Bhopal में IAS मंजूषा राय के घर पर जेसीबी से तोड़फोड़, 40 गुंडों ने क्यों तोड़ी बाउंड्रीवॉल, जानिए पूरा मामला
MP News: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दानिश कुंज कॉलोनी में 1 अगस्त 2025 को एक सनसनीखेज घटना ने प्रशासनिक और सामाजिक हलकों में हड़कंप मचा दिया। शिक्षा विभाग की उप सचिव और IAS अधिकारी मंजूषा राय के डुप्लेक्स मकान की बाउंड्रीवॉल और CCTV कैमरे जेसीबी मशीनों से तोड़ दिए गए।
मंजूषा राय ने आरोप लगाया कि हितेश बटेजा नामक व्यक्ति के नेतृत्व में 40 से अधिक गुंडे उनके घर पहुंचे, तोड़फोड़ की, और बाहर कुर्सियां लगाकर बैठ गए। यह विवाद 1800 स्क्वायर फीट के मकान के नामांतरण और रजिस्ट्री से जुड़ा है, जो वर्तमान में राजस्व न्यायालय में विचाराधीन है।

मंजूषा राय ने इस घटना की शिकायत वरिष्ठ अधिकारियों से की है और कहा, "प्रॉपर्टी का विवाद है तो सिविल कोर्ट में आओ।" यह खबर इस घटना के कारणों, दोनों पक्षों के दावों, और इसके निहितार्थों को विस्तार से उजागर करती है।
घटना का विवरण: जेसीबी और गुंडों का हमला
1 अगस्त 2025 को सुबह दानिश कुंज कॉलोनी में मकान नंबर 595 पर उस समय तनाव का माहौल बन गया, जब हितेश बटेजा और उनके साथ आए करीब 40 लोग जेसीबी मशीनों के साथ IAS मंजूषा राय के घर पहुंचे। मंजूषा राय ने बताया कि इन लोगों ने उनकी बाउंड्रीवॉल को ध्वस्त कर दिया और मकान के बाहर लगे CCTV कैमरों को तोड़ दिया।
भोपाल के दानिश कुंज में IAS अधिकारी मंजूषा राय के घर पर जेसीबी से तोड़फोड़। 40 से अधिक लोग घर के बाहर कुर्सियां लगाकर बैठे।" मंजूषा ने आरोप लगाया कि यह तोड़फोड़ सुनियोजित थी और इसका मकसद उन्हें डराना था।
मंजूषा ने कहा, "40 से ज्यादा गुंडे हमारे घर के बाहर खड़े थे। उन्होंने जेसीबी से बाउंड्रीवॉल और CCTV तोड़ दिए। अगर कोई प्रॉपर्टी विवाद है, तो सिविल कोर्ट में आएं। ऐसी गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।" घटना की सूचना मिलने पर स्थानीय प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंचे। दोनों पक्षों को समझाइश दी गई, लेकिन प्रशासन के हटने के बाद तोड़फोड़ फिर शुरू हो गई। मंजूषा ने इसकी शिकायत वरिष्ठ अधिकारियों और पुलिस से की है।
प्रॉपर्टी विवाद की जड़: 41 लाख का एग्रीमेंट
मंजूषा राय ने बताया कि विवादित मकान नंबर 595, दानिश कुंज का एग्रीमेंट 16 दिसंबर 2010 को उनके पति विक्रांत प्रवीण राय ने रंजना अहमद से 41 लाख रुपये में किया था। यह डुप्लेक्स मकान है, और पूरा भुगतान बैंक खातों के जरिए किया गया। मंजूषा ने कहा, "2011 से हमारा परिवार इस मकान में रह रहा है। जरूरत पड़ने पर हमने दो अतिरिक्त कमरे भी बनवाए, जिनका भुगतान मेरे खाते से किया गया।"
हालांकि, रंजना अहमद की मृत्यु के बाद उनके पुत्र सईद फरीद अहमद (परिवर्तित नाम रिदित अरोड़ा) को शेष राशि का भुगतान मंजूषा और उनके पति ने अपने खातों से किया। मंजूषा ने बताया कि रंजना अहमद के नाम से नामांतरण न होने के कारण रजिस्ट्री में देरी हो रही थी। इस बीच, 17 मार्च 2025 को रिदित अरोड़ा ने अतिरिक्त तहसीलदार कोलार के जरिए नामांतरण करा लिया, और 10 जून 2025 को मकान की रजिस्ट्री हितेश बटेजा की पत्नी मोना बटेजा के नाम कर दी गई। मंजूषा ने कहा, "हमें इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई। यह पूरी तरह से धोखाधड़ी है।"
कानूनी लड़ाई: नामांतरण और रजिस्ट्री पर विवाद
