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MP News: जानिए सीएम मोहन यादव सड़क पर क्यों बैठे, धीरेंद्र शास्त्री संग किया भोजन, हिंदू एकता का संदेश

सनातन हिंदू एकता पदयात्रा का आज अंतिम दिन था, और इस अवसर पर एक दिल छू लेने वाला दृश्य देखने को मिला। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बाबा बागेश्वर धाम के आचार्य पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के साथ पदयात्रा में शामिल हुए।

सबसे चर्चित पल तब आया जब सीएम ने सादगी का परिचय देते हुए सड़क पर ही साधु-संतों और श्रद्धालुओं के बीच बैठकर 'बाल भोग प्रसाद' (सब्जी-पूड़ी) ग्रहण किया। यह दृश्य न केवल हिंदू एकता का प्रतीक बना, बल्कि सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गया।

Mohan Yadav sat on the road Dhirendra Shastri walked Food in Vrindavan a message of Hindu unity

पदयात्रा का भव्य समापन: दिल्ली से वृंदावन तक 170 किमी का सफर

दिल्ली के कात्यायनी माता मंदिर से 7 नवंबर को शुरू हुई यह सनातन हिंदू एकता पदयात्रा आज वृंदावन के चारधाम में समाप्त हुई। लगभग 170 किलोमीटर लंबी इस यात्रा का उद्देश्य हिंदुओं को जातिवाद से ऊपर उठाकर एकजुट करना, सनातन धर्म की रक्षा और हिंदू राष्ट्र की अवधारणा को मजबूत करना रहा। आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने यात्रा के दौरान बार-बार जोर दिया कि "यह वैचारिक क्रांति है, जहां जाति नहीं, राष्ट्रवाद प्रधान होगा।" यात्रा में लाखों श्रद्धालु शामिल हुए, जिनमें क्रिकेटर उमेश यादव, अभिनेता संजय दत्त, शिल्पा शेट्टी, जया किशोरी जैसे सितारे भी दिखे।

आज सुबह 9 बजे से चारधाम में मंचीय कार्यक्रम शुरू हुआ, जहां मुख्य अतिथि के रूप में सीएम मोहन यादव ने शिरकत की। उन्होंने पदयात्रियों के साथ पैदल चलते हुए भक्ति भजनों पर थिरकते नजर आए। कार्यक्रम के दौरान सीएम ने कहा, "भगवान गोपाल कृष्ण भी इस एकता पर मुस्कुराएंगे। सामाजिक सद्भाव और सबका साथ-सबका विकास ही हमारा मंत्र है।" मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पदयात्रा को शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने इसे "हिंदू समाज की नई क्रांति" बताया।

सड़क पर भोजन: सादगी का अनोखा उदाहरण

पदयात्रा के समापन से पहले का सबसे भावुक क्षण तब आया जब सीएम मोहन यादव ने आचार्य धीरेंद्र शास्त्री के साथ सड़क पर ही भोजन किया। हथेली में रखी पूड़ी-सब्जी को ग्रहण करते हुए उन्होंने कहा, "यह सादगी ही सनातन का मूल मंत्र है। हिंदू एकता तभी मजबूत होगी जब हम जाति-धर्म के भेदभाव भूलकर एक परिवार बनें।" यह दृश्य सोशल मीडिया पर तेजी से फैला, जहां यूजर्स ने इसे "यदुवंशी का असली स्वरूप" बताते हुए सराहा। एक यूजर ने लिखा, "इतने बड़े पद पर रहते हुए भी जमीन पर बैठकर भोजन करना, वाकई दिल जीत लिया।"

आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने भी सीएम की प्रशंसा की। उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री जी का यह कदम हिंदू समाज के लिए प्रेरणा है। हम बम नहीं, नारियल फोड़ने वाले हैं। हमारी लड़ाई विचारों की है, नफरत की नहीं।" यात्रा के दौरान शास्त्री ने उच्च आचरण पर जोर देते हुए युवाओं से अपील की कि "रील बनाओ, लेकिन रियल लाइफ से जुड़ो।"

यात्रा की पृष्ठभूमि: एकता और जागरण का संदेश

यह पदयात्रा बागेश्वर धाम की परंपरा का हिस्सा है, जो पहले भी छतरपुर से ओरछा तक 160 किमी की यात्रा कर चुकी है। लेकिन इस बार का फोकस दिल्ली-वृंदावन रहा, जहां ब्रजभूमि की पवित्रता को जोड़कर हिंदू एकता का संदेश दिया गया। यात्रा में मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। हिंदुस्तानी पसमांदा मंच के प्रदेश उपाध्यक्ष शाहनवाज मलिक ने कहा, "हिंदू-मुस्लिम भेदभाव नहीं होना चाहिए। सब एक हैं।"

राजनीतिक हस्तियां भी इसमें सक्रिय रहीं। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर, मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने फरीदाबाद में यात्रा में हिस्सा लिया। विजयवर्गीय ने इसे "धर्म और समरसता की रोशनी" बताया। उत्तर प्रदेश के दोनों उपमुख्यमंत्रियों के शामिल होने की भी चर्चा रही।

विवाद और समर्थन: दोहरी तस्वीर

यात्रा को भारी समर्थन मिला, लेकिन कुछ विरोध भी हुआ। भीम आर्मी के नेता विनय रतन सिंह ने इसे "संविधान-विरोधी" बताते हुए मध्य प्रदेश के इंदौरगढ़ में प्रदर्शन किया, जहां उनके कार्यकर्ताओं पर हमले की घटना भी दर्ज हुई। उन्होंने मांग की कि नफरत फैलाने वालों पर कार्रवाई हो। हालांकि, आचार्य शास्त्री ने स्पष्ट किया कि "यह यात्रा किसी के खिलाफ नहीं, हिंदुओं के पक्ष में है।"

आगे की राह: हिंदू राष्ट्र का संकल्प

समापन सत्र में लाखों हिंदुओं ने हिंदू राष्ट्र के लिए संकल्प लिया। सीएम मोहन यादव ने कहा, "यह यात्रा भारत को विश्व गुरु बनाने की दिशा में मील का पत्थर है।" यात्रा के दौरान "जय श्री राम" और "हिंदू राष्ट्र जिंदाबाद" के नारे गूंजते रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह हिंदुत्व की राजनीति को नई गति देगी, खासकर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में।

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