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MP News: विधानसभा में कांग्रेस का धमाकेदार विरोध, कफ सिरप मौत और 'पूतना' बनी सरकार, जानिए कैसे

मध्य प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र आज से शुरू होते ही गरम हो गया। चार दिवसीय (1 से 5 दिसंबर) इस संक्षिप्त सत्र के पहले दिन ही नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन का केंद्र रहा छिंदवाड़ा जिले में कफ सिरप पीने से हुई मासूम बच्चों की मौत, प्रदेश में बढ़ते बाल अत्याचार और भाजपा सरकार की कथित असंवेदनशीलता। विधानसभा परिसर में सांकेतिक प्रदर्शन ने सदन के बाहर हलचल मचा दी, जहां कांग्रेस विधायकों ने बच्चों के पुतले थामे और एक विधायिका ने 'पूतना' का गेटअप धारण कर सरकार की लापरवाही को प्रतीकात्मक रूप से उजागर किया।

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सत्र में सरकार करीब 10 हजार करोड़ रुपये का द्वितीय अनुपूरक बजट पेश करने वाली है, साथ ही नगर पालिका (द्वितीय संशोधन) विधेयक 2025 और अन्य महत्वपूर्ण बिल लाने की तैयारी में है। लेकिन विपक्ष ने साफ कर दिया कि ये मुद्दे तभी चर्चा होंगे, जब बच्चों की मौत और स्वास्थ्य व्यवस्था पर बहस हो। प्रदर्शन के दौरान सदन की कार्यवाही महज डेढ़ घंटे चली, उसके बाद कांग्रेस विधायकों ने वॉकआउट की धमकी दी।

अनोखा सांकेतिक प्रदर्शन: पुतले थामे विधायक, 'पूतना' बनी विधायिका

विधानसभा परिसर के महात्मा गांधी सभागार के बाहर सुबह 10 बजे शुरू हुए प्रदर्शन में करीब 40 कांग्रेस विधायक शामिल हुए। उनके हाथों में मासूम बच्चों के पुतले थे, जिन पर 'मेरा भविष्य मर गया' और 'सरकार सो रही है' जैसे स्लोगन लिखे थे। सबसे चर्चित रहा विधायिका डॉ. मंजू चौधरी का 'पूतना' अवतार - महाभारत की उस राक्षसी का प्रतीक, जो भगवान कृष्ण को विषैला दूध पिलाने वाली थी। विधायिका ने नीले वस्त्र धारण कर, काले मेकअप के साथ सरकार को 'बच्चों के लिए जहर बांटने वाली पूतना' करार दिया।

एक विधायक ने कहा, "ये पुतले उन सैकड़ों बच्चों के प्रतीक हैं, जिनकी जान सरकार की लापरवाही से जा रही है। कफ सिरप में जहर घोलकर बेचा जा रहा है, अस्पतालों में चूहे काट रहे हैं, लेकिन सरकार की नींद नहीं टूट रही।" प्रदर्शन के दौरान विधायकों ने तख्तियां लहराईं - 'बच्चों की मौत पर बहस हो', 'पूतना सरकार मुर्दाबाद'। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी थी, लेकिन हंगामा बिना किसी झड़प के शांतिपूर्ण रहा।

छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड: 10 बच्चों की मौत, सरकार पर लापरवाही के आरोप

प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा छिंदवाड़ा जिले का कफ सिरप कांड है, जहां पिछले दो महीनों में कम से कम 10 बच्चों की मौत हो चुकी है। जांच में पता चला कि बाजार में बिक रहा एक लोकप्रिय कफ सिरप (जिसका नाम गोपनीय रखा गया है) मिलावटी था। इसमें एथिलीन ग्लाइकॉल जैसे जहरीले तत्व पाए गए, जो बच्चों के किडनी फेलियर का कारण बने। जिला अस्पतालों में भर्ती इन बच्चों को सही इलाज न मिलने से हालत बिगड़ गई।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. संजय मिश्रा ने बताया, "10 मौतें पुष्टि हो चुकी हैं, 25 बच्चे अभी गंभीर हैं। सिरप की जांच FSSAI को भेजी गई है।" लेकिन विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने समय पर अलर्ट जारी नहीं किया। कांग्रेस ने दावा किया कि यह घटना प्रदेशभर की खराब स्वास्थ्य व्यवस्था का आईना है - जहां ग्रामीण अस्पतालों में दवाओं की कमी, डॉक्टरों की अनुपस्थिति और यहां तक कि चूहों का आतंक आम है।

पिछले हफ्ते छिंदवाड़ा में प्रभावित परिवारों ने सड़क जाम कर दिया था, जिसमें माताओं ने रो-रोकर सरकार को ललकारा। एक मां ने कहा, "मेरा 5 साल का बेटा कफ सिरप पीकर मर गया। डॉक्टर ने कहा दवा सही है, लेकिन अब क्या?"