मंजूषा राय ने बताया कि 2021 में रिदित अरोड़ा ने नायब तहसीलदार कोर्ट में दो बार नामांतरण के लिए आवेदन किया था, लेकिन दस्तावेजों के अभाव में दोनों आवेदन खारिज हो गए। इसके बाद मंजूषा और उनके पति ने मकान में पारिवारिक जरूरतों के लिए अतिरिक्त निर्माण कराया, जिसका भुगतान उनके खाते से किया गया।
17 मार्च 2025 को रिदित अरोड़ा का नामांतरण हो गया, और 10 जून 2025 को उन्होंने मकान को मोना बटेजा को बेच दिया। मंजूषा ने इसके खिलाफ कोलार SDM कोर्ट में अपील दायर की और तहसीलदार कोर्ट में नामांतरण के खिलाफ आपत्ति दर्ज की। यह मामला वर्तमान में राजस्व न्यायालय में विचाराधीन है। मंजूषा ने कहा, "हमारे सभी रिकॉर्ड में यही मकान दर्ज है। हमने SDM और तहसीलदार के यहां आपत्ति दर्ज की है।"
प्रशासन और पुलिस की भूमिका
घटना की सूचना मिलने पर कोलार पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। IAS मंजूषा राय के घर पर तोड़फोड़ के बाद पुलिस और प्रशासन ने दोनों पक्षों को समझाइश दी, लेकिन विवाद सुलझा नहीं। मंजूषा ने आरोप लगाया कि प्रशासन के हटने के बाद हितेश बटेजा और उनके साथियों ने फिर से जेसीबी से तोड़फोड़ शुरू कर दी। पुलिस ने इस मामले में अभी तक कोई FIR दर्ज नहीं की है, और हितेश बटेजा से संपर्क नहीं हो सका।
प्रशासनिक अधिकारी इस मामले में कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। SDM कोलार ने दोनों पक्षों से दस्तावेज मांगे हैं और मामले की जांच शुरू कर दी है। हालांकि, मंजूषा ने कहा कि प्रशासन की निष्क्रियता ने उनकी सुरक्षा को खतरे में डाला है।
स्थानीय निवासियों ने भी इस घटना पर चिंता जताई। दानिश कुंज के निवासी रमेश ठाकुर ने कहा, "अगर एक IAS अधिकारी का घर सुरक्षित नहीं है, तो आम आदमी का क्या होगा?"
विशेषज्ञों की राय
कानूनी विशेषज्ञ डॉ अनिल वर्मा ने कहा, "यह प्रॉपर्टी विवाद जटिल है, क्योंकि मामला राजस्व न्यायालय में विचाराधीन है। दोनों पक्षों को कोर्ट के फैसले का इंतजार करना चाहिए। जेसीबी से तोड़फोड़ करना गैरकानूनी है और इसकी जांच होनी चाहिए।" सामाजिक कार्यकर्ता रीना शर्मा ने कहा, "एक महिला IAS अधिकारी के घर पर इस तरह का हमला शर्मनाक है। प्रशासन को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।"
तुलनात्मक घटनाएं
यह पहली घटना नहीं है जब भोपाल में प्रॉपर्टी विवाद हिंसक हुआ हो। दानिश कुंज में ही एक सड़क निर्माण के दौरान टेलीकॉम कंपनी के कर्मचारियों और ठेकेदार के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इसी तरह, लुधियाना में भग्या होम्स कॉलोनी में बाउंड्रीवॉल तोड़ने को लेकर विवाद हुआ था, जहां पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।
इस घटना ने कई सवाल खड़े किए हैं:
- कानून-व्यवस्था: भोपाल में एक IAS अधिकारी के घर पर इस तरह की गुंडागर्दी प्रशासन की नाकामी दर्शाती है।
- प्रॉपर्टी विवादों का समाधान: राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों को तेजी से निपटाने की जरूरत।
- अधिकारियों की सुरक्षा: IAS जैसे वरिष्ठ अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे?
- सियासी दबाव: इस मामले को सियासी रंग देने की कोशिशों को कैसे रोका जाएगा?
मंजूषा राय ने चेतावनी दी कि अगर प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई नहीं की, तो वह इस मामले को हाईकोर्ट तक ले जाएंगी।












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