Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

MP Indore छेड़छाड़ कांड: कैलाश विजयवर्गीय का विवादित बयान, कांग्रेस का पलटवार – “घिनौना और शर्मनाक!”

इंदौर में ऑस्ट्रेलियन महिला क्रिकेटर्स से हुई छेड़छाड़ की घटना पर अब सियासत भी गर्म हो गई है। लेकिन सबसे पहले - जो बयान आया है, वो सवालों से ज़्यादा हैरानी छोड़ गया है।

बयान देने वाले कोई आम नेता नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश सरकार के ताकतवर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय हैं। वो बोले - "खिलाड़ियों को अपना स्थान छोड़ते वक्त लोकल सिक्योरिटी या एडमिनिस्ट्रेशन को बताना चाहिए।"

Indore molestation Kailash Vijayvargiya controversial statement Congress counterattack- shameful

इस पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है, इसे "घिनौना" और "शर्मनाक" करार देते हुए सरकार और प्रशासन को निशाने पर लिया। यह घटना न केवल इंदौर की छवि को धक्का पहुंचा रही है, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा और नेताओं की संवेदनशीलता पर भी गहरे सवाल खड़े कर रही है।

घटना का ब्यौरा: क्या हुआ था इंदौर में?

गुरूवार को इंदौर के पॉश इलाके पलासिया में ऑस्ट्रेलियाई महिला क्रिकेट टीम की कुछ खिलाड़ी, जो भारत दौरे पर थीं, शहर घूमने निकली थीं। ये खिलाड़ी अपने होटल के पास एक स्थानीय मार्केट में टहल रही थीं, तभी कुछ असामाजिक तत्वों ने उनके साथ छेड़छाड़ की। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दो युवकों ने खिलाड़ियों का पीछा किया, अश्लील टिप्पणियां कीं और एक खिलाड़ी का हाथ पकड़ने की कोशिश की। खिलाड़ियों ने तुरंत अपने सुरक्षा गार्ड और स्थानीय पुलिस को सूचित किया, जिसके बाद दो आरोपियों को हिरासत में लिया गया।

हालांकि, पुलिस ने इसे "छोटी घटना" करार देते हुए शुरुआत में गंभीरता नहीं दिखाई। लेकिन जब यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट बोर्ड ने इसकी निंदा की, तब जाकर पुलिस ने केस दर्ज कर जांच तेज की। इस घटना ने इंदौर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शर्मसार किया, क्योंकि शहर को "स्वच्छ भारत" के साथ-साथ "सुरक्षित शहर" की छवि के लिए भी जाना जाता है।

कैलाश विजयवर्गीय का बयान: सलाह या संवेदनहीनता?

घटना के बाद मध्य प्रदेश के शहरी विकास और गृह राज्यमंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बयान दिया, जो अब विवाद का केंद्र बन गया है। उन्होंने कहा, "खिलाड़ियों को अपना स्थान छोड़ते वक्त लोकल सिक्योरिटी या एडमिनिस्ट्रेशन को बताना चाहिए। जैसे हम लोग कहीं जाते हैं, तो कम से कम एक लोकल आदमी को बता देते हैं। मेरा ख्याल है कि खिलाड़ियों को भी इससे ध्यान में आएगा कि भविष्य में जब भी वे कहीं जाएं, तो सिक्योरिटी को सूचित करके जाएं।"

विजयवर्गीय यहीं नहीं रुके। उन्होंने एक पुरानी घटना का जिक्र करते हुए कहा, "क्रिकेट ऐसा खेल है जैसे इंग्लैंड में फुटबॉल। मैंने फुटबॉल खिलाड़ियों के कपड़े फटते देखे हैं। एक बार हम जिस होटल में रुके थे, वहां एक खिलाड़ी कॉफी पी रहा था। अचानक इतने सारे नौजवान आ गए, कोई ऑटोग्राफ ले रहा था, एक लड़की ने मेरे सामने उसे चूम लिया। उसके कपड़े फट गए। खिलाड़ियों को अपनी लोकप्रियता का एहसास होना चाहिए।"

कांग्रेस का तीखा पलटवार

कांग्रेस ने इस बयान को "घिनौना" और "शर्मनाक" करार देते हुए सरकार पर हमला बोला। पूर्व केंद्रीय मंत्री और मध्य प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अरुण यादव ने कहा, "मैं समझता हूं कि यह बहुत ही घिनौना बयान है। कैलाश विजयवर्गीय से मुझे ऐसी अपेक्षा नहीं थी। मैं उन्हें भाजपा का सुलझा हुआ नेता मानता था, लेकिन उनका यह स्टेटमेंट पूरे देश को शर्मसार कर रहा है।"

उन्होंने आगे कहा, "आप गृह राज्यमंत्री हैं, कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी आपकी है। जिन अधिकारियों ने लापरवाही बरती, उन्हें सस्पेंड करें। मुख्यमंत्री और गृह मंत्री के तौर पर आप कार्रवाई करें, न कि ऐसे बयान दें जो पीड़ितों को ही जिम्मेदार ठहराएं। यह सोच शर्मनाक है।"

कांग्रेस की प्रदेश प्रवक्ता नूरी खान ने भी बयान की निंदा करते हुए कहा, "यह बयान न केवल महिलाओं के प्रति असंवेदनशीलता दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि सरकार अपराधियों को पकड़ने के बजाय पीड़ितों को सबक सिखाने में ज्यादा रुचि रखती है। क्या महिलाएं अब शहर में घूमने से पहले परमिशन लें?"

