।
इस घटना ने प्रदेश की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब तक 5वीं और 8वीं कक्षाओं के कुल 9 प्रश्नपत्र लीक होने के मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें संस्कृत, विज्ञान, हिंदी, गणित, अंग्रेजी और पर्यावरण अध्ययन जैसे विषय शामिल हैं। चिंताजनक बात यह है कि पेपर लीक का यह सिलसिला परीक्षाओं की शुरुआत से ही जारी है।

परीक्षा से घंटों पहले वायरल हो जाते हैं प्रश्नपत्र
प्रदेश के कई जिलों, खासकर भोपाल से लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही हैं कि प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने से कई घंटे पहले ही सोशल मीडिया पर प्रसारित हो जाते हैं। शनिवार को होने वाली सामाजिक विज्ञान की परीक्षा दोपहर 2 बजे निर्धारित थी, लेकिन सुबह से ही कुछ टेलीग्राम चैनलों और व्हाट्सएप ग्रुप्स में वही प्रश्नपत्र प्रसारित होने लगा।
परीक्षा समाप्त होने के बाद जब वायरल पेपर का वास्तविक प्रश्नपत्र से मिलान किया गया तो प्रश्नों का क्रम और सामग्री लगभग समान पाई गई, जिससे लीक होने की आशंका और मजबूत हो गई।
संस्कृत समेत कई विषयों के पेपर पहले ही लीक
इससे पहले भी 8वीं कक्षा के संस्कृत का प्रश्नपत्र परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने से पहले ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। इसके अलावा विज्ञान, हिंदी, गणित और अंग्रेजी के प्रश्नपत्रों के भी लीक होने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। वहीं 5वीं कक्षा के पर्यावरण अध्ययन, हिंदी और गणित के पेपर भी परीक्षा से पहले बाहर आने की खबरें सामने आई थीं। लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सरकारी सिस्टम के बावजूद लीक कैसे?
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब पूरे प्रदेश में बोर्ड परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों की प्रिंटिंग से लेकर वितरण तक की पूरी व्यवस्था सरकारी सिस्टम के माध्यम से संचालित होती है, तो फिर इतने बड़े स्तर पर पेपर लीक कैसे हो रहे हैं? विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रश्नपत्र परीक्षा से कई घंटे पहले सोशल मीडिया पर पहुंच रहे हैं तो कहीं न कहीं प्रिंटिंग, पैकिंग, ट्रांसपोर्ट या परीक्षा केंद्र स्तर पर सुरक्षा में गंभीर चूक हो रही है।
जांच के आदेश, लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं
पेपर लीक के लगातार मामलों के बाद प्रशासन हरकत में जरूर आया है, लेकिन अभी तक किसी ठोस कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भोपाल में पेपर लीक की घटनाओं के बाद कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने सख्ती दिखाते हुए अधिकारियों को तत्काल जांच के निर्देश दिए हैं।
जिला परियोजना समन्वयक (DPC) की ओर से पुलिस और राज्य साइबर सेल को पत्र लिखकर मामले की जांच करने को कहा गया है। बताया जा रहा है कि कुछ हस्तलिखित प्रश्नपत्र और गणित के पेपर परीक्षा केंद्र तक पहुंचने से पहले ही बाहर आ गए थे, जिन्हें जांच के लिए पुलिस को सौंप दिया गया है।
डिजिटल ट्रेल के बावजूद आरोपी क्यों नहीं पकड़ में?
प्रश्नपत्र लीक के ज्यादातर मामले टेलीग्राम चैनलों और व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए सामने आ रहे हैं। तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होने वाले कंटेंट का डिजिटल ट्रेल आसानी से ट्रैक किया जा सकता है, जिससे संदिग्ध अकाउंट्स की पहचान संभव है।
इसके बावजूद अब तक किसी भी आरोपी की पहचान या गिरफ्तारी नहीं होना प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल खड़े करता है।
भोपाल में 34 हजार छात्र दे रहे परीक्षा
केवल भोपाल जिले में ही 8वीं कक्षा के लिए 263 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहां लगभग 34 हजार विद्यार्थी परीक्षा दे रहे हैं। इतने बड़े परीक्षा तंत्र में यदि लगातार प्रश्नपत्र लीक हो रहे हैं तो यह व्यवस्था की गंभीर कमजोरी को दर्शाता है।
लगातार हो रही घटनाओं से विद्यार्थियों और अभिभावकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि मेहनत करने वाले छात्रों का मनोबल टूट रहा है और परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता प्रभावित हो रही है।
शिक्षा व्यवस्था की साख पर सवाल
पेपर लीक की घटनाओं ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है। छात्र संगठनों और अभिभावकों की मांग है कि जांच को तेज किया जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। फिलहाल राज्य शिक्षा केंद्र की ओर से पुलिस और साइबर सेल को कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया है, लेकिन लगातार सामने आ रहे मामलों से यह साफ है कि पेपर लीक का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच एजेंसियां कब तक इस नेटवर्क का खुलासा कर पाती हैं और प्रदेश की परीक्षा प्रणाली में भरोसा फिर से बहाल हो पाता है या नहीं।
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