'भविष्य में ऐसी गलती नहीं होगी', मंत्री विजय शाह को फिर याद आयी मर्यादा! कर्नल सोफिया कुरैशी पर की थी टिप्पणी
मध्य प्रदेश के कबीना मंत्री कुंवर विजय शाह की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। कर्नल सोफिया कुरैशी पर अपनी विवादित टिप्पणी को लेकर चौतरफा घिरे मंत्री ने एक बार फिर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। विजय शाह ने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी के पीछे कोई दुर्भावना नहीं थी, बल्कि वह 'देशभक्ति के अति-उत्साह' में अपनी भाषाई मर्यादा भूल गए थे।
मंत्री विजय शाह ने अपनी सफाई में कहा कि उनका इरादा न तो भारतीय सेना का अपमान करना था और न ही किसी महिला अधिकारी की गरिमा को ठेस पहुंचाना। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, 'वो शब्द जोश और जज्बे के क्षणों में अनजाने में निकल गए थे। मेरी मंशा गलत नहीं थी और मेरी इस छोटी सी भूल से उपजा विवाद मेरे लिए अत्यंत पीड़ादायक है। मैं पहले भी क्षमा मांग चुका हूं और आज फिर अपनी गलती स्वीकार करते हुए सिर झुकाकर माफी मांगता हूं।'

'सार्वजनिक जीवन में मर्यादा जरूरी'
मंत्री ने स्वीकार किया कि एक जनप्रतिनिधि होने के नाते उन्हें शब्दों के चयन में अधिक संवेदनशील होना चाहिए था। उन्होंने सेना के प्रति अटूट सम्मान व्यक्त करते हुए कहा: 'इस घटना ने मुझे गहरा सबक सिखाया है। सार्वजनिक जीवन में वाणी पर नियंत्रण और गरिमा अनिवार्य है।' शाह ने जिम्मेदारी लेते हुए वादा किया कि भविष्य में ऐसी गलती दोबारा नहीं होगी और वे अपने शब्दों को लेकर बेहद सतर्क रहेंगे।
क्या था पूरा मामला?
दरअसल, विवाद तब शुरू हुआ जब मंत्री विजय शाह ने भारतीय सेना की जांबाज अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर एक ऐसी टिप्पणी की, जिसे सेना और नारी शक्ति का अपमान माना गया। हालांकि उन्होंने कई बार माफी मांगी है, लेकिन मामला शांत होता न देख उन्होंने एक बार फिर सेना, नागरिकों और संबंधित पक्षों से 'नि:शर्त माफी' मांगकर विवाद पर पूर्णविराम लगाने की कोशिश की है।
क्या कहा था विजय शाह ने?
इंदौर के महू स्थित रायकुंडा गांव में एक कार्यक्रम के दौरान विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी (जो ऑपरेशन सिंदूर और पहली महिला इन्फैंट्री अधिकारी के रूप में चर्चित रहीं) को 'आतंकवादियों की बहन' कह दिया था। वीडियो वायरल होने के बाद विपक्षी कांग्रेस ने इसे सेना की अस्मिता पर हमला बताते हुए उन्हें पार्टी से बाहर करने की मांग की।
कौन हैं कुंवर विजय शाह?
विजय शाह कोई नए नेता नहीं हैं, बल्कि मध्य प्रदेश की राजनीति का एक बड़ा और बेहद विवादित चेहरा हैं।
- राजनीतिक दबदबा: कुंवर विजय शाह 8 बार के विधायक हैं। 1990 से वे लगातार खंडवा की हरसूद विधानसभा (गोंड आदिवासी बहुल इलाका) से चुनाव जीतते आ रहे हैं। वे मकड़ाई रियासत के राजपरिवार से आते हैं।
- आदिवासी चेहरा: भाजपा के पास आदिवासियों के बीच बड़े नेतृत्व की कमी रही है, जिसका लाभ विजय शाह को मिलता रहा है। शिवराज सरकार में वे शिक्षा और वन मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे।
पुराने विवाद: जब पहले भी गंवानी पड़ी थी कुर्सी
यह पहली बार नहीं है जब विजय शाह ने महिलाओं या किसी समुदाय पर अभद्र टिप्पणी की थी।
- शिवराज सिंह की पत्नी पर टिप्पणी: साल 2013 में झाबुआ के एक कार्यक्रम में उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पत्नी पर 'द्विअर्थी' टिप्पणी की थी। विवाद इतना बढ़ा कि उन्हें इस्तीफा देना पड़ा, हालांकि 4 महीने बाद ही उनकी वापसी हो गई।
- किन्नर समुदाय का अपमान: 2018 में उन्होंने कहा था, 'आज गुरु के सम्मान में ताली नहीं बजाओगे, तो अगले जन्म में घर-घर जाकर ताली बजानी पड़ेगी।' इस पर किन्नर समुदाय ने भारी विरोध जताया था
- आदिवासी छात्राओं पर टिप्पणी: हॉस्टल दौरे के वक्त छात्राओं के कपड़ों को लेकर उनकी अमर्यादित टिप्पणी की भी कड़ी निंदा हुई थी।












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