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हैंडपंप सुधारने वाले कर्मचारी ₹9 हजार रुपये में अपनी सेवाएं देने को मजबूर, सरकार को दी आत्मदाह की चेतावनी

हैंडपंप सुधारने सुधारने वाले PHE विभाग के ये कर्मचारी 20 सालों से सरकार से निमंत्रण के लिए मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें नियमित नहीं किया गया। वे कई बार पीएचई मंत्री के बंगले के चक्कर काट चुके हैं। जबकि भिंड कुछ कर
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MP hand pump technician : मध्यप्रदेश में कार्यरत हैंडपंप टेक्नीशियन यानी हैंडपंप सुधारने सुधारने वाले PHE विभाग के ये कर्मचारी 20 सालों से सरकार से निमंत्रण के लिए मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें नियमित नहीं किया गया। वे कई बार पीएचई मंत्री के बंगले के चक्कर काट चुके हैं। हाकम टेक्नीशियन शाम गढ़पाले ने बताया कि भिंड जिले में हमारे कुछ साथियों को स्थाई कर्मी के रूप में वेतन दिया जा रहा है। लेकिन पूरे मध्यप्रदेश में हमारे साथ भेदभाव किया जा रहा है। हमें मात्र ₹9000 का वेतन दिया जाता है। इतनी महंगाई में हम कैसे अपना घर चलाएंगे।

हैंडपंप टेक्नीशियनों ने सरकार को दी आत्मदाह की चेतावनी

मांगे नहीं माने जाने पर दी आत्मदाह की धमकी

20 सालों से नियमितीकरण की मांग कर रहे हेडपंप टेक्नीशियनों ने आत्मदाह करने की धमकी दी है उन्होंने कहा है कि कई बाहर हम लोग मुख्यमंत्री से लेकर पीएचई मंत्री के बंगले के चक्कर काट चुके हैं सिर्फ आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। शामगढ़ वाले ने बताया कि इतना ही नहीं हमारे पीएचई विभाग के अधिकारी तो हमसे मिलने के लिए तैयारी नहीं होते। घंटो-घंटो हमको इंतजार कराते हैं। भिंड में 14 हैंडपंप टेक्नीशियन ओं को स्थाई कर दिया गया और उन्हें ₹26000 वेतन दिया जा रहा है। लेकिन हम मध्य प्रदेश में 300 से अधिक संख्या में हैं। हमें मात्र ₹9000 का वेतन दिया जा रहा है। ना हमारा पीएफ काटा जाता है।

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    हैंडपंप सुधारने वाले कर्मचारी ₹9 हजार रुपये में अपनी सेवाएं देने को मजबूर, सरकार को दी आत्मदाह की चेतावनी
     14 हैंडपंप टेक्नीशियन को कैसे किया स्थाई

    आखिरकार पीएचई विभाग ने भिंड जिले के 14 हैंडपंप टेक्नीशियन को कैसे किया स्थाई

    इसको लेकर जब वनइंडिया के संवाददाता एलएन मालवीय ने प्रमुख अभियंता केके सोनगरिया से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि यहां अभी किसी भी टेक्नीशियन को स्थाई नहीं किया गया है। हाईकोर्ट के आदेश पर कुछ लोगों को भिंड में जरूर स्थाई किया गया है तो ये मामला मेरे संज्ञान में नहीं है अभी। यानी इसका मतलब साफ है कि अगर छोटे कर्मचारियों को सरकार में नियमित होना है तो उसे कोर्ट का दरवाजा खटखटाना होगा। वरना छोटे कर्मचारी कम सैलरी पर काम करने को मजबूर होते रहेंगे।

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    English summary
    MP hand pump technician warns government about the demand for regularization
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