जय गुरुदेव के सत्संग में पहुंचते ही लोगों की कैसे छूट जाती है शराब की लत, भोपाल में उमाकांत महाराज का प्रवचन
जय गुरुदेव संगठन के उमाकांत महाराज से नाम दान लेने के लिए भोपाल के जंबूरी मैदान में दूर दराज जिलों से भारी संख्या में पहुंचे लोगों का मानना है कि संत की वाणी सुनने से उनके विचार बदल जाते हैं। उन पर गुरु की कृपा हो जाती है और वह सुख शांति का अनुभव करते हैं।
सैकड़ो लोगों ने यह भी स्वीकार किया कि उनके परिवार के कुछ लोग शराब की लत परेशान थे, लेकिन संत की वाणी सुनने के बाद उनकी शराब छूट गई। भोपाल के हितेश जैन ने बताया कि वह 10 साल से शराब पी रहे थे और उन्हें इसकी लत लग गई थी। लेकिन किसी ने संत के प्रवचन सुनने की सलाह दी।

उनके प्रवचन सुनने के बाद हितेश जैन की शराब से लत छूट गई और शराब छोड़ने से वह अलग आनंद का अनुभव कर रहे है। ऐसी हजारों लोग हैं, जिनके परिवार में शराब और नशे की लत संत उमाकांत महाराज के प्रवचनों द्वारा छूट गई है।
नाम दान मिलते ही लोग तीन माला ध्यान की करते है।
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संत उमाकांत महाराज ने अपने प्रवचन में लोगों से कहा कि जब दुनिया बनी थी तब एक ही धर्म था। एक ही विद्या थी। एक ही भाषा बोली जाती थी। जो शुरू से ही चली आ रही है। उसी को सनातन कहा गया है। परमात्मा अविनाशी है और जिस जगह पर परमात्मा है, उस जगह का नाश नहीं होता। उस प्रभु का ही नाम "सनातन" है और उस प्रभु के द्वारा चलाए गए धर्म को सनातन धर्म, मानव धर्म कहते हैं जो हर इंसान के लिए होता है।
इंसान को वह परमात्मा सभी जीवों को वापस अपने पास बुलाने के लिए मनुष्य शरीर में भेज कर एक बार मौका देता है क्योंकि जब तक है जीवात्मा अपने घर अपने परमात्म अपने मालिक के पास नहीं पहुंचेगी, तब तक इसको शांति नहीं मिलेगी। बार-बार इसी संसार में आना पड़ेगा। जन्म व मरण की पीड़ा आपको कर्मों के अनुसार भोगनी पड़ेगी। इसलिए वह प्रभु अपनी ताकत देकर संतो को धरती पर भेजते हैं जिनमें प्रभु की ताकत का अनुभव होता है
बाबा जयगुरूदेव धर्म विकास संस्था का उज्जैन में है भव्य मंदिर और आश्रम
संत उमाकांत महाराज ने आगे कहा कि धरती पर संत हमेशा से रहे। ऋषि मुनि अवतारी शक्ति योगी, योगेश्वर आदि सभी संतों का यहां आना हुआ है। हम आपको बता दें कि बाबा जय गुरुदेव जी महाराज के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी और इस समय के समर्थ सद्गुरु बाबा उमाकांत जी महाराज पूरे विश्व को स्थाई सुख शांति दिलाने का उपाय बता रहे हैं ।लोगों को शाकाहारी नशा मुक्त। चरित्रवान बनाकर जीते जी प्रभु प्राप्ति का रास्ता यानी आदिकाल के पांच नाम का दान दे रहे हैं। यह नामदान एक शक्ति है जो समस्त संसार को चला रही है। बेशुमार त्रिलोक अनगिनत ब्रह्मांड उसी नाम के आधार पर टिकी है और विचरण कर रही है। सदगुरु द्वारा दिए गए नाम की कमाई से ही जीवात्मा का उद्धार होता है।सारांश यह है कि मनुष्य शरीर जीते जी प्रभु दर्शन के लिए मिला है। गुरुदेव का कहना है कि हम सब को समृद्ध गुरु को खोज कर उनसे नाम लेकर आत्मा का कल्याण कर लेना चाहिए।
बैतूल के एक डॉक्टर भी जय गुरुदेव का प्रवचन सुनने हुए हमे नजर आए
उन्होंने कहा मेरी तरह अनेक डॉक्टर का यह मानना है कि शराब, मांस, तंबाकू, नशीले पदार्थो इत्यादि खाने से कैंसर के रोग हो जाते हैं। जिससे अनेक कष्टों का सामना इंसान को करना पड़ता है। इसलिए मनुष्य को शाकाहारी भोजन करना चाहिए। इस दो दिवसी संत समागम में लाखों की संख्या में जंबूरी मैदान में लोग पहुंच रहे है। उनके रहने खाने की व्यवस्था जिले के हिसाब टोली बनाकर लोगों ने स्वयं अपने स्वयं की खर्चे से व्यवस्था की है।












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