सोशल मीडिया पर उबाल: जनता की प्रतिक्रिया

सोशल मीडिया पर इस बयान को लेकर गुस्सा और आलोचना का सैलाब उमड़ पड़ा। एक यूजर ने लिखा, "क्या अब हर महिला को बाहर निकलने से पहले पुलिस को बताना होगा? यह कैसी सोच है?" एक अन्य यूजर ने ट्वीट किया, "इंदौर में विदेशी खिलाड़ियों के साथ छेड़छाड़ हुई, और मंत्री जी कह रहे हैं कि खिलाड़ी गलत थे क्योंकि उन्होंने सिक्योरिटी को नहीं बताया। क्या अपराधी को सजा देने की बात नहीं होनी चाहिए?"

कई यूजर्स ने इस तुलना को भी गलत बताया कि विजयवर्गीय ने फुटबॉल खिलाड़ी की घटना को क्रिकेटर्स के साथ जोड़ा। एक यूजर ने लिखा, "फुटबॉलर के कपड़े फटने और छेड़छाड़ में क्या तुलना? यह अपराध को सामान्य करने की कोशिश है।"

प्रशासन की लापरवाही: क्या कहते हैं आंकड़े?

इंदौर, जो मध्य प्रदेश का आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्र है, पिछले कुछ सालों में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में बढ़ोतरी देख रहा है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के 2024 के आंकड़ों के अनुसार, इंदौर में छेड़छाड़ और उत्पीड़न के मामले 15% बढ़े हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि शहर में बढ़ते पर्यटन और भीड़भाड़ के कारण पुलिस की मौजूदगी और निगरानी अपर्याप्त है।

इस घटना में भी पुलिस की शुरुआती ढिलाई ने सवाल खड़े किए। स्थानीय लोगों का कहना है कि पलासिया जैसे व्यस्त इलाके में सीसीटीवी कैमरे और पुलिस गश्त की कमी थी। एक दुकानदार ने बताया, "यहां रात में भीड़ होती है, लेकिन पुलिस की गाड़ी शायद ही दिखती है। अगर समय पर गश्त होती, तो शायद यह घटना टल सकती थी।"

खिलाड़ियों की सुरक्षा: एक वैश्विक सवाल

यह पहली बार नहीं है जब विदेशी खिलाड़ियों के साथ भारत में ऐसी घटना हुई हो। 2013 में दिल्ली में एक ऑस्ट्रेलियाई पर्यटक के साथ छेड़छाड़ और 2017 में कोलकाता में एक विदेशी खिलाड़ी के साथ बदसलूकी की घटनाएं भी सुर्खियों में थीं। ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट बोर्ड ने इस बार भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) को पत्र लिखकर सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में मेहमान टीमों को विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल की जरूरत होती है। एक पूर्व पुलिस अधिकारी ने कहा, "विदेशी खिलाड़ियों को सामान्य पर्यटकों की तरह नहीं छोड़ा जा सकता। उनकी लोकप्रियता और पहचान उन्हें निशाना बनाती है। स्थानीय प्रशासन को पहले से प्लानिंग करनी चाहिए।"

क्या कहता है कानून?

भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354 और 509 के तहत छेड़छाड़ और महिलाओं की गरिमा भंग करने के अपराध में 3 से 7 साल तक की सजा का प्रावधान है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में सजा की दर केवल 25% है, क्योंकि ज्यादातर केस कोर्ट तक पहुंचते ही कमजोर पड़ जाते हैं। इस मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, लेकिन अभी तक चार्जशीट दाखिल नहीं हुई है।

आगे की राह: जवाबदेही या बयानबाजी?

  • क्या खिलाड़ियों की गलती थी कि वे बिना सिक्योरिटी के घूमने निकलीं?
  • क्या प्रशासन और पुलिस की लापरवाही को नजरअंदाज किया जा सकता है?
  • क्या नेताओं के बयान अपराध की गंभीरता को कम करने की कोशिश हैं?

कैलाश विजयवर्गीय का बयान भले ही सलाह के तौर पर दिया गया हो, लेकिन इसने पीड़ितों के प्रति संवेदनशीलता की कमी को उजागर किया है। कांग्रेस ने इसे मुद्दा बनाकर सरकार पर दबाव बढ़ाने की कोशिश की है, लेकिन असल सवाल यह है कि क्या इस घटना से कोई सबक लिया जाएगा?

इंदौर की इस घटना ने न केवल शहर की छवि को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि महिलाओं की सुरक्षा को लेकर हमारा सिस्टम और सोच दोनों में बदलाव की जरूरत है। जब तक अपराधियों को सख्त सजा और प्रशासन को जवाबदेही नहीं ठहराया जाएगा, तब तक बयानबाजी और सियासत ही सुर्खियों में रहेंगी।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+