उमंग सिंघार का तीखा प्रहार: 'पूतना बनी सरकार, माताओं की गोद सूनी'

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रदर्शन के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा, "सरकार बच्चों के मामले में भी संवेदनशील नहीं है। छिंदवाड़ा में कई परिवारों के घरों के चिराग हमेशा के लिए बुझ गए, माताओं की गोद सूनी हो गई। लेकिन पूतना बनी सरकार को स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी और समीक्षा करने की फुर्सत तक नहीं है। अस्पतालों में ऐसी बदइंतज़ामी है कि बच्चों को चूहे तक कुतर दे रहे हैं, और सरकार इस पर चर्चा करने, जवाब देने और ज़िम्मेदारी तय करने से लगातार बच रही है।"\

सिंघार ने आगे कहा, "यह सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि प्रदेश में बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की हालत और सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न है। जनता जानना चाहती है कि आखिर सरकार मासूमों की जान से खिलवाड़ होने पर भी खामोश क्यों है? हम सदन में बहस की मांग करेंगे, वरना वॉकआउट करेंगे।"
उन्होंने अन्य मुद्दों का भी जिक्र किया - जैसे महंगाई, बेरोजगारी और किसानों की उपेक्षा - लेकिन जोर दिया कि बच्चों की मौत सबसे संवेदनशील है।

अन्य विधायकों की हुंकार: 'लापरवाही असहनीय, विपक्ष चुप नहीं बैठेगा'

कांग्रेस विधायक सुखदेव पांसे ने कहा, "भाजपा सरकार की लापरवाही अब असहनीय हो चुकी है। जब सवाल मासूमों के जीवन का हो, तो विपक्ष चुप नहीं बैठेगा। हम सत्र के दौरान लगातार सदन में यह मुद्दा उठाएंगे।" विधायिका लखन पटेल ने 'पूतना' गेटअप का बचाव करते हुए कहा, "यह प्रतीक है उस व्यवस्था का, जो गरीब बच्चों को जहर पिला रही है। सरकार को जवाब देना होगा।"

सत्र का एजेंडा: अनुपूरक बजट और बिल, लेकिन विपक्ष की रणनीति साफ

सत्र में मुख्य एजेंडा:

  • द्वितीय अनुपूरक बजट: 10,000 करोड़ रुपये का, जिसमें विकास योजनाओं पर फोकस।
  • नगर पालिका (द्वितीय संशोधन) विधेयक 2025: नगरीय विकास को गति देने के लिए।
  • अन्य बिल: शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि से जुड़े प्रस्तावित विधेयक।

लेकिन कांग्रेस ने रणनीति बनाई है कि इनकी चर्चा तभी होगी, जब बच्चों की मौत पर बहस हो। सिंघार ने कहा, "सरकार अगर बहस से बचेगी, तो हम सत्र का बहिष्कार करेंगे।"

सरकार का रुख: 'कार्रवाई हो रही है, विपक्ष राजनीति कर रहा'

भाजपा सरकार ने प्रदर्शन को 'राजनीतिक स्टंट' करार दिया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सदन में कहा, "स्वास्थ्य विभाग ने कफ सिरप पर प्रतिबंध लगाया है, जांच चल रही है। विपक्ष मुद्दों को तोड़-मरोड़ रहा है।" स्वास्थ्य मंत्री राजभवन सिंह ने बताया, "FSSAI और स्थानीय स्तर पर छापेमारी हो रही है। दोषी दवा कंपनियों पर FIR दर्ज।" विपक्ष ने इसे अपर्याप्त बताया, कहा कि मंत्री स्तर पर बहस होनी चाहिए।

मासूमों की मौत पर सियासत, सत्र में और हंगामा?

आज का प्रदर्शन मध्य प्रदेश की राजनीति को नई ऊंचाई दे गया। एक तरफ मासूमों की मौत का दर्द, दूसरी तरफ सियासी आरोप-प्रत्यारोप। सवाल यह है कि क्या सरकार बहस की मांग मानेगी या सत्र हंगामे में बीतेगा? वनइंडिया हिंदी सदन की कार्यवाही पर नजर बनाए हुए है। क्या आपके इलाके में भी ऐसी घटनाएं हुई हैं? कमेंट में बताएं।

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